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Una News: बस स्टॉप से दूर, झाड़ियों में वर्षाशालिका सुना रही जनता के पैसे की बर्बादी की कहानी

Fri, 11 Sep 2026 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 11 Sep 2026 11:55 PM IST
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Tucked away in the bushes, far from the bus stop, the bus shelter tells a tale of wasted public money.
ऊना। रामपुर में यात्रियों को बारिश और धूप से बचाने के लिए बनाई गई वर्षाशालिका अब सुविधा से ज्यादा जनता के पैसे की बर्बादी का उदाहरण है। रामपुर में बागवानी विभाग के पास बनाई गई वर्षाशालिका की हालत यह है कि न तो यहां बसें खड़ी होती हैं और न ही यात्री बैठते हैं। बदहाली का मंजर इस कद्र है कि चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। ऐसे में यात्रियों की सुविधा के लिए बनाई गई वर्षाशालिका सवालों के घेरे में है।
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वर्षाशालिका से करीब 100 मीटर दूर बस स्टाॅप है जबकि इस सड़क पर चलने वाली बसें वर्षाशालिका के सामने रुकती ही नहीं। ऐसे में बारिश या धूप में परेशान यात्री सड़क किनारे ही खड़े रहने को मजबूर हैं।
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वर्षाशालिका बनी जरूर है, लेकिन यात्रियों की जरूरत से उसका जुड़ाव नजर नहीं आता। वर्षाशालिका सड़क से नीचे बनाई गई है। सड़क से नीचे उतरकर वहां पहुंचना यात्रियों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा करता है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति और असुविधाजनक हो सकती है।
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जिस सुविधा को यात्रियों के लिए राहत का साधन बनना था, वही अब उपयोग से दूर खड़ी नजर आ रही है। झाड़ियों के बीच सुविधा, सफाई का भी अभाव वर्षाशालिका के आसपास झाड़ियां इतनी बढ़ गई हैं कि परिसर उपेक्षित दिखाई देता है।
नियमित साफ-सफाई और रखरखाव पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में बारिश से बचने के लिए बनाई गई जगह खुद ही बदहाली के घेरे में है।
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वर्षाशालिका के निर्माण पर खर्च किया गया पैसा सरकारी खजाने से आया है, यानी यह जनता का पैसा है। ऐसा लगता है कि निर्माण के लिए जगह का चयन, यात्रियों की आवाजाही और बसों के ठहराव को लेकर बिना कोई आकलन किए बिना विभाग ने आनन फानन में इसे बना दिया। जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा।

-राजेश शर्मा, निवासी कुठारकलां।
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सिर्फ ढांचा खड़ा कर देने से यात्री सुविधा नहीं बनती। सुविधा वही है जो जरूरत की जगह पर हो और जिसका वास्तविक लाभ जनता को मिले। रामपुर की यह वर्षाशालिका अब विभाग की कार्यप्रणाली के साथ-साथ सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े कर रही है।
-साहिल शर्मा, निवासी झोड़ोवाल
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