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Una News: बिना बारिश मक्की की फसल पर संकट के बादल
Wed, 19 Jun 2024 08:12 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 19 Jun 2024 08:12 AM IST
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प्रचंड गर्मी और बिना बारिश से अगेती मक्की की फसल की पत्तियां लगी मुरझाने लगी
ऊना। जिला में लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन पर लगाई मक्की की अगेती फसल पर बिना बारिश अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों की आय का मुख्य साधन मानी जाने वाली यह फसल गर्मी के प्रकोप से झुलसने लगी है। किसान हर दूसरे दिन सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन इससे भी बात नहीं बन रही है। सिंचित इलाकों में तैयार हो रही मक्की की पत्तियां झुलस चुकी हैं। किसान अब बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिला के हरोली, गगरेट, अंब और ऊना के मैदानी इलाकों में किसान गेहूं की फसल काटने के बाद मक्की की अगेती फसल की बिजाई करते हैं। इस फसल को किसान बोनस के तौर पर मानते हैं, क्योंकि इसके बाद आलू लगाने के लिए भी समय बच जाता है और उसके बाद गेहूं की बिजाई भी हो जाती है। कुल मिलाकर किसान मक्की की अगेती फसल को मिलाकर साल में तीन फसलें लेते हैं।
अगेती मक्की को किसानों की आय का एक अच्छा साधन माना जाता है। यही वजह है कि बड़े स्तर पर किसान इस फसल को उगाते हैं। मगर इस बार इस फसल के लिहाज से परिस्थितियां अनुकूल नजर नहीं आ रही। जिला में अधिकतम तापमान लगातार 45 डिग्री के आसपास चल रहा है। दोपहर के समय पढ़ने वाली तेज धूप और उसके साथ चलने वाली गर्म हवाओं ने फसल की स्थिति बेहद खराब हालत में पहुंचा दी है।
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सिंचाई का भी फायदा नहीं, पैदावार घटने का डर
किसान राहुल कुमार, जगदेव सिंह , रविंद्र कुमार, तरसेम लाल और विनोद कुमार ने कहा कि इस समय बारिश का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि फसलों के लिए सिंचाई का पानी पर्याप्त नहीं हो पा रहा। अगर बारिश होती है तो मौसम भी ठंडा होगा और फसलों की पत्तियों को भी पानी की फुहार मिलेगी। जिससे फसल दोबारा खिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो फसल की पैदावार गिरना तय है। इसके साथ ही फसल को उचित तरीके से तैयार करना भी नामुमकिन हो जाएगा।
अधिक खाद का इस्तेमाल करने से बचें किसान
कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने कहा कि निश्चित तौर पर इस समय फसलों के लिहाज से बारिश का होना बहुत जरूरी है। किसानों को फसल बचाने के लिए जहां सिंचाई लगातार करनी पड़ेगी। इसके साथ ही किसान गर्मी के मौसम में तेज दबाव खाद का अधिक इस्तेमाल करने से बचें। उन्होंने कहा कि पहले ही गर्मी की मार से फसली मुरझा रही है। ऐसे में अगर गर्म दवा और खाद का अधिक इस्तेमाल करेंगे, तो यह फसलों के लिए लाभ देने की बजाय और हानिकारक सिद्ध होंगी।
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जानकारी के अनुसार जिला के हरोली, गगरेट, अंब और ऊना के मैदानी इलाकों में किसान गेहूं की फसल काटने के बाद मक्की की अगेती फसल की बिजाई करते हैं। इस फसल को किसान बोनस के तौर पर मानते हैं, क्योंकि इसके बाद आलू लगाने के लिए भी समय बच जाता है और उसके बाद गेहूं की बिजाई भी हो जाती है। कुल मिलाकर किसान मक्की की अगेती फसल को मिलाकर साल में तीन फसलें लेते हैं।
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अगेती मक्की को किसानों की आय का एक अच्छा साधन माना जाता है। यही वजह है कि बड़े स्तर पर किसान इस फसल को उगाते हैं। मगर इस बार इस फसल के लिहाज से परिस्थितियां अनुकूल नजर नहीं आ रही। जिला में अधिकतम तापमान लगातार 45 डिग्री के आसपास चल रहा है। दोपहर के समय पढ़ने वाली तेज धूप और उसके साथ चलने वाली गर्म हवाओं ने फसल की स्थिति बेहद खराब हालत में पहुंचा दी है।
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सिंचाई का भी फायदा नहीं, पैदावार घटने का डर
किसान राहुल कुमार, जगदेव सिंह , रविंद्र कुमार, तरसेम लाल और विनोद कुमार ने कहा कि इस समय बारिश का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि फसलों के लिए सिंचाई का पानी पर्याप्त नहीं हो पा रहा। अगर बारिश होती है तो मौसम भी ठंडा होगा और फसलों की पत्तियों को भी पानी की फुहार मिलेगी। जिससे फसल दोबारा खिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो फसल की पैदावार गिरना तय है। इसके साथ ही फसल को उचित तरीके से तैयार करना भी नामुमकिन हो जाएगा।
अधिक खाद का इस्तेमाल करने से बचें किसान
कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने कहा कि निश्चित तौर पर इस समय फसलों के लिहाज से बारिश का होना बहुत जरूरी है। किसानों को फसल बचाने के लिए जहां सिंचाई लगातार करनी पड़ेगी। इसके साथ ही किसान गर्मी के मौसम में तेज दबाव खाद का अधिक इस्तेमाल करने से बचें। उन्होंने कहा कि पहले ही गर्मी की मार से फसली मुरझा रही है। ऐसे में अगर गर्म दवा और खाद का अधिक इस्तेमाल करेंगे, तो यह फसलों के लिए लाभ देने की बजाय और हानिकारक सिद्ध होंगी।