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Una News: इस सीजन में नहीं होगा खैर कटान, स्टाफ के अभाव में विभाग ने पीछे खींचे हाथ
Tue, 28 Oct 2025 06:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 28 Oct 2025 06:27 AM IST
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ऊना। खैर कटान की 10 वर्षीय पाटन प्रक्रिया ऊना जिले में इस बार स्टाफ की कमी के चलते नहीं हो पाएगी। इस संदर्भ में वन विभाग ने सरकार को पत्र लिखकर स्टाफ की वस्तु स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। जिले में फॉरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर सहित 36 पद खाली पड़े हैं। वनों की रक्षा करने के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है तो ऐसे में बिना स्टाफ के जिले में अवैध कटान कैसे रुकेगा। इसके ऊपर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
वन मंडल अधिकारी ने पत्र के माध्यम से अवगत करवाया है कि इस सीजन में खैर का कटान भी नहीं हो पाएगा। इस प्रक्रिया से विभाग ने अपने हाथ स्टाफ की अभाव में पीछे खींच लिए हैं। अब देखना यह बाकी है कि वन मंडल अधिकारी के सरकार और विभाग के आला अधिकारियों को लिखे के पत्र के आगे क्या रुख सरकार अपनाती है।
बहरहाल वर्तमान में इस वित्तीय वर्ष में इस 10 वर्षीय पाटन प्रक्रिया के तहत खैर का कटान नहीं होगा। इतना ही नहीं बल्कि दूसरी ओर आए दिन जिलेभर के कोने-कोने से पेड़ों के अवैध कटान के मामले उजागर हो रहे हैं। विभाग के हाथ में कुछ मामलों की सफलता भी लग रही है लेकिन रात के अंधेरे में जो अवैध कटान करके कई गाड़ियां सीमावर्ती राज्यों को भेजी जा रही है, उनकी तो वर्तमान में कोई गणना ही नहीं है। पहले भी कई बार अवैध कटान को लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं। विभाग स्टाफ के अभाव के चलते विवश होकर रह गया है। एक-एक फॉरेस्ट गार्ड के अधीन कई बीट का कार्यभार है जिसके चलते फॉरेस्ट गार्ड न तो अपनी बीट में कार्य सही ढंग से कर पा रहे हैं और न ही अन्य बीट का। गुप्त सूचना के माध्यम से जो हत्थे चढ़ते हैं, उनके ऊपर कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
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उधर वन मंडल अधिकारी सुशील राणा का कहना है कि इस सीजन में 10 वर्षीय पाटन प्रक्रिया के तहत खैर कटान नहीं होगा। स्टाफ न होने की सूरत में यह समस्या पेश आई है। सरकार और विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि अगर जिला के किसी भी क्षेत्र में अवैध तरीके से कटान हो रहा है तो इसकी सूचना विभाग को दें।
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वन मंडल अधिकारी ने पत्र के माध्यम से अवगत करवाया है कि इस सीजन में खैर का कटान भी नहीं हो पाएगा। इस प्रक्रिया से विभाग ने अपने हाथ स्टाफ की अभाव में पीछे खींच लिए हैं। अब देखना यह बाकी है कि वन मंडल अधिकारी के सरकार और विभाग के आला अधिकारियों को लिखे के पत्र के आगे क्या रुख सरकार अपनाती है।
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बहरहाल वर्तमान में इस वित्तीय वर्ष में इस 10 वर्षीय पाटन प्रक्रिया के तहत खैर का कटान नहीं होगा। इतना ही नहीं बल्कि दूसरी ओर आए दिन जिलेभर के कोने-कोने से पेड़ों के अवैध कटान के मामले उजागर हो रहे हैं। विभाग के हाथ में कुछ मामलों की सफलता भी लग रही है लेकिन रात के अंधेरे में जो अवैध कटान करके कई गाड़ियां सीमावर्ती राज्यों को भेजी जा रही है, उनकी तो वर्तमान में कोई गणना ही नहीं है। पहले भी कई बार अवैध कटान को लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं। विभाग स्टाफ के अभाव के चलते विवश होकर रह गया है। एक-एक फॉरेस्ट गार्ड के अधीन कई बीट का कार्यभार है जिसके चलते फॉरेस्ट गार्ड न तो अपनी बीट में कार्य सही ढंग से कर पा रहे हैं और न ही अन्य बीट का। गुप्त सूचना के माध्यम से जो हत्थे चढ़ते हैं, उनके ऊपर कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
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उधर वन मंडल अधिकारी सुशील राणा का कहना है कि इस सीजन में 10 वर्षीय पाटन प्रक्रिया के तहत खैर कटान नहीं होगा। स्टाफ न होने की सूरत में यह समस्या पेश आई है। सरकार और विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि अगर जिला के किसी भी क्षेत्र में अवैध तरीके से कटान हो रहा है तो इसकी सूचना विभाग को दें।