Seat Ka Samikaran: पूर्व CM के भतीजे ने नीतीश की कुर्सी के लिए छोड़ी थी विधायकी, ऐसा है जाले का चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज जाले विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से वर्तमान में भाजपा के जिबेश कुमार विधायक हैं।
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विस्तार
पहले जाले सीट के बारे में जाने
बिहार में कुल 38 जिलें हैं। उन में से ही एक जिला दरभंगा भी है। दरभंगा जिला 3 अनुमंडल और 18 ब्लॉक में बंटा है। इस जिले में कुल 10 विधानसभा सीट हैं। इनमें कुशेश्वर अस्थान (एससी),गौरा बौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, केवटी, जाले शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में जाले सीट की बात करेंगे। जाले सीट पर पहली बार 1952 में चुनाव हुआ था।
1952: पहले तीन चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत
जाले सीट पर पहली जीत कांग्रेस के अब्दुल सामी नदावी को मिली। कांग्रेस की जीत का सिलसिला 1957 और 1962 में भी जारी रहा। लेकिन चेहरे बदलते रहे।
1952 के चुनाव में नदावी ने 1,703 वोट से जीत दर्ज की। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार जमुना करजी दूसरे नंबर पर रहे। नदावी को 6,897 और करजी को 5,194 वोट मिले थे।
1957 के चुनाव में जाले सीट से शेख ताहिर हुसैन को जीत मिली। इस चुनाव में हुसैन ने निर्दलीय उम्मीदवार अभयचंद्र मिश्रा को 4,087 वोट से हराया था। 1962 के विधानसभा चुनाव में नारायण चौधरी को 5,110 वोट से जीत मिली। इस चुनाव में भी अभयचंद्र मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा। अभयचंद्र ने यह चुनाव स्वतंत्र पार्टी से लड़ा था। चौधरी को 14,157 वोट मिले थे। वहीं, अभयचंद्र को 9,047 वोट मिले थे।
1967 : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को मिली पहली जीत
लगतार तीन बार से जीतती आ रही कांग्रेस को 1967 के चुनाव में जाले सीट हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार खादिम हुसैन को जीत मिली। वहीं, तत्कालीन विधायक चौधरी दूसरे नंबर पर रहे।

1969: भारतीय जनसंघ को मिली जीत
1969 के चुनाव में जनसंघ के तेजनारायण राउत को जीत मिली। उन्होंने 1967में जीते खादिम हुसैन को 10,650 वोट से हराया। राउत को कुल 30,185 वोट मिले थे। वहीं, हुसैन को 19,535 वोट मिले थे।

1972 : कम्युनिस्ट पार्टी की वापसी
कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदावार खादिम हुसैन ने पिछले चुनाव में मिली हार का बदला लेते हुए 1972 के चुनाव में तेज नारायण को 10,660 वोट से हरा दिया। इस चुनाव में हुसैन को 27,325 वोट मिले। वहीं राउत को 16,665 वोट मिले थे।
1977 : जनता पार्टी के कपिल देव को मिली जीत
1977 के चुनाव में खादिम हुसैन को एक बार फिर से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में जनता पार्टी के कपिल देव ठाकुर को 1,398 वोट से जीत मिली। उन्हें कुल 24,119 वोट मिले थे। हुसैन को 22,721 वोट मिले थे।
1980 : कम्युनिस्ट पार्टी की वापसी, लेकिन चेहरा बदला
1980 के चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ने वापसी की। इस चुनाव में भाकपा के अब्दुल सलाम को कुल 24,317 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस के सुनील कुमार झा को 5,976 वोट से हराया था। इस चुनाव में तत्कालीन विधायक कपिल देव ठाकुर छठे नंबर खिसक गए थे। उन्होंने मात्र 711 वोट मिले थे।
1985: 19 साल बाद कांग्रेस की वापसी
कांग्रेस ने लंबे समय के बाद 1985 के चुनाव में जाले सीट पर वापसी की। इसके साथ ही कांग्रेस ने 1990 के चुनाव में भी जीत हासिल की। हालांकि, दोनों चुनाव में उम्मीदावार बदल गए। 1985 के चुनाव में लोकेश नाथ झा ने सीपीआई के उम्मीदवार अब्दुल सलाम को 21,387 वोट से हराया था। लोकेश को कुल 40,385 वोट मिले थे। वहीं सलाम को 18,998 वोट मिले थे।
