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आने वाले दिनों में गेहूं के दाम गिरने के आसार
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ऊना। गेहूं के दाम आने वाले दिनों में गिर सकते हैं। भारत सरकार ने दूसरे देशों को गेहूं का निर्यात बंद कर दिया है। गेहूं की दूसरे देशों में मांग बढ़ने से इसकी कीमत में इजाफा हुआ। सरकारी बिक्री केंद्रों में एक क्विंटल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2015 रुपये है। व्यापारी इसके लिए 2050 रुपये तक भी कीमत दे रहे हैं।
कीमत में आए उछाल के कारण कई किसानों ने तो अपनी फसल अभी तक नहीं बेची। उनको आस है कि आने वाले कुछ दिनों में गेहूं की कीमत और बढ़ सकती है। निर्यात बंद होने के कारण गेहूं फसल की कीमत घटने के आसार अधिक हैं। रूस और यूक्रेन पूरी दुनिया में गेहूं के सबसे बड़े निर्यातक हैं। इस बार दोनों देशों में छिड़े युद्ध के कारण वहां से निर्यात ठप है। ऐसे में कई देशों को भारत से गेहूं निर्यात किया गया। इससे बाजार में गेहूं की मांग बढ़ी और इसकी कीमत में भी उछाल आया।
व्यापारियों से मिल रही गेहूं की अधिक कीमत के कारण बेहद कम किसानों ने सरकारी बिक्री केंद्रों का रुख किया। वहीं कई किसानों को गेहूं के दाम और बढ़ने की आस है। ऐसे में उन्होंने गेहूं को स्टॉक कर लिया है। अब गेहूं फसल के महंगा होने के आसार बेहद कम हैं। उल्टा इसकी कीमत घट सकती है। कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) ऊना के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि सरकारी केंद्रों में गेहूं के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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किसान अपना पंजीकरण करवाकर सरकारी केंद्रों का रुख कर सकते हैं। जिला के दोनों बिक्री केंद्रों में किसानों की हर सुविधा का ध्यान रखा है। समय पर धनराशि का भुगतान भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी।
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कीमत में आए उछाल के कारण कई किसानों ने तो अपनी फसल अभी तक नहीं बेची। उनको आस है कि आने वाले कुछ दिनों में गेहूं की कीमत और बढ़ सकती है। निर्यात बंद होने के कारण गेहूं फसल की कीमत घटने के आसार अधिक हैं। रूस और यूक्रेन पूरी दुनिया में गेहूं के सबसे बड़े निर्यातक हैं। इस बार दोनों देशों में छिड़े युद्ध के कारण वहां से निर्यात ठप है। ऐसे में कई देशों को भारत से गेहूं निर्यात किया गया। इससे बाजार में गेहूं की मांग बढ़ी और इसकी कीमत में भी उछाल आया।
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व्यापारियों से मिल रही गेहूं की अधिक कीमत के कारण बेहद कम किसानों ने सरकारी बिक्री केंद्रों का रुख किया। वहीं कई किसानों को गेहूं के दाम और बढ़ने की आस है। ऐसे में उन्होंने गेहूं को स्टॉक कर लिया है। अब गेहूं फसल के महंगा होने के आसार बेहद कम हैं। उल्टा इसकी कीमत घट सकती है। कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) ऊना के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि सरकारी केंद्रों में गेहूं के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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किसान अपना पंजीकरण करवाकर सरकारी केंद्रों का रुख कर सकते हैं। जिला के दोनों बिक्री केंद्रों में किसानों की हर सुविधा का ध्यान रखा है। समय पर धनराशि का भुगतान भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी।