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'जल्द बनाएं विशेष अदालतें': ड्रग्स मामलों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को दिए क्या निर्देश?
Mon, 07 Sep 2026 08:13 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 07 Sep 2026 08:13 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों में हुई चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष अदालतें जल्द गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने और प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर छह सप्ताह में पूरा करने को कहा।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को मादक पदार्थों से जुड़े कानून के तहत मामलों में हुई चिंताजनक बढ़ोतरी से निपटने के लिए समर्पित विशेष अदालतें जल्द गठित करने का निर्देश दिया।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को बताया कि मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के मामलों के प्रभावी निपटारे के लिए 449 विशेष अदालतों की जरूरत है। इनमें से 176 अदालतें पहले से काम कर रही हैं।
419 नई अदालतों के जल्द गठन का क्यों दिया गया निर्देश?
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, "मामलों की मौजूदा लंबित स्थिति और एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों में दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए हमारा मानना है कि सभी आवश्यक 419 अदालतों का जल्द से जल्द गठन किया जाना न्याय के हित में और जरूरी है।"
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पीठ ने संबंधित सभी अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने और इन विशेष अदालतों के गठन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने यह काम प्राथमिकता के आधार पर छह सप्ताह में पूरा करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट 'इन री: क्रिएशन ऑफ स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट्स' नाम से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले की सुनवाई कर रहा था।
देश में कितनी नई एनआईए अदालतों का गठन?
शीर्ष अदालत ने 20 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, जिनमें एनआईए और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) शामिल हैं, की ओर से जांच किए जा रहे आतंकवाद और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का ब्योरा मांगा था। इसका उद्देश्य मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष समर्पित अदालतों के गठन की दिशा में आगे बढ़ना था।
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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को बताया कि मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के मामलों के प्रभावी निपटारे के लिए 449 विशेष अदालतों की जरूरत है। इनमें से 176 अदालतें पहले से काम कर रही हैं।
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419 नई अदालतों के जल्द गठन का क्यों दिया गया निर्देश?
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, "मामलों की मौजूदा लंबित स्थिति और एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों में दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए हमारा मानना है कि सभी आवश्यक 419 अदालतों का जल्द से जल्द गठन किया जाना न्याय के हित में और जरूरी है।"
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पीठ ने संबंधित सभी अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने और इन विशेष अदालतों के गठन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने यह काम प्राथमिकता के आधार पर छह सप्ताह में पूरा करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट 'इन री: क्रिएशन ऑफ स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट्स' नाम से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले की सुनवाई कर रहा था।
देश में कितनी नई एनआईए अदालतों का गठन?
- एनडीपीएस मामलों के अलावा ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से जांच किए जाने वाले मामलों की विशेष सुनवाई के लिए देशभर में आठ नई अदालतें गठित की गई हैं। इसके साथ एनआईए मामलों के लिए विशेष अदालतों की कुल संख्या 22 हो गई है।
- पीठ ने आठ मई को निर्देश दिया था कि एनआईए की ओर से जांच किए गए मामलों में लंबित 10 से 15 मुकदमों के लिए कम से कम एक विशेष अदालत गठित की जाए। पीठ ने कहा कि सरकार और उच्च न्यायालयों के सहयोग से इस आदेश का "उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो गया है।"
- विभिन्न राज्यों और उच्च न्यायालयों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि एनआईए के मामलों के लिए जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त अदालतें तय समयसीमा में गठित की जाएंगी। कर्नाटक और तमिलनाडु के वकीलों ने कहा कि दोनों राज्य क्रमश: तीन और दो एनआईए अदालतें दो सप्ताह के भीतर गठित करेंगे।
- केरल के वकील ने बताया कि वहां ऐसी दो अदालतें एक महीने में काम करना शुरू कर देंगी। पीठ ने असम सरकार को भी दो प्रस्तावित एनआईए अदालतों के गठन की प्रक्रिया तेज करने और उन्हें चार सप्ताह के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया। असम के वकील ने बताया कि राज्य में एक एनआईए अदालत पहले से काम कर रही है।
- इसी तरह शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को मौजूदा दो अदालतों के अलावा तीन और एनआईए अदालतें गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। जम्मू-कश्मीर के वकील ने बताया कि वहां चार अदालतों की जरूरत है, जिनमें से एक पहले से काम कर रही है।
- उत्तराखंड के वकील ने कहा कि राज्य में एक एनआईए अदालत है, लेकिन कोई मामला लंबित नहीं है। उत्तर प्रदेश और बिहार के वकीलों ने बताया कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए दोनों राज्यों में क्रमश: एक और दो एनआईए अदालतें हैं।
शीर्ष अदालत ने 20 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, जिनमें एनआईए और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) शामिल हैं, की ओर से जांच किए जा रहे आतंकवाद और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का ब्योरा मांगा था। इसका उद्देश्य मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष समर्पित अदालतों के गठन की दिशा में आगे बढ़ना था।
- अदालत ने केंद्र से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए अदालतें स्थापित करने को प्रत्येक अदालत के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि देने पर विचार करने को कहा था।
- पीठ ने पहले कहा था कि मामलों का जल्द निपटारा आरोपियों और पीड़ितों, दोनों के अधिकारों के बीच संतुलन कायम करेगा। यह स्वत: संज्ञान याचिका एनआईए की जांच वाले मामलों की सुनवाई वर्षों तक लंबित रहने की चिंताओं के बाद शुरू की गई थी।