{"_id":"69bd39b260b1533d1a0295ee","slug":"the-districts-rainbow-trout-fish-eggs-have-increased-demand-in-uttarakhand-una-news-c-90-1-mnd1001-189820-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: जिले की रेनबो ट्राउट मछली के अंडे की उत्तराखंड में बढ़ी मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: जिले की रेनबो ट्राउट मछली के अंडे की उत्तराखंड में बढ़ी मांग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जोगिंद्रनगर से लाखों आइड ओवा का होता है निर्यात
सुरेंद्र शर्मा
मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रेनबो ट्राउट मछली के आइड ओवा (आंख दिखाई देने वाले अंडे) की मांग उत्तराखंड और लेह-लद्दाख तक पहुंच गई है। जोगिंद्रनगर के शानन स्थित हैचरी से हर साल लगभग चार लाख आइड ओवा का निर्यात किया जा रहा है। हालांकि, पर्याप्त स्टॉक न होने के कारण मांग पूरी नहीं हो पा रही है। मंडी जिला अब आइड ओवा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। इससे न केवल प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूती मिल रही है, बल्कि अन्य पहाड़ी राज्यों में रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
प्रगतिशील किसान राजीव जसवाल हर साल अपनी हैचरी में 5–6 लाख ट्राउट मछलियां तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि आइड ओवा, ट्राउट मछली के अंडों का वह परिपक्व चरण है, जिसमें भ्रूण की आंखें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इस स्थिति में अंडे मजबूत होते हैं और इन्हें सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। राजीव जसवाल के अनुसार बड़ी मछलियों का स्टॉक लगभग एक हजार है। पिछले 26 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े उन्होंने बताया कि एक आइड ओवा की कीमत डेढ़ से दो रुपये है। जल्द ही जोगिंद्रनगर में अतिरिक्त हैचरी तैयार की जाएगी, जिससे आइड ओवा की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
ट्राउट मछली की प्रजनन प्रक्रिया
अक्तूबर महीने में नर और मादा मछलियों को अलग कर दिया जाता है। मादा मछली का पेट फूलता है और रंग बदलता है, जिससे पता चलता है कि वह अंडे देने के लिए तैयार है। तैयार मादा मछलियों को हैचरी में ले जाया जाता है और उतनी ही संख्या में नर मछलियों को अलग टैंक में रखा जाता है। मादा मछली के पेट को हल्के हाथ से दबाकर अंडे निकाले जाते हैं। नर मछली से मिल्ट (शुक्राणु) लिया जाता है। अंडों में नर का मिल्ट मिलाया जाता है और हल्के से हिलाया जाता है। 4–5 मिनट में निषेचन हो जाता है। इसके बाद अंडों को पानी से धोया जाता है, ताकि उनकी चिपचिपाहट दूर हो। निषेचित अंडों को जालीदार ट्रे में पानी के अंदर रखा जाता है। 25–30 दिन में अंडों से फ्राई (बच्चे) निकल आते हैं, जिसे आइड ओवा कहते हैं। यह आइड ओवा सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुरेंद्र शर्मा
मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रेनबो ट्राउट मछली के आइड ओवा (आंख दिखाई देने वाले अंडे) की मांग उत्तराखंड और लेह-लद्दाख तक पहुंच गई है। जोगिंद्रनगर के शानन स्थित हैचरी से हर साल लगभग चार लाख आइड ओवा का निर्यात किया जा रहा है। हालांकि, पर्याप्त स्टॉक न होने के कारण मांग पूरी नहीं हो पा रही है। मंडी जिला अब आइड ओवा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। इससे न केवल प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूती मिल रही है, बल्कि अन्य पहाड़ी राज्यों में रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
प्रगतिशील किसान राजीव जसवाल हर साल अपनी हैचरी में 5–6 लाख ट्राउट मछलियां तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि आइड ओवा, ट्राउट मछली के अंडों का वह परिपक्व चरण है, जिसमें भ्रूण की आंखें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इस स्थिति में अंडे मजबूत होते हैं और इन्हें सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। राजीव जसवाल के अनुसार बड़ी मछलियों का स्टॉक लगभग एक हजार है। पिछले 26 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े उन्होंने बताया कि एक आइड ओवा की कीमत डेढ़ से दो रुपये है। जल्द ही जोगिंद्रनगर में अतिरिक्त हैचरी तैयार की जाएगी, जिससे आइड ओवा की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
विज्ञापन
ट्राउट मछली की प्रजनन प्रक्रिया
अक्तूबर महीने में नर और मादा मछलियों को अलग कर दिया जाता है। मादा मछली का पेट फूलता है और रंग बदलता है, जिससे पता चलता है कि वह अंडे देने के लिए तैयार है। तैयार मादा मछलियों को हैचरी में ले जाया जाता है और उतनी ही संख्या में नर मछलियों को अलग टैंक में रखा जाता है। मादा मछली के पेट को हल्के हाथ से दबाकर अंडे निकाले जाते हैं। नर मछली से मिल्ट (शुक्राणु) लिया जाता है। अंडों में नर का मिल्ट मिलाया जाता है और हल्के से हिलाया जाता है। 4–5 मिनट में निषेचन हो जाता है। इसके बाद अंडों को पानी से धोया जाता है, ताकि उनकी चिपचिपाहट दूर हो। निषेचित अंडों को जालीदार ट्रे में पानी के अंदर रखा जाता है। 25–30 दिन में अंडों से फ्राई (बच्चे) निकल आते हैं, जिसे आइड ओवा कहते हैं। यह आइड ओवा सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है।
विज्ञापन