{"_id":"68667de1ea9541378d0aa15d","slug":"the-order-to-teachers-to-come-to-school-in-the-midst-of-disaster-is-unfair-una-news-c-93-1-una1002-158100-2025-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: आपदा के बीच शिक्षकों को स्कूल आने का आदेश अनुचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: आपदा के बीच शिक्षकों को स्कूल आने का आदेश अनुचित
विज्ञापन
प्रवक्ता संघ ने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला ऊना के अध्यक्ष शशि सैणी और महासचिव संजीव कुमार ने आपदा के बीच शिक्षकों को स्कूल आने के निर्णय को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में मूसलधार बारिश और भूस्खलन से अनेक स्थानों पर सड़कें बंद हैं। पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और नदियों में उफान के चलते कई क्षेत्रों में खतरे की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से छात्रों को तो अवकाश देने का निर्णय लिया है, लेकिन शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को विद्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने इस निर्णय को असंवेदनशील बताया। शशि सैणी ने कहा कि ऐसे निर्णय से यह संदेश जाता है कि मानो शिक्षकों की जान की कीमत नहीं है। पदाधिकारियों ने कहा कि जब सरकार ने आपदा की गंभीरता को समझते हुए छात्रों को छुट्टी दी है तो शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को इससे अलग रखना न्यायसंगत नहीं है। प्रवक्ता संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तर्कसंगत निर्णय ले।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला ऊना के अध्यक्ष शशि सैणी और महासचिव संजीव कुमार ने आपदा के बीच शिक्षकों को स्कूल आने के निर्णय को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में मूसलधार बारिश और भूस्खलन से अनेक स्थानों पर सड़कें बंद हैं। पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और नदियों में उफान के चलते कई क्षेत्रों में खतरे की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से छात्रों को तो अवकाश देने का निर्णय लिया है, लेकिन शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को विद्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने इस निर्णय को असंवेदनशील बताया। शशि सैणी ने कहा कि ऐसे निर्णय से यह संदेश जाता है कि मानो शिक्षकों की जान की कीमत नहीं है। पदाधिकारियों ने कहा कि जब सरकार ने आपदा की गंभीरता को समझते हुए छात्रों को छुट्टी दी है तो शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को इससे अलग रखना न्यायसंगत नहीं है। प्रवक्ता संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तर्कसंगत निर्णय ले।