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Una News: आलू की बिजाई के लिए मुर्गी खाद का छिड़काव शुरू

Sun, 31 Aug 2025 01:13 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 31 Aug 2025 01:13 AM IST
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Spraying of poultry manure started for potato sowing
खेतों में कुछ हद तक नमी कम होने पर खेतों में दाखिल हुए ट्रैक्टर
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नमी और घटने पर खेतों में शुरू होगा जुताई का काम
किसानों ने बीज की खरीद के लिए पंजाब के गोदामों में किया संपर्क
1500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास हैं आलू बीज के शुरुआती दाम
बारिश थमने के बाद किसानों ने आलू की बिजाई की तैयारी तेज की

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले में लगातार हो रही बारिश से राहत मिलने के बाद किसानों ने आलू की दो माह वाली फसल की बिजाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं। क्षेत्र में वीरवार से बारिश कम हुई है। वर्तमान में किसान खेतों में मुर्गी खाद का छिड़काव कर रहे हैं, जिसे आलू की फसल के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। वहीं, कम नमी वाले खेतों में जुताई की तैयारी भी जारी है। अगर मौसम सामान्य रहा तो 5 सितंबर के बाद आलू की बिजाई तेज गति पकड़ लेगी। जानकारी के अनुसार ऊना जिले में करीब 2000 हेक्टेयर जमीन पर आलू की बिजाई की जाती है। हालांकि, इस बार मौसम की विपरीत परिस्थितियों के चलते बिजाई में कमी आने का अनुमान है। जिन किसानों ने फसल की बिजाई करनी है, वे बीज की खरीद के लिए पंजाब के गोदामों से संपर्क कर रहे हैं। बीज की शुरुआती कीमत 1500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। बड़े किसान पंजाब से बीज खरीदकर ट्रकों के माध्यम से ऊना लाते हैं, जिसके बाद छोटे किसान भी उनसे बीज की खरीद करते हैं। किसान विनोद कुमार, अरविंद कुमार, अश्विनी सैनी, परमिंद्र सैनी, रमेश कुमार और हरबंस सैनी ने बताया कि खेतों में इस समय आवश्यकता से अधिक नमी है। यदि एक सप्ताह तक धूप खिली रही तो खेतों की स्थिति बेहतर होगी। फिलहाल वे खाद का छिड़काव कर रहे हैं और उम्मीद है कि बारिश न होने पर बिजाई योग्य परिस्थितियां बन जाएंगी।
स्वां नदी के आसपास का बड़ा क्षेत्र बारिश से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां तेज बहाव से कई किसानों की जमीन और फसलें पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी हैं। प्रभावित इलाकों में इस बार बिजाई संभव नहीं है। अनुमान है कि इस बार आलू की बिजाई 50 फीसदी तक घट सकती है।
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जिला कृषि उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि आलू की बिजाई के लिए किसानों को अभी इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन में अधिक नमी होने से बीज में सड़न की संभावना रहती है। इसलिए कम से कम एक सप्ताह तक रुककर परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही बिजाई प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
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