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Una News: टीबी रोग से मौत का ग्राफ गिरा, 14 प्रतिशत से गिरकर पहुंचा सात प्रतिशत
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जनसहभागिता और जागरूकता के सार्थक परिणाम आए सामने
जिले में टीबी संक्रमण की जांच के लिए 13 जांच केंद्र किए स्थापित
एनएएटी टेस्ट की सुविधा से टीबी रोगियों का जल्द चल रहा पता
जसवीर ठाकुर
ऊना। जिला में टीबी रोग से मरने वालों की संख्या का ग्राफ गिरा है। इस बात का खुलासा विश्व टीबी दिवस की रिपोर्ट में जारी किए गए आंकड़ों से हुआ है। इसमें जहां पिछले वर्ष ऊना जिले में टीबी से मौत की मरीजों की संख्या 14 प्रतिशत थी, वह इस वित्तीय वर्ष 2024-25 में सात प्रतिशत रह गई है। सीएमओ डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि जागरूकता के साथ ही जन सहभागिता से यह परिणाम आया है। वर्तमान में जिला ऊना में 902 लोग टीबी से पीड़ित हैं। इनको दवा पर रखा गया है। 15 साल तक के बच्चे भी इसकी चपेट में आए हैं। जिला में टीबी संक्रमण की जांच के लिए 13 जांच केंद्र स्थापित किए गए हैं और विशेष तौर पर एनएएटी की सुविधा मुहैया होने की सूरत में टीबी रोगियों का जल्द पता चल रहा है और उन्हें समय रहते दवाई शुरू की जाने की सूरत में टीबी को मात दे रहे हैं और स्वस्थ हो रहे हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल ठाकुर ने बताया कि जिला में वर्तमान में 24 सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी टीबी रोग से पीड़ित मरीजों को गोद लिया है। इसमें डेरा बाबा रुद्रानंद समिति, बाल बाबा समिति, पीर निगाह समिति, औद्योगिक क्षेत्रों में मैहतपुर-टाहलीवाल सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने टीबी से पीड़ित मरीजों को गोद लिया है। दूसरी ओर जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी टीबी जांच की सुविधा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपलों का संग्रहण करने के बाद नमूनों की जांच रिपोर्ट प्रेषित की जाती है ताकि समय रहते टीबी के संक्रमण का पता चल सके और मरीज को ट्रीटमेंट के हिसाब से दवाई दी जा सके। आशा वर्कर की भूमिका भी मरीजों को न्यूट्रीशन पहुंचाने में अहम रही है। टीबी कार्यक्रम के जिला समन्वयक गुलशन कुमार ने बताया कि विशेष बात यह भी है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद जिला ऊना में 100 दिन कार्यक्रम के तहत 7 दिसंबर 2024 को शुरू की गई। सांसद अनुराग ठाकुर के मार्गदर्शन में मुहिम के भी सार्थक परिणाम देखने को मिले हैं। इसमें 17 मार्च 2025 तक जहां 76234 लोगों की मैपिंग का लक्ष्य रखा गया था। उनमें से 78,255 लोगों की स्क्रीनिंग हुई है और 7987 लोगों का एनएएटी टेस्ट किया गया है। इनमें से 4242 लोगों के एक्स-रे किए और कुल मिलाकर 75 लोग टीबी से संक्रमित होने का पता चला है और उन्हें दवाई पर रखा गया है। इस वित्त वर्ष टीबी से 59 लोगों की मौत हुई है। जबकि गत वर्षों के मुकाबले मौत का ग्राफ कम रहा है और लोग समय रहते टीबी संक्रमण का पता चलने की सूरत में टीबी को मात देकर जिंदगी की जंग जीते हैं।
जिले में 109 पंचायतें हुईं टीबी मुक्त
विश्व टीबी दिवस के उपलक्ष्य पर जिले में 109 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई हैं। सोमवार को इस संदर्भ में उपायुक्त ऊना जतिन लाल की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें 41 पंचायतों को सिल्वर पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। तीन साल तक टीबी से पीड़ित लोगों की देखभाल करने और उनके सार्थक परिणाम आने के बाद सिल्वर पंचायत में से ही गोल्डन पंचायत के लिए पुरस्कार प्राप्त करने को नाम का चयन होगा।
बॉक्स
राजनीतिक दलों, प्रशासन और पुलिस ने मरीजों को गोद लेने से बनाई दूरी
जहां एक ओर धार्मिक और सामाजिक संगठन सहित औद्योगिक घराने टीबी मरीजों को गोद में लेने से लेकर उनके खानपान समेत हर तरह की सुविधा मुहैया करवाने में अग्रणी रहे हैं वहीं ऊना जिला प्रशासन व पुलिस से लेकर राजनीति दलों के नेताओं ने दूरियां बनाए रखी हैं।
