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राहुल गांधी की बढ़ती सियासी ताकत से भाजपा सतर्क: पहली बार देशभर में खोला इतना बड़ा मोर्चा, जानें पूरा मामला

Wed, 04 Nov 2026 07:09 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Wed, 04 Nov 2026 07:09 AM IST
सार

करीब एक दशक तक राहुल गांधी को नजरअंदाज करने वाली भाजपा अब उनके खिलाफ देशव्यापी अभियान चला रही है। पार्टी की चिंता एसआईआर से ज्यादा विपक्षी दलों में राहुल गांधी की बढ़ती स्वीकार्यता, इंडिया ब्लॉक की एकजुटता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बढ़ती सक्रियता को लेकर है।

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BJP on alert over Rahul Gandhi growing political strength Launches major nationwide offensive
पीएम मोदी और गृह मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

करीब एक दशक तक लगातार अनदेखी के बाद भाजपा ने इसी महीने राहुल गांधी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा देशव्यापी मोर्चा खोला है। एसआईआर के बहाने विपक्ष की एकजुटता की मजबूत कोशिश के बीच पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत देशभर में मार्च और पदयात्राएं शुरू की हैं। पार्टी के इस अभियान में राज्यों के मुख्यमंत्रियों से लेकर सभी बड़े केंद्रीय नेता शामिल हैं। दरअसल, पार्टी के इस अभियान के पीछे विपक्ष और क्षेत्रीय दलों में तेजी से बढ़ रही राहुल की स्वीकार्यता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अचानक आई आक्रामकता है।

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रामलीला मैदान की रैली ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
एसआईआर के मुद्दे पर राजधानी में जगह-जगह विरोध प्रदर्शनों के बाद रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली को लेकर भाजपा का विश्लेषण पार्टी के अचानक सतर्क होने की कहानी बयां करता है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि रामलीला मैदान में शिरकत करने वाले ज्यादातर कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। इसका अर्थ है कि पार्टी के कार्यकर्ता अब मुखर हो रहे हैं। इसके अलावा, इस रैली ने साबित किया कि इंडिया ब्लॉक में शामिल दल अब पहले की तुलना में अधिक एकजुट नजर आ रहे हैं।

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राहुल के मुद्दे की हवा निकालने की रणनीति
जपा की कोशिश देशव्यापी अभियान के जरिए विपक्ष, खासकर राहुल के एसआईआर संबंधी मुद्दे की हवा निकालने की है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे का वास्तव में जमीन पर कोई असर नहीं है। हालांकि, मुख्य समस्या विपक्ष की राहुल की अगुवाई में लगातार मजबूत हो रही एकता है। यही कारण है कि गृह मंत्री ने राहुल को इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने की चुनौती दी है। पार्टी को लगता है कि एक बार इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा के बाद इसे हमेशा के लिए दफन किया जा सकता है।

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अखिलेश से ममता तक, राहुल के नेतृत्व को मिल रही गंभीरता
पहले बरती गई उदासीनता के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मंच पर उपस्थिति और ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव सहित कई क्षत्रपों का राहुल के नेतृत्व को स्वीकार करना बताता है कि विपक्ष में राहुल की स्वीकार्यता बढ़ रही है। इंडिया ब्लॉक में शामिल दल अब और अधिक सियासी नुकसान से बचने के लिए राहुल के नेतृत्व को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से स्वीकार कर रहे हैं।

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