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बंगाल: कोलकाता हाई कोर्ट का आदेश- मंत्री की बेटी की नौकरी रद्द, 41 महीने का वेतन लौटाना होगा
Fri, 20 May 2022 05:40 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 20 May 2022 05:40 PM IST
सार
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने 77 अंक और अंकिता अधिकारी ने केवल 61 अंक हासिल किए थे। हाईकोर्ट ने नियुक्ति की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
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कोलकाता हाईकोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में पश्चिम बंगाल के एक मंत्री की बेटी की नौकरी को खारिज कर दिया और उसे एक शिक्षक के रूप में 41 महीने के कार्यकाल के दौरान मिले वेतन को वापस करने का आदेश सुनाया। न्यायमूर्ति अविजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने शिक्षा राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी की बेटी अंकिता को नवंबर 2018 से अब तक का वेतन दो किस्तों में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करने का निर्देश दिया।
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अदालत ने आदेश दिया कि अंकिता अधिकारी को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा अनुशंसित और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा नियुक्त शिक्षक के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही अगले आदेश तक उसके स्कूल परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी। पहली किश्त 7 जून तक और दूसरी इस साल 7 जुलाई तक चुकानी है।
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हाई कोर्ट एक उम्मीदवार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि भर्ती परीक्षा में अधिकारी की बेटी के मुकाबले अधिक अंक हासिल करने के बावजूद उसे नौकरी नहीं दी गई। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने 77 अंक और अंकिता अधिकारी ने केवल 61 अंक हासिल किए थे। हाईकोर्ट ने नियुक्ति की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने आदेश दिया कि अधिकारी का पद खाली रहेगा और याचिकाकर्ता को दिया जाएगा।
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इससे पहले मंत्री अपनी बेटी की कथित अवैध नियुक्ति को लेकर पूछताछ के लिए यहां सीबीआई कार्यालय पहुंचे। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, क्योंकि वह मामले के संबंध में हाईकोर्ट द्वारा अपने अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए निर्धारित समय सीमा का पालन करने में विफल रहे थे। अधिकारी और उनकी बेटी पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के अलावा भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।