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अपराधियों का बचना होगा मुश्किल, घटनास्थल पर पहुंचकर सबूत जुटाएगी फॉरेंसिक टीम
Thu, 04 Feb 2021 09:59 PM IST
योगेश साहू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 04 Feb 2021 09:59 PM IST
सार
- दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में तैनात होगी फॉरेंसिक मोबाइल लैब्स की टीम
- एक से दो महीने में रिपोर्ट मिल जाने से अपराधियों को जल्द मिलेगी सजा
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दिल्ली पुलिस
- फोटो : delhipolice.nic.in
विस्तार
देश में अपराधों के विश्लेषण के मामले में स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। ज्यादातर मामलों में पुलिस पारंपरिक तरीके से ही अपराधों की जांच करती है। इससे कई बार अपराधियों के सजा से बच जाने की गुंजाइश बन जाती है। लेकिन बदलते समय में साइबर और फॉरेंसिक लैब्स के बढ़ते दखल से अपराधियों तक पहुंचना न सिर्फ आसान हो रहा है, बल्कि सटीक अपराधियों की पहचान भी आसान हो गई है। दिल्ली ने आज 6 नए फॉरेंसिक मोबाइल लैब्स की स्थापना कर इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है क्योंकि अब इनके जरिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल तक पहुंचकर अपराध की जांच करेगी और जल्द से जल्द अपराधियों तक पहुंच आसान बनाएगी।
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दिल्ली के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने गुरुवार को फॉरेंसिक लैब्स का उद्घाटन करते हुए कहा कि अभी तक विभिन्न अपराधों के मामले में फॉरेंसिक जांच होने पर रिपोर्ट आने में पांच से छह साल तक का समय लग जाता है। जिन मामलों में डीएनए रिपोर्ट की आवश्यकता होती थी, उनमें भी लंबा समय लग जाता है। लेकिन अब यह रिपोर्ट एक से दो महीने के अंदर मिल जाया करेगी और इससे अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में कमी आएगी।
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दिल्ली फॉरेंसिक लैब्स, रोहिणी की निदेशक दीपा वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि सामान्य तरीके से अपराधों की जांच करने के दौरान गलती की बहुत अधिक संभावनाएं बची रह जाती हैं। थोड़ी सी कमी रह जाने पर अपराधियों के कोर्ट में सजा से बच निकलने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन फॉरेंसिक सबूत अकाट्य होते हैं और इनके सामने आने पर अपराधी के लिए अपना अपराध स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है। इसमें साइबर अपराधों को रोकने के लिए हाइटेक तरीके भी इस्तेमाल किए जाएंगे।
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दिल्ली की विशाल आबादी को देखते हुए फॉरेंसिक मोबाइल लैब्स की छह नई यूनिटें खोली गई हैं। इन्हें दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात रखा जाएगा और पुलिस द्वारा किसी भी घटना की जानकारी देने पर टीम घटनास्थल पर ही पहुंचकर जरूरी साक्ष्य उठाएगी। इससे सबूतों को इकट्ठा करने में कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि सामान्य पुलिसकर्मी के द्वारा फॉरेंसिक सबूत इकट्ठा करने पर इनकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।