Seat ka samikaran: दो चेहरों को छोड़ बिस्फी ने हर जीतने वाले को दिए दो या अधिक मौके, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बिस्फी विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में भजपा के हरिभूषण ठाकुर को जीत मिली थी।
विस्तार
बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावी तारीखों के एलान से पहले ही सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों बड़े गठबंधनों में खींचतान जारी है। इस सियासी हलचल के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बिस्फी विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते है बिस्फी सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक मधुबनी भी है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर (एससी), झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा विधानसभा सीटें शामिल हैं। बिस्फी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मधुबनी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। मधुबनी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, मधुबनी यह चार मधुबनी जिले, वहीं केवटी और जाले दरभंगा जिले का हिस्सा हैं। बिस्फी सीट पर सबसे पहले चुनाव 1967 में हुए थे।
1967: राजकुमार पुर्बे को मिली जीत
बिस्फी सीट पर सबसे पहले 1967 में चुनाव हुए थे। तब इस सीट पर भाकपा के आर.के. पुर्बे को जीत मिली थी। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार ए. नूरुद्दीन को 10,038 वोट से हरा दिया था।
1969 के चुनाव में एक बार फिर भाकपा के राज कुमार पुर्बे को ही जीत मिली। एक बार फिर उन्होंने लोकतांत्रिक कांग्रेस के अजीज नूरुद्दीन को 1258 वोट से हरा दिया था।
1972 में कांग्रेस को मिली जीत
इस चुनाव में कांग्रेस ओर्गनाइजेशन के अजीज नुरुद्दीन ने भाकपा के राज कुमार पुर्बे को 7584 वोट से हरा दिया था।

1977 में फिर भाकपा को जीत
1977 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाकपा को जीत मिली। भाकपा के राज कुमार पुर्बे ने जनता पार्टी के सिराज़ुल इस्लाम को 22046 वोट से हरा दिया।
1980 में एक बार फिर भाकपा के राजकुमार पुर्बे को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस (आई) के अजीज नूरुद्दीन को 7149 वोट से हरा दिया।
1985: कांग्रेस को मिली जीत
1985 में कांग्रेस के शकील अहमद को जीत मिली थी। उन्होंने भाकपा के राज कुमार पुर्बे को 23314 वोट से हरा दिया था।
1990 में एक बार फिर कांग्रेस के शकील अहमद को ही जीत मिली। उन्होंने भाकपा के राम चंद्र यादव को 27112 वोट से हरा दिया था।
1995 में भाकपा को जीत
पिछली बार के चुनाव नतीजे इस बार पूरी तरह बदल गए थे। भाकपा के रामचन्द्र यादव ने कांग्रेस के डॉ. शकील अहमद को 15976 वोट से हरा दिया था।
2000 में फिर कांग्रेस को जीत
एक बार फिर कांग्रेस के डॉ. शकील अहमद को हार के बाद सीट पर 2000 में जीतने का मौका मिला। उन्होंने राजद के अब्दुल हक को 12599 वोट से हरा दिया था।
2005 में बार हुए चुनाव
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहली बार चुनाव फरवरी 2005 में हुए थे। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार हरिभूषण ठाकुर को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के मो. अहमर हसन को 1469 वोट से हरा दिया था।
दूसरी बार चुनाव 2005 अक्तूबर में हुए थे। उस चुनाव में एक बार फिर निर्दलीय हरि भूषण ठाकुर ने कांग्रेस के मो. अहमर हसन को 6805 वोट से हरा दिया था।

2010 में राजद को मिली जीत
2010 में राजद के फैयाज अहमद ने जदयू के हरि भूषण ठाकुर को 9501 वोट से हरा दिया था। फैयाज अहमद को 47169 और हरि भूषण ठाकुर को 37668 वोट मिले थे।
2015 में राजद के फ़ैयाज़ अहमद ने एक बार फिर जीत दर्ज की थी। उन्होंने बीएलएसपी के मनोज कुमार यादव को 35325 वोट से हरा दिया था।

2020 में भाजपा को पहली जीत
2020 में बिस्फी सीट पर भाजपा को पहली बार जीत मिली। भाजपा के हरिभूषण ठाकुर ने राजद के फैयाज अहमद को 10,282 वोट से हरा दिया। हरिभूषण ठाकुर पहले दो चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत चुके हैं।
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