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सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता : शास्त्री

Fri, 05 Jul 2024 06:06 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 05 Jul 2024 06:06 AM IST
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Wisdom cannot arise without satsang: Shastri
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर चौकी मन्यार में श्रीमद् भागवत कथा सुनते हुए भक्तजन।संवाद
जोल (ऊना)। ग्राम पंचायत चौकी मन्यार के प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर में सात दिवसीय श्री ज्ञान यज्ञ महोत्सव श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। आयोजक संतोष कौशल ने बताया कि प्रथम दिन कथा वाचक आचार्य शिवकुमार शास्त्री द्वारा अपने संबोधन में श्रीमद्भागवत महात्म्य के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता और बिना सौभाग्य के सत्संग सुलभ नहीं हो सकता। श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों का श्रवण करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं। मनुष्य अपने जीवन में सातों दिवस किसी न किसी देवता की पूजा-अर्चना करता है, लेकिन मानव जीवन में आठवां दिवस परिवार के लिए होता है। आचार्य शिव कुमार शास्त्री ने जीवन में भजन और भोजन में अंतर बताते हुए कहा कि भजन में कोई मात्रा नहीं होती। भजन करने से मानव का मन सीधा ही प्रभु से जुड़ जाता है। उसी प्रकार भोजन में मात्रा होती है। मनुष्य को भोजन को भजन एवं प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। प्रथम दिन की कथा के समापन से पूर्व आरती की गई। आरती करने के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।
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