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Una News: ईसपुर आयुर्वेदिक अस्पताल में व्यवस्थाओं की स्थिति चिंताजनक
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अभियान
सूरत ए हाल अस्पताल भाग- 6
कुछ साल पहले इस अस्पताल ने दिन रात मिलती थी स्वास्थ्य सेवाएं
वर्तमान में रात के समय अस्पताल में नहीं है रात की सेवाएं और न एंबुलेंस
अब केवल दिन में पांच बजे तक मिलता है इलाज
रात के समय लोगों को भटकना पड़ रहा
विकास चौधरी
ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र में ऊना-गगरेट सड़क मार्ग के किनारे स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल ईसपुर कभी क्षेत्रवासियों के लिए बड़ा सहारा हुआ करता था। यहां दिन-रात इलाज और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन वर्तमान में यह स्वास्थ्य संस्थान गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। अस्पताल को अब तक नया भवन नहीं मिल पाया है और स्टाफ की कमी भी बनी हुई है। रात के समय अस्पताल के गेट पर ताले लटके रहते हैं, जबकि दिन में मरीजों की जांच और इलाज पंचकर्म सुविधा के लिए बनाए गए भवन में किया जा रहा है।
इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों को करीब 14 किलोमीटर दूर क्षेत्रीय अस्पताल ऊना जाना पड़ रहा है। विकल्प के तौर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदसाली जरूर है, लेकिन मुख्य मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर दूर होने के कारण लोग ऊना जाना ही अधिक उपयुक्त समझते हैं।
गौरतलब है कि ईसपुर स्थित यह अस्पताल जिले के सबसे पुराने आयुर्वेदिक संस्थानों में शामिल है। अस्पताल का पुराना भवन जर्जर अवस्था में होने के कारण डेढ़ वर्ष पहले गिरा दिया गया था। तब से 10 बेड का यह अस्पताल पंचकर्म और क्षार सूत्र थेरेपी के लिए बने कमरों में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है। सीमित स्थान के कारण अस्पताल के संचालन में लगातार कठिनाइयां आ रही हैं।
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स्टाफ की भारी कमी
अस्पताल में दो स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही स्टाफ नर्स कार्यरत है। चार एएनएम के स्वीकृत पदों में से तीन ही तैनात हैं। थेरेपिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण पंचकर्म सेवाएं बंद पड़ी हैं, जबकि इसके लिए आवश्यक सभी उपकरण अस्पताल में मौजूद हैं। पहले प्रतिदिन पांच से 10 मरीज पंचकर्म उपचार करवाते थे, लेकिन सुविधा बंद होने से अब मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
करीब 15 गांवों के लोग उपचार के लिए ईसपुर अस्पताल पर निर्भर हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। अस्पताल में तैनात तीनों चिकित्सकों को भी सीमित जगह के कारण कार्य करने में कठिनाई हो रही है। इसके अतिरिक्त दवाइयों की आपूर्ति भी बेहद कम है, जिससे मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
कोट
ईसपुर अस्पताल में स्टाफ और भवन की कमी है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। स्टाफ की तैनाती विभागीय स्तर पर होती है। अन्य कमियों को भी बजट उपलब्ध होते ही दूर किया जाएगा। -डॉ. किरण शर्मा, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, ऊना
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सूरत ए हाल अस्पताल भाग- 6
कुछ साल पहले इस अस्पताल ने दिन रात मिलती थी स्वास्थ्य सेवाएं
वर्तमान में रात के समय अस्पताल में नहीं है रात की सेवाएं और न एंबुलेंस
अब केवल दिन में पांच बजे तक मिलता है इलाज
रात के समय लोगों को भटकना पड़ रहा
विकास चौधरी
ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र में ऊना-गगरेट सड़क मार्ग के किनारे स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल ईसपुर कभी क्षेत्रवासियों के लिए बड़ा सहारा हुआ करता था। यहां दिन-रात इलाज और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन वर्तमान में यह स्वास्थ्य संस्थान गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। अस्पताल को अब तक नया भवन नहीं मिल पाया है और स्टाफ की कमी भी बनी हुई है। रात के समय अस्पताल के गेट पर ताले लटके रहते हैं, जबकि दिन में मरीजों की जांच और इलाज पंचकर्म सुविधा के लिए बनाए गए भवन में किया जा रहा है।
इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों को करीब 14 किलोमीटर दूर क्षेत्रीय अस्पताल ऊना जाना पड़ रहा है। विकल्प के तौर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदसाली जरूर है, लेकिन मुख्य मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर दूर होने के कारण लोग ऊना जाना ही अधिक उपयुक्त समझते हैं।
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गौरतलब है कि ईसपुर स्थित यह अस्पताल जिले के सबसे पुराने आयुर्वेदिक संस्थानों में शामिल है। अस्पताल का पुराना भवन जर्जर अवस्था में होने के कारण डेढ़ वर्ष पहले गिरा दिया गया था। तब से 10 बेड का यह अस्पताल पंचकर्म और क्षार सूत्र थेरेपी के लिए बने कमरों में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है। सीमित स्थान के कारण अस्पताल के संचालन में लगातार कठिनाइयां आ रही हैं।
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स्टाफ की भारी कमी
अस्पताल में दो स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही स्टाफ नर्स कार्यरत है। चार एएनएम के स्वीकृत पदों में से तीन ही तैनात हैं। थेरेपिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण पंचकर्म सेवाएं बंद पड़ी हैं, जबकि इसके लिए आवश्यक सभी उपकरण अस्पताल में मौजूद हैं। पहले प्रतिदिन पांच से 10 मरीज पंचकर्म उपचार करवाते थे, लेकिन सुविधा बंद होने से अब मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
करीब 15 गांवों के लोग उपचार के लिए ईसपुर अस्पताल पर निर्भर हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। अस्पताल में तैनात तीनों चिकित्सकों को भी सीमित जगह के कारण कार्य करने में कठिनाई हो रही है। इसके अतिरिक्त दवाइयों की आपूर्ति भी बेहद कम है, जिससे मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
कोट
ईसपुर अस्पताल में स्टाफ और भवन की कमी है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। स्टाफ की तैनाती विभागीय स्तर पर होती है। अन्य कमियों को भी बजट उपलब्ध होते ही दूर किया जाएगा। -डॉ. किरण शर्मा, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, ऊना