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पंजाब के बाद अब राजस्थान में कृषि कानून ‘निष्प्रभावी’ बनाने को विधेयक लाई सरकार

Sun, 01 Nov 2020 02:44 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 01 Nov 2020 02:44 AM IST
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Gehlot government introduced three bills in the rajasthan assembly
rajasthan assembly

राजस्थान सरकार ने हाल ही में बने केंद्रीय कृषि कानूनों को ‘निष्प्रभावी’ बनाने वाले तीन विधेयक शनिवार को विधानसभा में पेश किए। कांग्रेस शासित पंजाब पहले इनके खिलाफ विधेयक पारित कर चुका है।

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राजस्थान के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कृषि उपज व वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण, राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तीकरण व संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध व राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 सदन के पटल पर रखे। इसके अलावा धारीवाल व कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कुछ और विधेयक सदन में पेश किए।
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हालांकि इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व अन्य नेताओं की याद में शोक रखा गया और सदन की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर ने कहा, भाजपा विधेयकों का विरोध करेगी और सोमवार को बहस के दौरान साबित कर देगी कि केंद्रीय कृषि कानून किसानों के हित में है।
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वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि चुनावों में किसानों की आय दोगुना करने की बात करने वाले पीएम मोदी कॉर्पोरेट कंपनियों के हितों में काम कर रहे हैं और किसान विरोधी कानून लेकर आए हैं।

गहलोत ने पहले ही की थी घोषणा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गहलोत ने 20 अक्तूबर को कहा था कि कांग्रेस देश के अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और एनडीए सरकार द्वारा बनाए गए किसान विरोधी कानूनों का विरोध करती रहेगी। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के खिलाफ विधेयक पारित किए हैं और राजस्थान भी जल्द ऐसा ही करेगा।

विधेयक में किसानों के उत्पीड़न में सजा का प्रावधान
कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 में सरकार ने कहा कि कृषि मंडी उपज समिति अधिनियम, 1961 के विनियामक ढांचे के जरिये राज्य के किसानों व कृषि से जुडे़ लोगों के रक्षा उपायों को दोबारा स्थापित करने की दृष्टि से यह विधेयक लाई है। इसमें किसानों के उत्पीड़न पर सजा का प्रावधान किया गया है।

अगर कोई व्यापारी किसानों का उत्पीड़न करता है तो उसे तीन से सात साल की कैद या जुर्माना से दंडित किया जाना चाहिए। यह जुर्माना पांच लाख से कम नहीं होगा। केंद्रीय कानून में किसानों को उत्पीड़न से बचाने का कोई उपाय नहीं किया गया है।

इसी तरह, किसान (सशक्तीकरण व संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 में किसानों के उत्पीड़न की स्थिति में संबद्ध व्यक्ति या कंपनी या कारपोरेट हाउस को तीन से सात साल की कैद या कम से कम पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।


किसानों को गुमराह कर रहे गहलोत: पूनिया
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा, केंद्रीय कानूनों का विरोध कर मुख्यमंत्री गहलोत किसानों को गुमराह कर रहे हैं। एक ओर तो वह सहकारी संघवाद की बात करते हैं और दूसरी ओर केंद्र के कल्याणकारी कृषि कानूनों के खिलाफ संशोधन विधेयक ला रहे हैं। हकीकत यह कि कोई भी राज्य सरकार केंद्रीय कानूनों के खिलाफ कानून नहीं ला सकती।

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