Seat ka Samikaran: कभी थी कांग्रेस का गढ़, पूर्व मुख्यमंत्री भी बगहा के विधायक रहे, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बगहा विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में भाजपा के राम सिंह ने जीत दर्ज की थी।
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विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव चंद महीने दूर हैं। सियासी बिसात पर शह-मात का खेल भी शुरू हो चुका है। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम बगहा विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते है बगहा सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। बगहा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र वाल्मीकि नगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। 1957 से पहले यह रामनगर और बगहा दो नामों से जानी जाती थी। वाल्मीकि नगर लोकसभा में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें वाल्मीकि नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, सिकटा शामिल हैं। इस सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस ने राज किया है।
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1952 में सीट से दो विधायक चुने गए
1952 में यह सीट दो हिस्सों में थी- बगहा और रामनगर। तब यहां से जो दो उम्मीदवार चुनाव जीते थे वे दोनों ही कांग्रेस पार्टी से थे। कांग्रेस के केदार पांडे और जगरमाथ प्रसाद श्रीवास्तव ने यहां से पहला चुनाव जीता था। आगे चलकर केदार पांडे कांग्रेस के बड़े मंत्री बने थे।

1957 में केदार और नरसिंह को जीत
1957 में फिर बगहा और रामनगर से जीतने वाले दोनों विधायक भी कांग्रेसी थे। यहां से फिर कांग्रेस के दो उम्मीदवारों को जीत मिली थी। कांग्रेस के नरसिंह बैठा थे और दूसरे केदार पांडे।
1962 के विधानसभा चुनाव में बगहा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। इस चुनाव में पांडे बगल की रामनगर सीट से चुनाव मैदान में उतरे। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
1962 में नरसिंह बैठा का गढ़ बनी सीट
1962 में बगहा सीट एक स्वतंत्र सीट बन गई। राम नगर को एक अलग सीट बना दिया गया था। इसके बाद बगहा कांग्रेस का गढ़ बन गई थी। कांग्रेस के नरसिंह बैठा को यहां से जीत मिली थी। कांग्रेस के नरसिंह बैठा ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) के भोला राउत मेस्टार को 15,988 वोट से हरा दिया था।
इसके बाद वह 1967, 1969, 1972 और 1977 का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर बगहा सीट से जीते थे। 1967 में उन्होंने पीएसपी के के. हरिजन को 9482 वोट से हरा दिया था।
1969 में उन्होंने जनसंघ (बीजेएस) के कंचन बैठा को 7713 वोट से हार दिया था। वहीं 1972 में नरसिंह ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (संसोपा) के सुवर्ण बैठा को 17,539 वोट से हरा दिया था। 1977 के चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के कंचन बैठा को 13,233 वोट से हरा दिया था।
1980 में त्रिलोक हरिजन को जीत मिली
1980 में इस सीट पर इंदिरा गांधी की कांग्रेस(आई) को जीत मिली थी। कांग्रेस(आई) के त्रिलोकी हरिजन ने भाजपा के मेलाहा महतो को 20,586 वोट से हरा दिया था।
1985 में एक बार फिर से कांग्रेस के त्रिलोकी हरिजन को जीत मिली थी। उन्होंने लोकदल के पुनवासी राम को 6662 वोट से हरा दिया था।

बगहा से पांच बार जीते पूर्णमासी राम
1990 के बाद से पूर्णमासी राम को यहां से पांच बार लगातार जीत मिली थी। उन्होंने अलग-अलग पार्टी में रहते हुए यह जीत दर्ज की। 1995, 2000, 2005 फरवरी और 2005 अक्तूबर में भी उन्हें इस सीट से जीत मिली थी। 1990 में जनता दल के पूर्णमासी राम ने भाजपा के कैलाश बैठा को 44,513 वोट से हरा दिया था।
1995 में पूर्णमासी राम ने पिछली बार भाजपा और इस बार समता पार्टी से उतरे कैलाश बैठा को 39,779 वोट से हरा दिया था।
2000 में भी यह मुकाबला पूर्णमासी और कैलाश बैठा के बीच में हुआ। इस बार पूर्णिमा राजद के टिकट पर चुनावी मैदान में थे। राजद के पूर्णमासी राम ने निर्दलीय कैलाश बैठा को 19,477 वोट से हराया।
2005 फरवरी में जदयू के पूर्णमासी राम ने राजद के नरेश राम को 31,670 वोट से हरा दिया था। 2005 अक्तूबर में बिहार में एक बार फिर से चुनाव हुए थे। तब यहां से जदयू के पूर्णमासी राम ने सीट से पांच बार लगातार विधायक रहे नरसिंह बैठा को 18,391 वोट से हरा दिया था।
2009 में हुए उपचुनाव
पूर्णमासी राम 2009 में, वे 15वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए। इसके बाद यह सीट खाली हो गई थी। जिसके बाद सीट पर उपचुनाव कराने पड़े थे। तब यहां से जदयू के टिकट पर कैलाश बैठा को जीत मिली थी।
2010 में प्रभात रंजन सिंह को मिली जीत
2010 में जदयू के प्रभात रंजन सिंह ने राजद के राम प्रसाद यादव को 49,055 वोट से हरा दिया था।
2015 में भाजपा को पहली बार इस सीट पर जीत मिली थी। भाजपा के राघव शरण पांडे ने भीष्म साहनी को 8183 वोट से हरा दिया था। आरएस पांडे एक राजनीतिज्ञ और भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी हैं।
2020 में इस सीट पर भाजपा ने राम सिंह को टिकट दिया। राम सिंह ने कांग्रेस के जयेश मंगलम सिंह को 30,020 वोट से हरा दिया था।
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