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मधुबनी सीट: पेंटिंग और मखाना के लिए है मशहूर, चुनाव में हिंदू-मुस्लिम बयान 'विकास' पर भारी

Wed, 01 May 2019 02:27 PM IST
ललित फुलारा अमर उजाला
अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Wed, 01 May 2019 02:27 PM IST
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Lok sabha chunav 2019 know everythings about Bihar Madhubani lok sabha constituencies
मधुबनी सीट

मधुबनी बिहार के दरभंगा प्रमंडल का एक प्रमुख शहर और जिला है। दरभंगा और मधुबनी को मिथिला संस्कृति का केंद्र माना जाता है। मैथिली और हिंदी यहां की प्रमुख भाषाएं हैं। विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग और मखाना की पैदावार की वजह से मधुबनी की एक अलग पहचान है। मखाना की खेती करने वाले किसान भूजल स्तर गिरने और मखाना की कम कीमत मिलने की समस्या से परेशान हैं। उनका कहना है कि जल संकट की वजह से मखाना का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सुव्यवस्थित बाजार न होने के कारण उचित दाम भी नहीं मिल रहा है। बता दें कि 1952 से 1976 तक मधुबनी जिले के तहत दो सीटें दरभंगा पूर्व और जयनगर सीट थी। 1976 में परिसीमन के बाद झंझारपुर और मधुबनी सीट बनी। मधुबनी संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, मधुबनी, केवटी और जाले आती है । 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इनमें से तीन सीटें राजद ने, एक भाजपा ने, एक कांग्रेस ने और एक सीट रालोसपा ने जीती । आइए मधुबनी सीट के सियासी समीकरण पर एक नजर डालते हैं...


 

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मधुबनी पेंटिंग

दरभंगा पूर्व सीट पर हुए पहले चुनाव में और फिर 1957 में कांग्रेस के अनिरुद्ध सिन्हा जीते थे। 1962 के चुनाव में इस सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के योगेंद्र झा सांसद चुने गए। 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के शिव चंद्र झा सांसद बने। 1971 में कांग्रेस ने इस सीट से जगन्नाथ मिश्रा को उतारा। वह जीते और बाद में बिहार के मुख्यमंत्री भी बने । जयनगर सीट पर 1952 में कांग्रेस के श्याम नंदन मिश्रा, 1957 में कांग्रेस के यमुना प्रसाद मंडल, 1967 और 1971 के चुनाव में सीपीआई के भोगेन्द्र झा चुनाव जीते।

 

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हुकुमदेव नारायण यादव-अशोक यादव - फोटो : Amar Ujala

1976 में परिसीमन हुआ और मधुबनी सीट बनी। 1977 में इस सीट से चौधरी हुकुमदेव नारायण यादव जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। 1980 में यहां से कांग्रेस के शफ़ीकुल्ला अंसारी जीते लेकिन 4 महीने बाद ही उनका निधन हो गया। मई 1980 में यहां फिर चुनाव हुए और सीपीआई के भोगेंद्र झा जीते। 1984 में यहां से कांग्रेस के मौलाना अब्दुल हन्ना अंसारी जीते। 1989 और 1991 के चुनाव में इस सीट से सीपीआई के टिकट पर फिर भोगेंद्र झा जीते। भोगेन्द्र झा इस सीट पर पांच बार जीते। 1996 में सीपीआई के चतुरानन मिश्र जीते। 1998 और 2004 के चुनाव में कांग्रेस के शकील अहमद ने यहां बाजी मारी। 1999, 2009 और 2014 के चुनाव में यहां से भाजपा के हुकुमदेव नारायण यादव जीते। अगली स्लाइड में पढ़िए मधुबनी सीट पर विकास पर भारी हिंदू-मुस्लिम बयान

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मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
80 साल के बुजुर्ग सलामत हुसैन और अहमदा गांव के युवा अमित कुमार राम का कहना है कि मधुबनी में विकास पर हिंदू-मुस्लिम बयान भारी पड़ रहे हैं। 'हिंदू-मुस्लिम' करने से विकास कार्य दब जाते हैं। मधुबनी के एक बड़े वर्ग की यही मानना है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में  सड़क, बिजली और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में बहुत काम हुआ है और ऐसे में नेताओं को हिन्दू- मुस्लिम संबंधी बयानों से बचना चाहिए। मधुबनी का भवानीपुर क्षेत्र कवि कोकिल विद्यापति की कर्मस्थली और उगना महादेव मंदिर के लिए विख्यात है । 

 
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अशोक यादव (मधुबनी से भाजपा उम्मीदवार)
भवानीपुर के सलामत हुसैन और मोहम्मद चांद कहते हैं, ‘काम तो हुआ है । स्कूल में अच्छी पढ़ाई हो रही है, उगना रेलवे हाल्ट बन गया है, सड़क भी अच्छी है । अब तो पीने के पानी का टैंक भी बन गया है । लेकिन नेता लोग ‘हिन्दू मुस्लिम’ करके सब खराब कर रहे हैं । जब काम किया है तो किस बात का डर । काम के आधार पर वोट मांगिए, हिन्दू मुस्लिम नहीं करिये । ’’ अहमदा गांव के अमित कुमार राम कहते हैं ‘हमारे क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। लेकिन हिन्दू- मुस्लिम करने से काम दब जाता है।’ मधुबनी में ग्रामीण इलाकों में मुसलमानों का एक बड़ा तबका चाहता है कि राम मंदिर मुद्दे का जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए। अहमदा गांव के अली हसन कहते हैं ‘अगर समाधान अदालत से ही हो तो भी इसका रास्ता निकलना चाहिए।’  चुनाव में मधुबनी लोकसभा सीट पर राजग की ओर से वर्तमान सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के पुत्र अशोक यादव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। 

 
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