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वेद मानवता का शाश्वत मार्गदर्शन और जीवन का प्रकाश : नमित शर्मा
Tue, 26 Aug 2025 06:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 26 Aug 2025 06:03 AM IST
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डीएवी स्कूल अंबोटा में मनाया श्रावणी उपाक्रम पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। डीएवी पब्लिक स्कूल अंबोटा में श्रावणी उपाकर्म पर्व एवं चतुर्वेद शतकम् पारायण यज्ञ का तीसरा दिन आध्यात्मिक ऊर्जाओं और वैदिक अनुष्ठानों की पवित्रता से सरोवर रहा। यज्ञ में सोमवार को यजुर्वेद के अगले 50 मंत्रों की आहुतियां विद्यालय के प्रधानाचार्य नमित शर्मा और शिक्षकों की ओर से समर्पित की गईं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य और एआरओ नमित शर्मा ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी है। वेद कोई मानव-निर्मित ग्रंथ नहीं, बल्कि ईश्वर की ओर से प्रकट शाश्वत ज्ञान है। कहा कि वेदों में जीवन, धर्म, विज्ञान, चिकित्सा, योग, दर्शन, समाज व्यवस्था, आध्यात्म आदि सभी का मूलभूत ज्ञान निहित है। इनसे हमें जीवन जीने की कला, अनुशासन, त्याग और सहयोग का संदेश मिलता है। वेद प्रत्येक मनुष्य को ये शिक्षा देते हैं कि वह स्वयं के उत्थान के साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण में भी योगदान दे। कहा कि श्रावणी पर्व का विशेष महत्व है क्योंकि यह हमें अपने मूल संस्कारों की ओर लौटने और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सत्य, सेवा और सदाचार को अपनाने का संकल्प है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। डीएवी पब्लिक स्कूल अंबोटा में श्रावणी उपाकर्म पर्व एवं चतुर्वेद शतकम् पारायण यज्ञ का तीसरा दिन आध्यात्मिक ऊर्जाओं और वैदिक अनुष्ठानों की पवित्रता से सरोवर रहा। यज्ञ में सोमवार को यजुर्वेद के अगले 50 मंत्रों की आहुतियां विद्यालय के प्रधानाचार्य नमित शर्मा और शिक्षकों की ओर से समर्पित की गईं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य और एआरओ नमित शर्मा ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी है। वेद कोई मानव-निर्मित ग्रंथ नहीं, बल्कि ईश्वर की ओर से प्रकट शाश्वत ज्ञान है। कहा कि वेदों में जीवन, धर्म, विज्ञान, चिकित्सा, योग, दर्शन, समाज व्यवस्था, आध्यात्म आदि सभी का मूलभूत ज्ञान निहित है। इनसे हमें जीवन जीने की कला, अनुशासन, त्याग और सहयोग का संदेश मिलता है। वेद प्रत्येक मनुष्य को ये शिक्षा देते हैं कि वह स्वयं के उत्थान के साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण में भी योगदान दे। कहा कि श्रावणी पर्व का विशेष महत्व है क्योंकि यह हमें अपने मूल संस्कारों की ओर लौटने और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सत्य, सेवा और सदाचार को अपनाने का संकल्प है।
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