1990 विधानसभा चुनाव में जाले से विजय कुमार मिश्र को जीत मिली। उन्हें 36,931 वोट मिले थे। सीपीआई के उम्मीदावार अब्दुल सलाम को 31,452 वोट से संतोष करना पड़ा।
विजय कुमार मिश्र पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र के बेटे और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के भतीजे हैं। विजय जाले के विधायक बनने से पहले लोकदल पार्टी से दरभंगा के सांंसद भी रहे।
1995: दो हार के बाद अब्दुल सलाम की वापसी
भाकपा ने 1995 में जाले सीट पर फिर से वापसी की। भाकपा के अब्दुल सलाम ने इस चुनाव में विजय मिश्र को 13,572 वोट से हराया। सलाम को 45,241 वोट मिले। वहीं विजय मिश्र को 31,689 वोट मिले थे।
2000: पार्टी बदल कर जाले से जीते विजय
पिछले चुनाव में हार का सामना कर चुके विजय मिश्र ने 200 में पार्टी बदल कर वापसी की। इस बार उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। जाले में यह भाजपा को पहली जीत थी।
विजय ने राजद के राम निवास प्रसाद को 30,617 वोट से हराया। विजय को 61,897 वोट मिले थे। वहीं राम निवास को 31,280 वोट मिले थे।
2005: राजद को मिली पहली जीत
बिहार में 2005 में दो बार चुनाव हुए थे। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। इन दोनों चुनाव में जाले से राजद के राम निवास को जीत मिली। जाले विधानसभा सीट के इतिहास में यह पहला मौका था, जब एक ही चेहरे को लगातार दो बार जीत मिली। पहले चुनाव में रामनिवास ने 4,698 वोट से भाजपा के विजय मिश्र को हराया। वहीं, दूसरे चुनाव में राम निवास ने मात्र 204 वोट से जीत हासिल की। इस बार भी उनका मुकाबला विजय मिश्र से हुआ। राम निवास को 30,422 और विजय को 30,218 वोट मिले थे।
2010: विजय मिश्र की वापसी
2005 के दोनों चुनाव में हार का सामना करने वाले विजय मिश्र ने 2010 में फिर से जीत दर्ज की। विजय मिश्र को 42,590 वोट मिले थे। वहीं, राम निवास को 25,648 वोट मिले।
2014: उपचुनाव जीतकर ऋषि मिश्र बने विधायक
नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद नीतीश सरकार को समर्थन देने के लिए भाजपा के कुछ विधायकों ने भी पाला बदला। इन विधायकों में विजय मिश्र भी शामिल थे। मिश्र ने नीतीश के समर्थन में पार्टी और विधायकी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उप-चुनाव में उनके बेटे ऋषि मिश्र यहां से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े। वहीं, विजय मिश्र को नीतीश ने विधान परिषद भेज दिया। जाले विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जदयू के ऋषि मिश्र को जीत मिली।
2015: भाजपा से विधायक बने जिबेश कुमार
- 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में ऋषि मिश्र को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के जिबेश कुमार ने जदयू के ऋषि मिश्र को 4,620 वोट से हराया है। उन्हें 62,059 वोट मिलें। वहीं ऋषि मिश्र को 57,439 वोट मिले थे।
- 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जिबेश कुमार ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने इस चुनाव में कांग्रेस के मस्कूर अहमद उस्मान को 21,926 वोट से हराया।
- 2020 में जीत दर्ज कर जिबेश बिहार सरकार में मंत्री बने। 2020 से 2022 तक जिबेश बिहार सरकार में श्रम संसाधन विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री थे। अभी वे नीतीश सरकार में शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री हैं।
सिर्फ दो चेहरे लगातार दो बार जीते
जाले विधानसभा सीट के इतिहास में सिर्फ दो बार ही ऐसे मौके आए हैं, जब कोई उम्मीदावर लगातार दो बार जीत हासिल कर सका। पहला मौका 2005 के दोनों चुनाव में आया था। वहीं, दूसरा मौका 2015 और 2020 के चुनाव में आया। 2005 में फरवरी और अक्तूबर दोनों बार के चुनाव में राम प्रकाश विधायक बने थे। वहीं, 2015 और 2020 में जिबेश कुमार ने लगातार दो बार जीत हासिल की।
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