{"_id":"6ada599dd16e23a96509bfb6","slug":"the-chairperson-expressed-objection-upon-not-receiving-a-satisfactory-response-from-the-officials-una-news-c-93-1-una1002-210824-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: अधिकारियों से संतोषजनक जवाब न मिलने पर सभापति ने जताया एतराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: अधिकारियों से संतोषजनक जवाब न मिलने पर सभापति ने जताया एतराज
Fri, 23 Oct 2026 12:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 23 Oct 2026 12:14 AM IST
विज्ञापन
जिला परिषद भवन में स्थानीय निधि लेखा समिति ऑडिट पैराग्राफ की समीक्षा बैठक में मौजूद अधिकारी व अ
ऊना। विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति के सभापति संजय रत्न ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधानसभा की समितियों के समक्ष किसी भी मामले को प्रस्तुत करने से पहले उसकी पूरी तैयारी करें। मांगी गई जानकारी स्पष्ट, सही और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। अन्यथा विभागीय जबावदेही के साथ ही अवमानना का मामला होगा। बैठक में कुछ मामलों पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर सभापति ने कड़ा एतराज जताया। वहीं कुछ विभागों के विभागाध्यक्ष बैठक में नदारद पाए जाने की सूरत में फटकार भी लगाई और कुछ विभागों के विभागाध्यक्ष दफ्तर छोड़कर बैठक में पहुंचे।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड के आधार पर पूरी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने वित्तीय मामलों में जवाबदेही बनाए रखने, अधूरी या गलत जानकारी देने से बचने और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उनके निपटारे के लिए विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जिला परिषद सभागार में आयोजित बैठक में समिति के सदस्य एवं विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन, कुलदीप सिंह राठौर और विवेक शर्मा भी उपस्थित रहे। समिति ने विभिन्न विभागों के लंबित ऑडिट पैरों, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी धन के उपयोग की समीक्षा की। सभापति ने निर्देश दिए कि 31 दिसंबर तक निपटाए जा सकने वाले ऑडिट पैरों की पहचान कर उनके निपटारे के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने समिति की ओर से मांगी गई जानकारी एक माह के भीतर उपलब्ध करवाने तथा ऑडिट पैरों से संबंधित सूचनाएं समय-समय पर संबंधित निदेशालयों को भेजने के निर्देश भी दिए। उपायुक्त जतिन लाल ने समिति का स्वागत करते हुए बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
छात्र कल्याण निधि का 15 दिनों के भीतर मांगा ब्योरा
संजय रत्न ने जिले के महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को 15 दिनों के भीतर छात्र कल्याण निधि में उपलब्ध राशि और विद्यार्थियों के हित में किए जा रहे खर्च का पूरा ब्योरा समिति को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने निधि का उचित लेखा-जोखा रखने और इसका उपयोग विद्यार्थियों के हित में सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और आईटीआई सहित शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध छात्र कल्याण निधि का इस्तेमाल विद्यार्थियों के कल्याण, पुस्तकालयों के विकास और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड के आधार पर पूरी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने वित्तीय मामलों में जवाबदेही बनाए रखने, अधूरी या गलत जानकारी देने से बचने और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उनके निपटारे के लिए विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जिला परिषद सभागार में आयोजित बैठक में समिति के सदस्य एवं विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन, कुलदीप सिंह राठौर और विवेक शर्मा भी उपस्थित रहे। समिति ने विभिन्न विभागों के लंबित ऑडिट पैरों, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी धन के उपयोग की समीक्षा की। सभापति ने निर्देश दिए कि 31 दिसंबर तक निपटाए जा सकने वाले ऑडिट पैरों की पहचान कर उनके निपटारे के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने समिति की ओर से मांगी गई जानकारी एक माह के भीतर उपलब्ध करवाने तथा ऑडिट पैरों से संबंधित सूचनाएं समय-समय पर संबंधित निदेशालयों को भेजने के निर्देश भी दिए। उपायुक्त जतिन लाल ने समिति का स्वागत करते हुए बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
विज्ञापन
छात्र कल्याण निधि का 15 दिनों के भीतर मांगा ब्योरा
संजय रत्न ने जिले के महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को 15 दिनों के भीतर छात्र कल्याण निधि में उपलब्ध राशि और विद्यार्थियों के हित में किए जा रहे खर्च का पूरा ब्योरा समिति को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने निधि का उचित लेखा-जोखा रखने और इसका उपयोग विद्यार्थियों के हित में सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और आईटीआई सहित शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध छात्र कल्याण निधि का इस्तेमाल विद्यार्थियों के कल्याण, पुस्तकालयों के विकास और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए।
विज्ञापन