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छुट्टी के दिन करें शिक्षक नेता संगठनों का काम : अभिभावक
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छुट्टी के दिन करें शिक्षक नेता संगठनों का काम : अभिभावक
बोले- शिक्षक संगठन अपने ही मुद्दों को भुनाने में व्यस्त
एक तो स्टाफ नहीं, ऊपर से बच्चे भी स्कूलों में हो रहे कम
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। प्राथमिक स्तर से लेकर जमा दो तक के स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी है। अभिभावकों जसपाल, श्याम कुमार, सीता देवी, रामकुमार शर्मा, विजय कुमार, राधिका देवी, प्रीतम सिंह, मेहर चंद, बलवंत सिंह, नरेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, मनोज कुमार आदि ने कहा कि सरकार एक तरफ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है। बड़े-बड़े भवन बनाए गए हैं लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक कम हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तो बात दूर है, कई विद्यार्थियों को आम शिक्षा भी नहीं मिल पाती है। प्राथमिक से लेकर जमा दो स्कूलों तक के अभिभावकों का कहना है कि सरकार तो सोई हुई है। जब तक अध्यापकों की कमी पूरी नहीं होती है, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे आ सकती है। प्राथमिक स्कूल में नर्सरी से लेकर पांचवीं तक आठ कक्षाएं हैं। उन्हें पढ़ाने वाला केवल एक ही अध्यापक है। कक्षा 6 से 12वीं तक पढ़ाने वाले अध्यापकों और प्रवक्ताओं की भी लंबे समय से कई विद्यालयों में कमी चली आ रही है। अध्यापकों को जो समय बच्चों के हित में देना चाहिए, वे अधिकतर समय अपनी मांगें उठाने और मनवाने में ही व्यस्त हैं। अभिभावकों का कहना है कि संघ के कार्य यदि करने ही हैं, तो छुट्टी वाले दिन करें। अभिभावकों का कहना है कि बड़े दुख की बात है कि एक राष्ट्र निर्माता जिसने राष्ट्र का निर्माण करना है और अभिभावकों को उनसे बहुत अपेक्षाएं हैं, अपने कर्तव्य का निर्वहन नियमित रूप से करके समाज को भी अच्चा संदेश दे सकते हैं।
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बोले- शिक्षक संगठन अपने ही मुद्दों को भुनाने में व्यस्त
एक तो स्टाफ नहीं, ऊपर से बच्चे भी स्कूलों में हो रहे कम
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। प्राथमिक स्तर से लेकर जमा दो तक के स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी है। अभिभावकों जसपाल, श्याम कुमार, सीता देवी, रामकुमार शर्मा, विजय कुमार, राधिका देवी, प्रीतम सिंह, मेहर चंद, बलवंत सिंह, नरेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, मनोज कुमार आदि ने कहा कि सरकार एक तरफ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है। बड़े-बड़े भवन बनाए गए हैं लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक कम हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तो बात दूर है, कई विद्यार्थियों को आम शिक्षा भी नहीं मिल पाती है। प्राथमिक से लेकर जमा दो स्कूलों तक के अभिभावकों का कहना है कि सरकार तो सोई हुई है। जब तक अध्यापकों की कमी पूरी नहीं होती है, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे आ सकती है। प्राथमिक स्कूल में नर्सरी से लेकर पांचवीं तक आठ कक्षाएं हैं। उन्हें पढ़ाने वाला केवल एक ही अध्यापक है। कक्षा 6 से 12वीं तक पढ़ाने वाले अध्यापकों और प्रवक्ताओं की भी लंबे समय से कई विद्यालयों में कमी चली आ रही है। अध्यापकों को जो समय बच्चों के हित में देना चाहिए, वे अधिकतर समय अपनी मांगें उठाने और मनवाने में ही व्यस्त हैं। अभिभावकों का कहना है कि संघ के कार्य यदि करने ही हैं, तो छुट्टी वाले दिन करें। अभिभावकों का कहना है कि बड़े दुख की बात है कि एक राष्ट्र निर्माता जिसने राष्ट्र का निर्माण करना है और अभिभावकों को उनसे बहुत अपेक्षाएं हैं, अपने कर्तव्य का निर्वहन नियमित रूप से करके समाज को भी अच्चा संदेश दे सकते हैं।