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Una News: मिट्टी के बर्तनों का बदला स्वरूप, रसोई की शान के साथ सेहत का भी ध्यान
Sun, 28 Jun 2026 12:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:23 AM IST
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मुबारिक बाजार में बिक्री के लिए रखे मिट्टी के बर्तन। संवाद
मुबारिकपुर (ऊना)। एक समय था, जब मिट्टी के घड़े, मटके और दीपक हर घर की पहचान हुआ करते थे। गर्मियों में मटके का ठंडा पानी और मिट्टी के बर्तनों में बना भोजन लोगों की दिनचर्या का हिस्सा था। बदलते समय और आधुनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भले ही इनका उपयोग कुछ कम हुआ हो लेकिन मिट्टी के बर्तनों ने भी समय के साथ खुद को नए रूप में ढाल लिया है। आज ये बर्तन केवल परंपरा का प्रतीक नहीं बल्कि आधुनिक रसोई और डाइनिंग टेबल की शोभा भी बढ़ा रहे हैं।
बाजार में अब मिट्टी से बने आकर्षक पानी के डिस्पेंसर, स्टाइलिश मग, कप, केटल और हांडियां उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग स्वास्थ्य और सजावट दोनों दृष्टि से पसंद कर रहे हैं। स्थानीय बाजारों में मिट्टी के डिस्पेंसर 300 से 500 रुपये, मग 50 से 80 रुपये, कप 30 से 70 रुपये और केटल 200 से 400 रुपये तक में उपलब्ध हैं। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
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विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का मानना है कि मिट्टी के बर्तनों में पानी और भोजन प्राकृतिक गुणों को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग एक बार फिर इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। मिट्टी के बर्तन न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि इनमें तैयार भोजन का स्वाद भी अलग और अधिक सोंधा होता है।
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गृहिणी पूजा शर्मा बताती हैं कि पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों में एक अलग ही सुकून है। उनके अनुसार गांव के बुजुर्ग हमेशा कहते आए हैं कि मटके का पानी शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है और प्यास को बेहतर तरीके से बुझाता है जबकि फ्रिज के पानी में वह बात नहीं होती।
मनोज शर्मा का कहना है कि मिट्टी के आधुनिक बर्तन सेहतमंद होने के साथ-साथ बेहद स्टाइलिश भी हैं। इन्हें किचन या डाइनिंग टेबल पर रखने से घर की सुंदरता बढ़ती है और पारंपरिक संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है।
रायपुर की सुधा पराशर बताती हैं कि मिट्टी की हांडी में बनी दाल और सब्जियों का स्वाद सामान्य बर्तनों में बने भोजन से काफी अलग होता है। उनके अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पकाने से भोजन के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और उसमें प्राकृतिक सोंधापन भी बना रहता है।
एडवोकेट राजकुमारी शर्मा का कहना है कि मिट्टी के बर्तनों में बना भोजन पाचन के लिए बेहतर माना जाता है। इससे पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं और खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है। हालांकि इनमें खाना पकाने में थोड़ा अधिक समय लगता है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ के सामने यह समय मायने नहीं रखता।
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बाजार में अब मिट्टी से बने आकर्षक पानी के डिस्पेंसर, स्टाइलिश मग, कप, केटल और हांडियां उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग स्वास्थ्य और सजावट दोनों दृष्टि से पसंद कर रहे हैं। स्थानीय बाजारों में मिट्टी के डिस्पेंसर 300 से 500 रुपये, मग 50 से 80 रुपये, कप 30 से 70 रुपये और केटल 200 से 400 रुपये तक में उपलब्ध हैं। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
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विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का मानना है कि मिट्टी के बर्तनों में पानी और भोजन प्राकृतिक गुणों को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग एक बार फिर इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। मिट्टी के बर्तन न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि इनमें तैयार भोजन का स्वाद भी अलग और अधिक सोंधा होता है।
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गृहिणी पूजा शर्मा बताती हैं कि पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों में एक अलग ही सुकून है। उनके अनुसार गांव के बुजुर्ग हमेशा कहते आए हैं कि मटके का पानी शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है और प्यास को बेहतर तरीके से बुझाता है जबकि फ्रिज के पानी में वह बात नहीं होती।
मनोज शर्मा का कहना है कि मिट्टी के आधुनिक बर्तन सेहतमंद होने के साथ-साथ बेहद स्टाइलिश भी हैं। इन्हें किचन या डाइनिंग टेबल पर रखने से घर की सुंदरता बढ़ती है और पारंपरिक संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है।
रायपुर की सुधा पराशर बताती हैं कि मिट्टी की हांडी में बनी दाल और सब्जियों का स्वाद सामान्य बर्तनों में बने भोजन से काफी अलग होता है। उनके अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पकाने से भोजन के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और उसमें प्राकृतिक सोंधापन भी बना रहता है।
एडवोकेट राजकुमारी शर्मा का कहना है कि मिट्टी के बर्तनों में बना भोजन पाचन के लिए बेहतर माना जाता है। इससे पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं और खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है। हालांकि इनमें खाना पकाने में थोड़ा अधिक समय लगता है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ के सामने यह समय मायने नहीं रखता।