SC: आवारा कुत्तों को पकड़ने वाले आदेश पर रोक की मांग; कोर्ट ने कहा- समस्या की वजह अधिकारियों की निष्क्रियता
सुप्रीम कोर्ट में विरोधी फैसलों के कारण अब लावारिस कुत्तों के मुद्दे पर आज बड़ी पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस बीआर गवई ने यह मामला तीन सदस्यीय पीठ को सौंप दिया था। बता दें कि इस मामले में शीर्ष अदालत की दो अलग-अलग पीठों में अलग फैसले पारित हुए। इसके बाद सीजेआई गवई ने तीन जजों की पीठ का गठन किया। इस खबर में जानिए, आज की सुनवाई से जुड़ी अपडेट्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की पूरी समस्या स्थानीय अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को दिए गए शीर्ष अदालत के निर्देशों पर रोक लगाने की मांग वाली अंतरिम याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा, 'पूरी समस्या स्थानीय अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण है।' न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि जिन लोगों ने भी शीर्ष अदालत का रुख किया है और हस्तक्षेप याचिका दायर की है, उन्हें अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी।
इससे पहले लावारिस कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों के दो परस्पर विरोधी फैसलों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई ने मामला बड़ी पीठ को सौंप दिया था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से सभी लावारिस कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। पीठ ने कहा था, सभी इलाके लावारिस कुत्तों से मुक्त किए जाने चाहिए, किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इस आदेश की पूरे देश में पशु प्रेमियों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई।
सीजेआई गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष वकील ननिता शर्मा ने इस मामले को उठाया। कहा, शीर्ष कोर्ट की दो पीठों ने इस मामले में परस्पर विरोधी फैसले दिए हैं। सीजेआई ने कहा, मैं इस पर विचार करूंगा। शर्मा ने कॉन्फ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स (इंडिया) संगठन की याचिका का उल्लेख करते हुए मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। संगठन ने दिल्ली में लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी हुई है।
इस तरह परस्पर विपरीत हैं शीर्ष कोर्ट के आदेश
- जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की पीठ का पूर्व निर्णय है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में कुत्तों की अंधाधुंध हत्या नहीं की जा सकती। सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा होनी चाहिए। जस्टिस माहेश्वरी ने कहा था, प्रशासन को मौजूदा कानूनों की भावना के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
- जस्टिस पारदीवाला व जस्टिस महादेवन की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में लावारिस कुत्तों को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
- जस्टिस माहेश्वरी की पीठ के ही मई, 2024 के एक अन्य आदेश में इस मुद्दे से जुड़ी याचिकाओं को संबंधित हाईकोर्ट भेजा गया था।
पशु प्रेमी आदेश को मान रहे अवैज्ञानिक और क्रूर
जस्टिस पारदीवाला की पीठ के आदेश के बाद पशु प्रेमियों में गुस्सा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी सहित जॉन अब्राहम, जाह्नवी कपूर सरीखे बॉलीवुड के कलाकारों ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे अवैज्ञानिक और क्रूर करार दिया। फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के बाहर वकीलों व पशु प्रेमियों में हाथापाई का वीडियो भी सामने आया। पशु अधिकार के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन पेटा की भारतीय इकाई भी इससे असहमत है।