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Una News: जिला के स्कूलों में मिड-डे मील का बजट चार महीने से नहीं हुआ जारी

Fri, 28 Nov 2025 05:31 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Nov 2025 05:31 PM IST
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The budget for mid-day meals in the district schools has not been released for four months.
शिक्षक अपनी जेब से कर रहे खर्च, कई जगह दुकानों से उधार लिया राशन
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कई स्कूलों पर तो दुकानदारों की लाखों रुपये की देनदारी हो गई
स्कूल प्रबंधकों ने जल्द बजट जारी करने की लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले के प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के लिए बजट की कमी शिक्षकों के लिए कठिन समस्या बन गई है। अगस्त से अब तक इस योजना का एक भी पैसा स्कूलों को नहीं मिला है। पहले जहां शिक्षक किसी तरह से योजना को चलाए रखने के लिए काम चला रहे थे, वहीं अब दुकानदारों ने भी उधार देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। कई स्कूलों की उधारी तो लाखों तक पहुंच गई है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिला ऊना ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और कहा कि मिड-डे-मील योजना को सुचारु रूप से चलाए रखने के लिए स्कूलों को अग्रिम राशि मिलनी चाहिए। संघ के जिलाध्यक्ष संदेश कुमार, महासचिव महेश शारदा, कोषाध्यक्ष अजय कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह और अन्य सदस्यों ने संयुक्त बयान में कहा कि मिड-डे-मील योजना को चलाना हमेशा से ही शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। कभी चावल की सप्लाई में देरी होती है तो कभी बजट नहीं मिलता। संघ ने मांग की है कि बजट और चावल की सप्लाई को नियमित और सुचारु तरीके से चलाया जाए, ताकि योजना को सही ढंग से लागू किया जा सके।
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उन्होंने यह भी कहा कि मिड-डे-मील को पौष्टिक बनाने के लिए सरकार की ओर से हरी सब्जियां, अंडे और दालों की सप्लाई के निर्देश तो दिए गए हैं, लेकिन सरकार इस बात की ओर ध्यान नहीं देती कि इस सप्लाई को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। अब हालत यह है कि आसपास के दुकानदार भी उधार देने में आनाकानी करने लगे हैं। इस योजना के तहत प्रतिदिन नर्सरी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए भोजन तैयार करना अब शिक्षकों के लिए और भी कठिन हो गया है।
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मिड-डे-मील वर्करों की स्थिति भी बदतर
इसी बीच मिड-डे-मील योजना में बच्चों के लिए खाना तैयार करने वाले वर्करों की स्थिति भी दयनीय है। कर्मचारियों को कभी समय पर वेतन नहीं मिल पाता। अक्सर उन्हें दो से तीन महीने बाद वेतन मिलता है। इस कारण उन्हें भी उधार लेकर अपना घर चलाना पड़ता है। स्कूलों में सेवाएं देने वाले अधिकांश मिड-डे-मील कर्मचारी आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उन्हें नियमित वेतन की सख्त आवश्यकता है लेकिन सरकार से इस समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक सोमलाल धीमान ने जानकारी दी कि मिड-डे-मील से जुड़ा बजट जारी होते ही इसे सभी स्कूलों को दे दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है और इस पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
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