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अमेरिका समेत दुनिया के देशों को क्यों चाहिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन

Wed, 08 Apr 2020 05:06 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 08 Apr 2020 05:06 PM IST
सार

  • अमेरिका जैसे विकसित देशों में मच्छर नहीं होते
  • वे दवा नहीं बनाते और भारत है सबसे बड़ा उत्पादक देश
  • भारत के पास अपनी जरूरत से कई गुना ज्यादा है बनाने की क्षमता
  • कोविड-19 से लड़ने में आएगी काम

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CoronaVirus: why usa and other countries need hydroxychloroquine from india
HydroxyChloroquine - फोटो : Social Media (सांकेतिक)

विस्तार

अमेरिका जैसे दुनिया के विकसित देशों में मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का प्रकोप कम है। इसलिए वे हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवा नहीं बनाते। वहीं भारत के तमाम राज्यों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग बनी हुई है। इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा (70 फीसदी) हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन उत्पादक देश है। इस क्षेत्र में भारत की तीन (आईपीसीए, कैडिला, वालैक) फार्मास्युटिकल कंपनियों की बादशाहत है। बताते हैं भारत महीने में करीब 40-45 टन हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन बना सकता है।
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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की डिमांड कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने के मामले में बढ़ी है। 200 एमजी के हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की टैबलेट हर महीने 20 करोड़ बनाए जा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर इस उत्पादन को ककीब दो गुना किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार भारत के पास हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की पर्याप्त मात्रा है।

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हम इस दवा की पड़ोसी देशों और दुनिया के जरूरतमंद देशों आपूर्ति कर सकते हैं। फार्मास्युटिकल विभाग के सचिव का कार्यालय भी जरूरत से काफी अधिक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के होने की जानकारी दे रहा है।
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वहीं कैडिला और आईपीए से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के आयात को लेकर अमेरिका ने भी प्रतिबंध हटा लिया है। 25 मार्च को भारत ने इस दवा की आवश्यकता को देखते हुए इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सूत्र बताते हैं रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच में बातचीत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति का मुद्दा उठा था। सूत्र का कहना है कि भारत ने अपने लोगों की आवश्यकता को देखते हुए दवा का स्टॉक करने के बाद इसे जरूरतमंद देशों को देने का निर्णय लिया है।

ब्राजील, अमेरिका समेत तमाम देशों में है दवा की मांग

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रपं के सामने आने के बाद अचानक काफी बढ़ गई। हालांकि अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने अभी कोविड-19 के मरीजों पर इसके इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट गाइड लाइन जारी नहीं की है।



लेकिन इस बीच अमेरिकी सरकार ने भारत की दो कंपनियों (आईपीसीए और कैडिला) को 200 एमजी की एक करोड़ टैबलेट की आपूर्ति करने का आर्डर दे दिया है। अमेरिका अपनी आवश्यकता का करीब 40 फीसदी हिस्सा भारत से आयात करने पर निर्भर है।

वहीं, भारतीय दवा निर्माता कंपनियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर वह हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी कर सकते हैं।

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