Seat Ka Samikaran: सिकंदरा विधानसभा सीट पर अब तक नहीं खुला भाजपा-राजद का खाता, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात सिकंदरा सीट की। सिकंदरा सीट से 2020 में जीतन राम मांझी की पार्टी हम के प्रफुल्ल कुमार मांझी जीते थे।
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विस्तार
बिहार में साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के पहले ही बिहार में सियासी हलचल देखने को मिल रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस सियासी उठापटक के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज सिकंदरा सीट की बात करेंगे। इस सीट से 2020 में हम के प्रफुल्ल कुमार मांझी जीते थे। पूर्व मंत्री रामेश्वरम पासवान यहां से सात बार जीतकर विधानसभा पहुंचे।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला जमुई भी है। जमुई जिला एक अनुमंडल और 10 ब्लॉक में बंटा है। जिले में चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में सिकंदरा सीट की बात करेंगे। यह सीट 1962 में अस्तित्व में आई।
1962: कांग्रेस को मिली जीत
1962 के विधानसभा चुनाव में सिकंदरा सीट से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस के मुश्ताक अहमद शाह ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के गीता नंदन सिंह को 4,695 वोट से हराया। इस चुनाव में मुश्ताक अहमद शाह को कुल 14,453 वोट मिले। वहीं, गीता नंदन शाह को कुल 9,758 वोट मिले।
1967: संसोपा को मिली जीत
1967 में सिकंदरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हो गई। इस चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एस. विवेकनंदन को 14,051 वोट से जीत मिली। वहीं, इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार जे. लाल दूसरे नंबर पर रहे। विवेकनंदन को कुल 30,941 वोट मिले। वहीं जे. लाल को 16,890 वोट से संतोष करना पड़ा।

1969: कांग्रेस की वापसी
- 1969 के चुनाव में सिकंदरा सीट से कांग्रेस ने तीन साल बाद वापसी की। इस चुनाव में कांग्रेस के रामेश्वरम पासवान को जीत मिली। उन्होंने भाकपा के भोला मांझी को 4,733 वोट से हराया। रामेश्वरम पासवान को कुल 24,213 वोट मिले। वहीं, भोला मांझी को 19,480 वोट मिले।
- 1972 में कांग्रेस के रामेश्वरम पासवन दोबार विधायक बने। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस (ओ) के नगीना चौधरी को 1,012 वोट से शिकस्त दी। रामेश्वरम को कुल 36,485 वोट मिले। वहीं, नगीना चौधरी को 35,475 वोट मिले।
1977: नगीना चौधरी को मिली जीत
पिछले चुनाव में हार का सामना करने वाले नगीना चौधरी को जीत मिली। इस चुनाव में जनता पार्टी के नगीना चौधरी ने कांग्रेस की सहिल रानी 18,332 वोट से हराया। नगीना चौधरी को कुल 32,255 और सहिल रानी को 13,923 वोट मिले।

1980: रामेश्वरम पासवान की वापसी
- 1980 के चुनाव में सिंकदरा विधानसभा सीट से रामेश्वरम पासवान की वापसी हुई। उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय लड़ा। उन्होंने भाकपा के लोकनाथ आजाद को 17,131 वोट से हराया। रामेश्वरम पासवान को कुल 40,304 वोट मिले। वहीं, लोकनाथ आजाद को 23,173 वोट मिले। इस चुनाव में तात्कालीन विधायक नगीना चौधरी चौथे नंबर पर रहे।
- 1985 के चुनाव में भी कांग्रेस के टिकट से रामेश्वरम पासवान ने जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने भाकपा के भोला मांझी को 12,635 वोट से हराया। रामेश्वरम पासवान को 49,233 वोट मिले। वहीं, भोला मांझी को 36,598 वोट मिले।
1990: प्रयाग चौधरी को मिली जीत
- लगातार दो बार सिंकदरा सीट से जीत हासिल करने वाले रामेश्वरम पासवान को 1990 के चुनाव में हार मिली। इस चुनाव में भाकपा के प्रयाग चौधरी को 16,516 वोट मिले। इसके साथ ही प्रयाग चौधरी ने सिंकदरा सीट से 1995 और 2000 में भी जीत हासिल की।
- 1995 के चुनाव में प्रयाग चौधरी ने 14,155 वोट से जीत हासिल की। इस चुनाव में भी कांग्रेस के रामेश्वरम पासवान दूसरे नंंबर पर रहे।
- 2000 के चुनाव में प्रयाग चौधरी ने कोसल पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने जदयू के जनकदेव राम को 25,843 वोट से हराया। प्रयाग चौधरी राबड़ी देवी की सरकार में भूमि सुधार और राजस्व राज्य मंत्री का पद संभाला था।
2005: रामेश्वरम पासवान की वापसी
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। दोनों चुनाव में रामेश्वरम पासवान ने जीत हासिल की। इसके साथ ही 2010 में भी जीत दर्ज की। 2005 के चुनाव में लोजपा रामेश्वरम ने राजद के प्रयाग चौधरी को 31,189 वोट से हराया।
वहीं, 2005 अक्तूबर चुनाव में रामेश्वरम पासवान ने पार्टी बदल कर जदयू का दामन थामा और जीत दर्ज की। इस चुनाव में भी उन्होंने सिकंदरा सीट से हैट्रिक लगा चुके प्रयाग चौधरी को 15,365 वोट से हराया। रामेश्वरम पासवान को कुल 38,060 वोट मिले और प्रयाग चौधरी को मात्र 22,695 वोट से संतोष करना पड़ा।
2010 विधानसभा चुनाव में जदयू के रामेश्वरम पासवान ने लोजपा के सुभाष चंद्र बोस को 12,361 वोट से हराया। रामेश्वरम पासवान 2005 में नीतीश कुमार के सरकार में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कल्याण एवं समाज कल्याण मंत्री भी रहे हैं।
2015: कांग्रेस को मिली जीत
2015 के चुनाव में सिंकदरा सीट से कांग्रेस के सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी को 7,990 वोट से जीत मिली। लोजपा के सुभाष चंद्र बोस दूसरे नंबर पर रहे। सुधीर कुमार को कुल 59,092 वोट मिले। वहीं, सुभाष बोस को 51,102 वोट मिले।
2020: हम को मिली जीत
2020 में हम पार्टी के प्रफुल्ल कुमार मांझी को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के सुधीर कुमार बंटी को 5,505 वोट से हराया। प्रफुल्ल कुमार को 47,061 वोट मिले। वहीं, सुधीर को 41,556 वोट मिले।
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