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Una News: बरसात के बाद ऊना में बढ़ने लगा तूड़ी का संकट
Sat, 19 Sep 2026 12:33 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:33 AM IST
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ऊना। बरसात के बाद ऊना जिले में पशु चारे का संकट बढ़ने लगा है। तूड़ी की स्थानीय उपलब्धता कम होने के कारण पशुपालकों को पंजाब के व्यापारियों से महंगे दाम पर चारा खरीदना पड़ रहा है। इन दिनों तूड़ी करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रही है जबकि अमूमन इन दिनों में दाम 700 से 800 प्रति क्विंटल रहती थी। वर्तमान में ऊना के पशुपालक मुख्य रूप से पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र से तूड़ी मंगवा रहे हैं।
लगातार बारिश के कारण खेतों में रखी फसल और चारे को भी नुकसान पहुंचा है। इससे तूड़ी की उपलब्धता प्रभावित हुई और इसके दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। पशुपालकों का कहना है कि चारे की बढ़ती कीमत ने पशुपालन का खर्च बढ़ा दिया है। दूसरी ओर दूध के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। ऐसे में पशुओं को पालना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
पशुपालकों के अनुसार एक पशु को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में सूखा चारा, हरा चारा और अन्य आहार देना पड़ता है। तूड़ी के दाम बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त मात्रा में तूड़ी उपलब्ध नहीं होने के कारण पंजाब से इसकी खरीद करनी पड़ रही है। इसमें परिवहन का खर्च जुड़ने से पशुपालकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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उपनिदेशक जिला पशुपालन विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि बरसात में अधिकतर पशुपालक बरसात में हरी घास का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सर्दी के मौसम में चारे की कमी रहती है। चारे के दाम इसकी उपलब्धता पर निर्भर करते हैं।
पहले स्थानीय स्तर पर तूड़ी आसानी से मिल जाती थी लेकिन इस बार बरसात के बाद इसकी कमी महसूस हो रही है। पंजाब से तूड़ी मंगवाने पर कीमत के साथ ढुलाई का खर्च भी देना पड़ रहा है। चारे के खर्च के मुकाबले दूध की कीमत कम होने से पशुपालन से होने वाली आमदनी प्रभावित हो रही है।
-राजकुमार, पशुपालक
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तूड़ी के दाम लगातार बढ़ने से पशुओं को पालना महंगा हो गया है। करीब 1200 रुपये क्विंटल की दर से चारा खरीदना पड़ रहा है। दूध बेचकर होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा चारे पर ही खर्च हो जाता है। सरकार को पशुपालकों की समस्या को देखते हुए चारे की उपलब्धता और कीमतों को लेकर उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
-तरसेम लाल, पशुपालक
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लगातार बारिश के कारण खेतों में रखी फसल और चारे को भी नुकसान पहुंचा है। इससे तूड़ी की उपलब्धता प्रभावित हुई और इसके दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। पशुपालकों का कहना है कि चारे की बढ़ती कीमत ने पशुपालन का खर्च बढ़ा दिया है। दूसरी ओर दूध के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। ऐसे में पशुओं को पालना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
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पशुपालकों के अनुसार एक पशु को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में सूखा चारा, हरा चारा और अन्य आहार देना पड़ता है। तूड़ी के दाम बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त मात्रा में तूड़ी उपलब्ध नहीं होने के कारण पंजाब से इसकी खरीद करनी पड़ रही है। इसमें परिवहन का खर्च जुड़ने से पशुपालकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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उपनिदेशक जिला पशुपालन विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि बरसात में अधिकतर पशुपालक बरसात में हरी घास का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सर्दी के मौसम में चारे की कमी रहती है। चारे के दाम इसकी उपलब्धता पर निर्भर करते हैं।
पहले स्थानीय स्तर पर तूड़ी आसानी से मिल जाती थी लेकिन इस बार बरसात के बाद इसकी कमी महसूस हो रही है। पंजाब से तूड़ी मंगवाने पर कीमत के साथ ढुलाई का खर्च भी देना पड़ रहा है। चारे के खर्च के मुकाबले दूध की कीमत कम होने से पशुपालन से होने वाली आमदनी प्रभावित हो रही है।
-राजकुमार, पशुपालक
तूड़ी के दाम लगातार बढ़ने से पशुओं को पालना महंगा हो गया है। करीब 1200 रुपये क्विंटल की दर से चारा खरीदना पड़ रहा है। दूध बेचकर होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा चारे पर ही खर्च हो जाता है। सरकार को पशुपालकों की समस्या को देखते हुए चारे की उपलब्धता और कीमतों को लेकर उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
-तरसेम लाल, पशुपालक