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Una News: सताने लगा टैक्स, निगम बनने से व्यक्तिगत पहचान भी नहीं मिलेगी
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रोजमर्रा के कामकाज को निपटाने के लिए पंचायतों को छोड़कर शहर की ओर करना पड़ेगा रुख
प्रबुद्धजन बोले- हिमुडा के तहत भी विकास कार्य संतोषजनक नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नगर निगम ऊना मंजूर होने के बाद दायरे में आई पंचायतों के बाशिंदे फायदे और नुकसान होने के आकलन में जुट गए हैं। जहां एक ओर टैक्स का बोझ सता रहा है वहीं रोजमर्रा के कामकाज को निपटाने के लिए पंचायतों को छोड़कर शहर की ओर रुख करना पड़ेगा। हिमुडा के तहत भी विकास कार्य संतोषजनक नहीं रहा है। वहीं, व्यक्तिगत पहचान पंचायतों में होती है, वह नगर निगम में नहीं मिलेगी। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के पूरा न होने की चिंता सता रही है। इस बारे में नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों के ग्रामीणों ने अपने विचार व्यक्त किए। बाक्स
मलाहत पंचायत ऊना दुर्गा कॉलोनी, भरोलियां खुर्द के सेवानिवृत्त चीफ आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट राजेंद्र कौशल का कहना है कि नगर निगम ऊना बनने से फायदा भी होगा और नुकसान भी। ऊना को नगर निगम बनाया जा रहा है तो खासकर हम लोग जो पंचायतों से जुड़े हुए हैं या ग्रामीण परिवेश में रहते हैं, उन पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा और जो व्यक्तिगत पहचान पंचायतों में होती है। वह नगर निगम में नहीं मिलेगी। सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
रक्कड़ काॅलोनी ग्राम पंचायत टब्बा ऊना की संतोष कालिया ने बताया कि ऊना के इर्द-गिर्द की पंचायतों को प्रस्तावित नगर निगम में शामिल किए जाने से उन्हें क्या फायदा और नुक्सान होगा, यह भविष्य के गर्भ में है। इससे पूर्व जिन ग्रामीण क्षेत्रों को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के तहत लाया गया था उनका अनुभव अत्यंत कटु रहा है। लोगों से भवनों के नक्शे पास करवाने की एवज में मोटी रकम वसूल की गई। विकास के मामले में अंगूठा दिखाया गया।
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जिला शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थान देहलां में कार्यरत लेक्चरर सुधा पराशर का कहना है कि ऊना का नगर निगम बनना बहुत ही सराहनीय कदम है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत में हम सभी को कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दूरगामी प्रयास बहुत ही फायदेमंद होते हैं। आधुनिक समय में चारों ओर लगातार सुख सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में आधुनिक भारत की कल्पना करने वाली आम जनता अपने आप को गौरवान्वित महसूस करेगी।
रायंसरी निवासी कुशल ज्योति भारद्वाज का कहना है कि नगर निगम बनने के फायदों की जानकारी सरकार की ओर से दी जानी चाहिए। यदि सरकार पहले से इस संबंध में विस्तार से विवरण लोगों के सामने रखे तभी कुछ कहने में समर्थ हो सकते हैं। एक बात तो जरूर है कि यदि कोई टैक्स बढ़ेगा, तो सुविधा भी जरूर मिलेगी। सरकार को चाहिए प्रचार-प्रसार के माध्यम से इस संबंध में लोगों को पूरी जानकारी दे
ईसपुर के शिक्षाविद सुच्चा सिंह कंग का कहना है कि जो भी गांव नगर निगम के दायरे में आएंगे, उनका विकास होगा। जब कोई सुविधा लेनी होती है तो थोड़ी बहुत तकलीफ तो उठानी ही पड़ेगी। बाकी जानकारी के अनुसार मनरेगा बंद होने से गरीब लोगों का रोजगार छिन जाएगा। सरकार को यह बात भी ध्यान में रखकर ही अगला कदम उठाना चाहिए।
कामकाजी महिला परमजोत का कहना है कि नगर निगम के दायरे में आने वाले गांव पहले ही आधे शहर बन चुके हैं। यदि और सुविधाएं मिलेंगी तो अवश्य लेनी चाहिए। जिसमें स्वच्छता, कूड़ा प्रबंधन तथा पीने का शुद्ध पानी मिलने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार होगा। परंतु सरकार को वृद्ध और विकलांग लोगों का ध्यान रखना अति जरूरी है।
नारी क्षेत्र से सुनीता रानी का कहना है कि पहले भी प्रदेश आवास बोर्ड का नाम बदलकर हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण जिसे हिमुडा कहते हैं, 2004 में बनाया गया था। इसका उद्देश्य हर प्रकार के लोगों को विकास के साथ आवास की सुविधा भी देना था परंतु व्यावहारिक रूप इसकी कारगुजारी इतनी बढ़िया नहीं रही। यदि गरीब और मध्यम वर्ग को कोई नुकसान न हो तो गांवों को भी नगर निगम में शामिल होने में किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए।