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जिले में टीबी संक्रमण की जांच के लिए 13 जांच केंद्र किए स्थापित
एनएएटी टेस्ट की सुविधा से टीबी रोगियों का जल्द चल रहा पता
जसवीर ठाकुर
ऊना। जिला में टीबी रोग से मरने वालों की संख्या का ग्राफ गिरा है। इस बात का खुलासा विश्व टीबी दिवस की रिपोर्ट में जारी किए गए आंकड़ों से हुआ है। इसमें जहां पिछले वर्ष ऊना जिले में टीबी से मौत की मरीजों की संख्या 14 प्रतिशत थी, वह इस वित्तीय वर्ष 2024-25 में सात प्रतिशत रह गई है। सीएमओ डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि जागरूकता के साथ ही जन सहभागिता से यह परिणाम आया है। वर्तमान में जिला ऊना में 902 लोग टीबी से पीड़ित हैं। इनको दवा पर रखा गया है। 15 साल तक के बच्चे भी इसकी चपेट में आए हैं। जिला में टीबी संक्रमण की जांच के लिए 13 जांच केंद्र स्थापित किए गए हैं और विशेष तौर पर एनएएटी की सुविधा मुहैया होने की सूरत में टीबी रोगियों का जल्द पता चल रहा है और उन्हें समय रहते दवाई शुरू की जाने की सूरत में टीबी को मात दे रहे हैं और स्वस्थ हो रहे हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल ठाकुर ने बताया कि जिला में वर्तमान में 24 सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी टीबी रोग से पीड़ित मरीजों को गोद लिया है। इसमें डेरा बाबा रुद्रानंद समिति, बाल बाबा समिति, पीर निगाह समिति, औद्योगिक क्षेत्रों में मैहतपुर-टाहलीवाल सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने टीबी से पीड़ित मरीजों को गोद लिया है। दूसरी ओर जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी टीबी जांच की सुविधा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपलों का संग्रहण करने के बाद नमूनों की जांच रिपोर्ट प्रेषित की जाती है ताकि समय रहते टीबी के संक्रमण का पता चल सके और मरीज को ट्रीटमेंट के हिसाब से दवाई दी जा सके। आशा वर्कर की भूमिका भी मरीजों को न्यूट्रीशन पहुंचाने में अहम रही है। टीबी कार्यक्रम के जिला समन्वयक गुलशन कुमार ने बताया कि विशेष बात यह भी है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद जिला ऊना में 100 दिन कार्यक्रम के तहत 7 दिसंबर 2024 को शुरू की गई। सांसद अनुराग ठाकुर के मार्गदर्शन में मुहिम के भी सार्थक परिणाम देखने को मिले हैं। इसमें 17 मार्च 2025 तक जहां 76234 लोगों की मैपिंग का लक्ष्य रखा गया था। उनमें से 78,255 लोगों की स्क्रीनिंग हुई है और 7987 लोगों का एनएएटी टेस्ट किया गया है। इनमें से 4242 लोगों के एक्स-रे किए और कुल मिलाकर 75 लोग टीबी से संक्रमित होने का पता चला है और उन्हें दवाई पर रखा गया है। इस वित्त वर्ष टीबी से 59 लोगों की मौत हुई है। जबकि गत वर्षों के मुकाबले मौत का ग्राफ कम रहा है और लोग समय रहते टीबी संक्रमण का पता चलने की सूरत में टीबी को मात देकर जिंदगी की जंग जीते हैं।
जिले में 109 पंचायतें हुईं टीबी मुक्त
विश्व टीबी दिवस के उपलक्ष्य पर जिले में 109 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई हैं। सोमवार को इस संदर्भ में उपायुक्त ऊना जतिन लाल की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें 41 पंचायतों को सिल्वर पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। तीन साल तक टीबी से पीड़ित लोगों की देखभाल करने और उनके सार्थक परिणाम आने के बाद सिल्वर पंचायत में से ही गोल्डन पंचायत के लिए पुरस्कार प्राप्त करने को नाम का चयन होगा।
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राजनीतिक दलों, प्रशासन और पुलिस ने मरीजों को गोद लेने से बनाई दूरी
जहां एक ओर धार्मिक और सामाजिक संगठन सहित औद्योगिक घराने टीबी मरीजों को गोद में लेने से लेकर उनके खानपान समेत हर तरह की सुविधा मुहैया करवाने में अग्रणी रहे हैं वहीं ऊना जिला प्रशासन व पुलिस से लेकर राजनीति दलों के नेताओं ने दूरियां बनाए रखी हैं।
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