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Pune Police: अब एआई के सहारे उगाही कर रहा लॉरेंस बिश्नोई गैंग, पुणे में पुलिस ने किया बड़े नेटवर्क का खुलासा

Sun, 26 Jul 2026 10:43 AM IST
Sunil Mehrotra सुनील मेहरोत्रा
Updated Sun, 26 Jul 2026 10:43 AM IST
सार

पुलिस के मुताबिक, गिरोह एक कॉलिंग एप का इस्तेमाल कर रहा था। यह एप एआई तकनीक की मदद से कॉल को दुनिया के अलग-अलग सर्वरों के जरिए भेजता था, जिससे कॉल का असली स्रोत छिप जाता था। जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी आपस में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बातचीत करते थे, ताकि उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो।

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Pune Police: Lawrence Bishnoi gang now using AI for extortion; police bust major network in Pune
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अंडरवर्ल्ड भी अब तेजी से एआई का इस्तेमाल करने लगा है। अब तक फर्जी वीडियो, साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी में एआई के इस्तेमाल की बातें सामने आती रही थीं, लेकिन अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने भी कारोबारियों से उगाही मांगने के लिए एआई का सहारा लेना शुरू कर दिया है। पुणे पुलिस ने ऐसे ही एक नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जो एआई की मदद से धमकी भरे कॉल और मैसेज भेजकर उद्योगपतियों से करोड़ों रुपये की उगाही करने की कोशिश कर रहा था। पुणे पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 17 वर्षीय एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में शहर के चार उद्योगपतियों को धमकी भरे कॉल और मैसेज भेजे गए। उनसे दो करोड़ रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक की उगाही मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच के दौरान पुलिस इस पूरे नेटवर्क तक पहुंची।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पावन प्रकाशराम बराड़, सत्यप्रकाश कालूराम शिलोरा और रविकुमार राजेंद्रकुमार जांगड़ा के रूप में हुई है। पावन और सत्यप्रकाश राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले हैं, जबकि रविकुमार हरियाणा के सिरसा का निवासी है। नाबालिग को पंजाब के बठिंडा से हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की अलग-अलग फैक्ट्रियों में काम करते थे। नौकरी की आड़ में वे उद्योगपतियों और कारोबारियों की जानकारी जुटाते थे और फिर उसे बिश्नोई गैंग तक पहुंचाते थे।
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जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन विदेशी पिस्तौल, दस कारतूस और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि 18 जून को पुणे-सासवड रोड स्थित एक स्टील फैक्टरी के मालिक से 50 करोड़ रुपये की उगाही मांगने के दौरान आरोपियों ने फैक्टरी के बाहर चार गोलियां भी चलाई थीं, ताकि धमकी को गंभीर साबित किया जा सके। अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) तेजस्वी सातपुते ने मीडिया को बताया कि आरोपी ऐसे मैसेजिंग और कॉलिंग एप का इस्तेमाल कर रहे थे, जिनसे किए गए कॉल और मैसेज का डिजिटल रिकॉर्ड आसानी से नहीं मिल पाता। गिरोह के सदस्य इन्हीं माध्यमों से एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस की निगरानी और तकनीकी जांच से बचने के लिए गिरोह ने आधुनिक तकनीक का व्यवस्थित इस्तेमाल किया था।
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पुलिस के मुताबिक, गिरोह एक कॉलिंग एप का इस्तेमाल कर रहा था। यह एप एआई तकनीक की मदद से कॉल को दुनिया के अलग-अलग सर्वरों के जरिए भेजता था, जिससे कॉल का असली स्रोत छिप जाता था। जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी आपस में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बातचीत करते थे, ताकि उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो।

जांच का सबसे चौंकाने वाला खुलासा एआई के इस्तेमाल को लेकर हुआ। पुलिस के अनुसार, गिरोह धमकी भरे वॉयस कॉल और ऑडियो मैसेज तैयार करने के लिए एआई टूल का इस्तेमाल कर रहा था। इससे पीड़ितों के लिए यह समझ पाना लगभग नामुमकिन हो जाता था कि कॉल वास्तव में किसने किया है। खास बात यह रही कि अधिकांश आरोपी मराठी नहीं जानते थे, लेकिन उद्योगपतियों को धमकी भरे कॉल धाराप्रवाह मराठी में किए गए। जांच अधिकारियों का मानना है कि ये आवाजें एआई की मदद से तैयार की गई थीं, जिससे ऐसा लगता था कि सामने कोई व्यक्ति सीधे बात कर रहा है।


पुलिस के अनुसार, पुणे की हांडेवाड़ी स्थित एक फैक्टरी में काम करने वाला रविकुमार आरजू बिश्नोई और बिश्नोई गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में था। वह संभावित टारगेट की जानकारी जुटाकर आरजू बिश्नोई और शुभम लोणकर तक पहुंचाता था। पुलिस का कहना है कि आरजू, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई है, जबकि शुभम लोणकर पुणे में बिश्नोई गिरोह का नेटवर्क संभालता था। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद से शुभम लोणकर फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुणे पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तकनीकी कार्यप्रणाली, एआई टूल के इस्तेमाल और बिश्नोई गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला इस बात का संकेत है कि संगठित अपराध अब सिर्फ हथियारों और गुर्गों के भरोसे नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे भी अपना नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
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