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प्रबुद्धजन बोले- हिमुडा के तहत भी विकास कार्य संतोषजनक नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नगर निगम ऊना मंजूर होने के बाद दायरे में आई पंचायतों के बाशिंदे फायदे और नुकसान होने के आकलन में जुट गए हैं। जहां एक ओर टैक्स का बोझ सता रहा है वहीं रोजमर्रा के कामकाज को निपटाने के लिए पंचायतों को छोड़कर शहर की ओर रुख करना पड़ेगा। हिमुडा के तहत भी विकास कार्य संतोषजनक नहीं रहा है। वहीं, व्यक्तिगत पहचान पंचायतों में होती है, वह नगर निगम में नहीं मिलेगी। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के पूरा न होने की चिंता सता रही है। इस बारे में नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों के ग्रामीणों ने अपने विचार व्यक्त किए। बाक्स
मलाहत पंचायत ऊना दुर्गा कॉलोनी, भरोलियां खुर्द के सेवानिवृत्त चीफ आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट राजेंद्र कौशल का कहना है कि नगर निगम ऊना बनने से फायदा भी होगा और नुकसान भी। ऊना को नगर निगम बनाया जा रहा है तो खासकर हम लोग जो पंचायतों से जुड़े हुए हैं या ग्रामीण परिवेश में रहते हैं, उन पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा और जो व्यक्तिगत पहचान पंचायतों में होती है। वह नगर निगम में नहीं मिलेगी। सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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रक्कड़ काॅलोनी ग्राम पंचायत टब्बा ऊना की संतोष कालिया ने बताया कि ऊना के इर्द-गिर्द की पंचायतों को प्रस्तावित नगर निगम में शामिल किए जाने से उन्हें क्या फायदा और नुक्सान होगा, यह भविष्य के गर्भ में है। इससे पूर्व जिन ग्रामीण क्षेत्रों को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के तहत लाया गया था उनका अनुभव अत्यंत कटु रहा है। लोगों से भवनों के नक्शे पास करवाने की एवज में मोटी रकम वसूल की गई। विकास के मामले में अंगूठा दिखाया गया।
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जिला शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थान देहलां में कार्यरत लेक्चरर सुधा पराशर का कहना है कि ऊना का नगर निगम बनना बहुत ही सराहनीय कदम है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत में हम सभी को कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दूरगामी प्रयास बहुत ही फायदेमंद होते हैं। आधुनिक समय में चारों ओर लगातार सुख सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में आधुनिक भारत की कल्पना करने वाली आम जनता अपने आप को गौरवान्वित महसूस करेगी।
रायंसरी निवासी कुशल ज्योति भारद्वाज का कहना है कि नगर निगम बनने के फायदों की जानकारी सरकार की ओर से दी जानी चाहिए। यदि सरकार पहले से इस संबंध में विस्तार से विवरण लोगों के सामने रखे तभी कुछ कहने में समर्थ हो सकते हैं। एक बात तो जरूर है कि यदि कोई टैक्स बढ़ेगा, तो सुविधा भी जरूर मिलेगी। सरकार को चाहिए प्रचार-प्रसार के माध्यम से इस संबंध में लोगों को पूरी जानकारी दे
ईसपुर के शिक्षाविद सुच्चा सिंह कंग का कहना है कि जो भी गांव नगर निगम के दायरे में आएंगे, उनका विकास होगा। जब कोई सुविधा लेनी होती है तो थोड़ी बहुत तकलीफ तो उठानी ही पड़ेगी। बाकी जानकारी के अनुसार मनरेगा बंद होने से गरीब लोगों का रोजगार छिन जाएगा। सरकार को यह बात भी ध्यान में रखकर ही अगला कदम उठाना चाहिए।
कामकाजी महिला परमजोत का कहना है कि नगर निगम के दायरे में आने वाले गांव पहले ही आधे शहर बन चुके हैं। यदि और सुविधाएं मिलेंगी तो अवश्य लेनी चाहिए। जिसमें स्वच्छता, कूड़ा प्रबंधन तथा पीने का शुद्ध पानी मिलने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार होगा। परंतु सरकार को वृद्ध और विकलांग लोगों का ध्यान रखना अति जरूरी है।
नारी क्षेत्र से सुनीता रानी का कहना है कि पहले भी प्रदेश आवास बोर्ड का नाम बदलकर हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण जिसे हिमुडा कहते हैं, 2004 में बनाया गया था। इसका उद्देश्य हर प्रकार के लोगों को विकास के साथ आवास की सुविधा भी देना था परंतु व्यावहारिक रूप इसकी कारगुजारी इतनी बढ़िया नहीं रही। यदि गरीब और मध्यम वर्ग को कोई नुकसान न हो तो गांवों को भी नगर निगम में शामिल होने में किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए।