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Una News: सुरजीत राणा के नाम एशिया का बेस्ट अटैकर बनने का गौरव
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हिमाचल दिवस
जंडूर गांव से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक : डिप्टी कमांडेंट ने वॉलीबॉल में रचाया इतिहास, बढ़ाया देश का गर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के उपमंडल बंगाणा के छोटे से गांव जंडूर से निकले एक साधारण परिवार के बेटे सुरजीत राणा ने अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल में ऐसा नाम कमाया कि आज पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट के पद पर कार्यरत यह खिलाड़ी न सिर्फ भारत के लिए खेला, बल्कि कई बार टीम का नेतृत्व करते हुए देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरव दिलाया। इस होनहार खिलाड़ी ने जूनियर एशियन चैंपियनशिप (दोहा, कतर) में सिल्वर मेडल के साथ एशिया का बेस्ट अटैकर बनने का गौरव प्राप्त किया। एसएएफ गेम्स में गोल्ड, चीन में वर्ल्ड क्वालीफाइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण और मलेशिया में वर्ल्ड चैंपियनशिप, थाईलैंड में एशियन गेम्स और ईरान में सीनियर एशियन चैंपियनशिप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दुबई, ईरान, फ्रांस, चेक गणराज्य, जर्मनी, अबुधाबी और मस्कट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी इन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और विश्व की शीर्ष 12 खिलाड़ियों की रैंकिंग में अपना स्थान बनाया। उन्होंने दो वर्षों तक दोहा, कतर के प्रोफेशनल क्लबों के लिए भी खेला और अपने खेल कौशल से विदेशी धरती पर भी भारत का नाम रोशन किया। कई बार भारतीय टीम के कप्तान के रूप में भी उन्होंने मैदान संभाला, वहीं पंजाब और बीएसएफ की टीमों की भी कप्तानी की। पंजाब सरकार की ओर से महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड दिया गया है। गांव जंडूर से निकलकर देश और दुनिया में नाम कमाना इस बात का प्रतीक है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी अगर लगन और मेहनत से काम करे, तो असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
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जंडूर गांव से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक : डिप्टी कमांडेंट ने वॉलीबॉल में रचाया इतिहास, बढ़ाया देश का गर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के उपमंडल बंगाणा के छोटे से गांव जंडूर से निकले एक साधारण परिवार के बेटे सुरजीत राणा ने अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल में ऐसा नाम कमाया कि आज पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट के पद पर कार्यरत यह खिलाड़ी न सिर्फ भारत के लिए खेला, बल्कि कई बार टीम का नेतृत्व करते हुए देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरव दिलाया। इस होनहार खिलाड़ी ने जूनियर एशियन चैंपियनशिप (दोहा, कतर) में सिल्वर मेडल के साथ एशिया का बेस्ट अटैकर बनने का गौरव प्राप्त किया। एसएएफ गेम्स में गोल्ड, चीन में वर्ल्ड क्वालीफाइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण और मलेशिया में वर्ल्ड चैंपियनशिप, थाईलैंड में एशियन गेम्स और ईरान में सीनियर एशियन चैंपियनशिप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दुबई, ईरान, फ्रांस, चेक गणराज्य, जर्मनी, अबुधाबी और मस्कट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी इन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और विश्व की शीर्ष 12 खिलाड़ियों की रैंकिंग में अपना स्थान बनाया। उन्होंने दो वर्षों तक दोहा, कतर के प्रोफेशनल क्लबों के लिए भी खेला और अपने खेल कौशल से विदेशी धरती पर भी भारत का नाम रोशन किया। कई बार भारतीय टीम के कप्तान के रूप में भी उन्होंने मैदान संभाला, वहीं पंजाब और बीएसएफ की टीमों की भी कप्तानी की। पंजाब सरकार की ओर से महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड दिया गया है। गांव जंडूर से निकलकर देश और दुनिया में नाम कमाना इस बात का प्रतीक है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी अगर लगन और मेहनत से काम करे, तो असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।