फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   energy sector Crisis and opportunity India at crossroads global leadership in green energy sector possible

ऊर्जा क्षेत्र में संकट और अवसर: दोराहे पर भारत, त्वरित फैसले से हरित ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व संभव

Thu, 10 Jul 2025 07:18 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 10 Jul 2025 07:18 AM IST
सार

एफएटीई के अनुसार, अगले दस वर्षों में भारत की ऊर्जा मांग दुनिया में सबसे तेजी के साथ बढ़ेगी। औद्योगिकीकरण, बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण यह मांग सालाना 4-5 फीसदी की दर से बढ़ रही है। रिपोर्ट कहती है, यह उछाल तभी टिकाऊ बन सकता है जब भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों में ठोस निवेश करे।

विज्ञापन
energy sector Crisis and opportunity India at crossroads global leadership in green energy sector possible
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

भारत एक तरफ बढ़ती ऊर्जा मांग पूरी करने, स्वच्छ तकनीकों और नीतिगत सुधारों की दौड़ में है, तो दूसरी ओर निवेश की कमी, कोयला निर्भरता और ऊर्जा असमानता जैसे जोखिमों में उलझा हुआ है। यह आकलन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की ताजा फोरकास्टिंग और असेसमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एनर्जी (एफएटीई) रिपोर्ट-2025 में किया गया है। एक तरह से भारत ऊर्जा क्षेत्र में दो राहों के बीच खड़ा है।

विज्ञापन


रिपोर्ट भारत को न केवल चेतावनी देती है बल्कि हरित ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व का मौका भी सामने रखती है, बशर्ते वह अभी निर्णायक कदम उठाए। अगर तत्काल नीतिगत निर्णय और निवेश नहीं किए गए तो ऊर्जा संकट गहरा सकता है लेकिन यदि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ग्रीन एनर्जी नीति को तत्परता से लागू किया गया, तो भारत आत्मनिर्भर व ऊर्जा परिवर्तन का वैश्विक मॉडल भी बन सकता है। एफएटीई के अनुसार, अगले दस वर्षों में भारत की ऊर्जा मांग दुनिया में सबसे तेजी के साथ बढ़ेगी। औद्योगिकीकरण, बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण यह मांग सालाना 4-5 फीसदी की दर से बढ़ रही है। रिपोर्ट कहती है, यह उछाल तभी टिकाऊ बन सकता है जब भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों में ठोस निवेश करे।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: PM Modi: पीएम मोदी ने अब तक विदेशी सांसदों को 17 बार किया संबोधित, कांग्रेस के सभी पूर्ववर्तियों के बराबर
विज्ञापन
विज्ञापन


निवेश की कमी सबसे बड़ी रुकावट
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि भारत को हरित ऊर्जा में आगे बढ़ने व ऊर्जा संकट से उबरने के लिए मौजूदा से पांच गुना अधिक निवेश की जरूरत है, लेकिन सच्चाई यह है कि निजी निवेशक अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश करने से हिचकते हैं। अंतरराष्ट्रीय जलवायु फंडिंग की पहुंच भारत तक सीमित है। भारत में कुल बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत कोयले से होता है, जिससे यह अब भी ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। इससे भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।


मेक इन इंडिया और ग्रीन एनर्जी आत्मनिर्भरता की कुंजी :
रिपोर्ट के अनुसार, मेक इन इंडिया व ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में भारत की प्रगति, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय स्रोतों के उत्पादन में यदि भारत स्वदेशी तकनीक और निर्माण को प्राथमिकता देता है तो न केवल ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि लाखों रोजगार भी सृजित होंगे।

ये भी पढ़ें: Weather: देशभर में भारी बारिश, कई नदियां उफनीं; त्रिपुरा में बाढ़...सैकड़ों बेघर, वाराणसी में कई घाट डूबे

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अगली क्रांति का केंद्र बन सकता है
‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के तहत भारत ने 2030 तक 5 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। भारत यूरोप और जापान जैसे बाजारों के लिए बड़ा निर्यातक बन सकता है। ग्रीन एनर्जी विस्तार से 10 लाख से अधिक नई नौकरियों की उम्मीद है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed