{"_id":"6737387de3cbfd50f501fd3c","slug":"six-cps-mlas-should-resign-from-assembly-membership-randhir-una-news-c-93-1-ssml1048-138387-2024-11-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दें सीपीएस रहे छह विधायक : रणधीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दें सीपीएस रहे छह विधायक : रणधीर
विज्ञापन
कहा- कोर्ट के फैसले के बाद नैतिकता के आधार पर देना चाहिए त्यागपत्र
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, इस्तीफा न दिया को कानूनी तरीके से कदम उठाएंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। मुख्य संसदीय सचिव पद पर की नियुक्तियों को उच्च न्यायालय की ओर से असांविधानिक करार दिए जाने के बाद पदों से हटाए गए सभी छह कांग्रेस विधायकों की विधानसभा सदस्यता समाप्त करनी चाहिए। विधायकों को नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र देना चाहिए, लेकिन कांग्रेस से नैतिकता की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह बात प्रदेश भाजपा प्रवक्ता व विधायक रणधीर शर्मा ने ऊना भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही। कहा कि कांग्रेस सरकार की ओर से विधायकों को सीपीएस नियुक्त किए जाने का भाजपा ने तुरंत विरोध किया था। नियुक्तियों को असांविधानिक, गैर कानूनी व फिजूल खर्चों को बढ़ावा देने वाला बताया था। सुक्खू सरकार ने विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव पद से नवाजकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया लेकिन जब सरकार ने भाजपा की मांग को अनसुना किया तो भाजपा के 11 विधायकों ने प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इन नियुक्तियों को रद्द करने के लिए चुनौती दी। अब प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए भाजपा को इस मसले पर सही साबित किया है। अदालत ने सीपीएस नियुक्ति के लिए बनाए गए एक्ट को भी निरस्त किया है। उन्होंने कहा कि लाभ के पद पर रहने वाले विधायकों को विधानसभा की सदस्यता बरकरार रखने का अधिकार नहीं रहता तथा उनकी सदस्यता चली जाती है। इसलिए इस निर्णय के बाद नैतिकता के आधार पर इन सभी छह विधायकों को तुरंत विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए। कहा कि यदि कांग्रेस विधायक अपने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा नहीं देते तो भाजपा उनकी सदस्यता को समाप्त करने के लिए कानूनी पग उठाएगी। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पिछले दो वर्षों के दौरान इन विधायकों की सीपीएस के रूप में तैनाती के दौरान होने वाले सभी खर्च को विधायकों से वसूला जाए या कांग्रेस पार्टी इस व्यय को वहन कर खर्च हुई राशि को सरकारी खजाने में जमा करवाएं। इस अवसर पर पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व विधायक सतपाल सत्ती भी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, इस्तीफा न दिया को कानूनी तरीके से कदम उठाएंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। मुख्य संसदीय सचिव पद पर की नियुक्तियों को उच्च न्यायालय की ओर से असांविधानिक करार दिए जाने के बाद पदों से हटाए गए सभी छह कांग्रेस विधायकों की विधानसभा सदस्यता समाप्त करनी चाहिए। विधायकों को नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र देना चाहिए, लेकिन कांग्रेस से नैतिकता की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह बात प्रदेश भाजपा प्रवक्ता व विधायक रणधीर शर्मा ने ऊना भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही। कहा कि कांग्रेस सरकार की ओर से विधायकों को सीपीएस नियुक्त किए जाने का भाजपा ने तुरंत विरोध किया था। नियुक्तियों को असांविधानिक, गैर कानूनी व फिजूल खर्चों को बढ़ावा देने वाला बताया था। सुक्खू सरकार ने विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव पद से नवाजकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया लेकिन जब सरकार ने भाजपा की मांग को अनसुना किया तो भाजपा के 11 विधायकों ने प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इन नियुक्तियों को रद्द करने के लिए चुनौती दी। अब प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए भाजपा को इस मसले पर सही साबित किया है। अदालत ने सीपीएस नियुक्ति के लिए बनाए गए एक्ट को भी निरस्त किया है। उन्होंने कहा कि लाभ के पद पर रहने वाले विधायकों को विधानसभा की सदस्यता बरकरार रखने का अधिकार नहीं रहता तथा उनकी सदस्यता चली जाती है। इसलिए इस निर्णय के बाद नैतिकता के आधार पर इन सभी छह विधायकों को तुरंत विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए। कहा कि यदि कांग्रेस विधायक अपने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा नहीं देते तो भाजपा उनकी सदस्यता को समाप्त करने के लिए कानूनी पग उठाएगी। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पिछले दो वर्षों के दौरान इन विधायकों की सीपीएस के रूप में तैनाती के दौरान होने वाले सभी खर्च को विधायकों से वसूला जाए या कांग्रेस पार्टी इस व्यय को वहन कर खर्च हुई राशि को सरकारी खजाने में जमा करवाएं। इस अवसर पर पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व विधायक सतपाल सत्ती भी उपस्थित रहे।