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Una News: छह फीसदी सालाना ब्याज समेत चुकाना होगा टेंट हाउस का ऋण
Thu, 01 Oct 2026 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 01 Oct 2026 11:57 PM IST
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दुलैहड़ (ऊना)। टेंट हाउस का कारोबार शुरू करने के लिए बैंक से 7.50 लाख रुपये का ऋण लेने के बाद किस्तें जमा न करवाने के मामले में अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। सिविल जज कोर्ट नंबर-1 ऊना की न्यायाधीश इशा अग्रवाल की अदालत ने ऋण लेने वाले व्यक्ति को 5,27,936.88 रुपये की बकाया राशि छह फीसदी सालाना ब्याज के साथ चुकाने के आदेश दिए हैं। ब्याज मुकदमा दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक देना होगा।
केनरा बैंक की ओर से दायर वसूली के मुकदमे के अनुसार टेंट हाउस का कारोबार चलाने के लिए 14 फरवरी 2022 को 7.50 लाख रुपये के टर्म लोन के लिए आवेदन किया गया था। बैंक ने 21 फरवरी 2022 को ऋण स्वीकृत करते हुए इसे 84 मासिक किस्तों में चुकाने की व्यवस्था की थी। ऋण पर 10 फीसदी सालाना ब्याज निर्धारित था। इसके लिए ऋण लेने वाले ने बैंक के पक्ष में प्रोनोट, हाइपोथिकेशन डीड, एग्रीमेंट सहित अन्य दस्तावेज निष्पादित किए थे।
बैंक के अनुसार ऋण की किस्तों का नियमित भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने 26 जून 2024 को बकाया राशि जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किया। तीन जुलाई को कानूनी नोटिस और 23 जुलाई को खाता एनपीए होने की सूचना देते हुए सात दिन में बकाया राशि चुकाने को कहा गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 5,27,936.88 रुपये की बकाया राशि पर मुकदमा दायर होने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक छह फीसदी सालाना ब्याज देय होगा। मामले में कोई लागत नहीं लगाई गई है।
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केनरा बैंक की ओर से दायर वसूली के मुकदमे के अनुसार टेंट हाउस का कारोबार चलाने के लिए 14 फरवरी 2022 को 7.50 लाख रुपये के टर्म लोन के लिए आवेदन किया गया था। बैंक ने 21 फरवरी 2022 को ऋण स्वीकृत करते हुए इसे 84 मासिक किस्तों में चुकाने की व्यवस्था की थी। ऋण पर 10 फीसदी सालाना ब्याज निर्धारित था। इसके लिए ऋण लेने वाले ने बैंक के पक्ष में प्रोनोट, हाइपोथिकेशन डीड, एग्रीमेंट सहित अन्य दस्तावेज निष्पादित किए थे।
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बैंक के अनुसार ऋण की किस्तों का नियमित भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने 26 जून 2024 को बकाया राशि जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किया। तीन जुलाई को कानूनी नोटिस और 23 जुलाई को खाता एनपीए होने की सूचना देते हुए सात दिन में बकाया राशि चुकाने को कहा गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 5,27,936.88 रुपये की बकाया राशि पर मुकदमा दायर होने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक छह फीसदी सालाना ब्याज देय होगा। मामले में कोई लागत नहीं लगाई गई है।
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