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Una News: आठ मेडिकल स्टोर संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी
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दवाओं के रखरखाव, क्रय और बिक्री में त्रुटियां मिलने पर की कार्रवाई
जीवन रक्षक दवाओं का नशे के रूप में इस्तेमाल रोकने के लिए किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मेडिकल स्टोरों में जीवन रक्षक दवाओं की बिक्री पर निगरानी के मद्देनजर चलाए जा रहे अभियान के तहत अंब, गगरेट, ऊना, मैहतपुर के मेडिकल स्टोरों की जांच की गई। निरीक्षण में अनुसूची-एच में शामिल दवाओं के प्रोटोकॉल का पालन, लाइसेंस एच-वन रजिस्टर और सीसीटीवी कैमरे की स्थिति की जांच की गई। नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग बिना चिकित्सीय सलाह के नहीं बेची जाती हैं। इस प्रक्रिया के तहत दस्तावेज मिलान न होने के चलते आठ मेडिकल स्टोरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन दवाओं की बिक्री के लिए स्टोर को मरीजों की पर्चियों का रिकॉर्ड संभाल कर रखना होता है। इस रिकॉर्ड का वार्षिक निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है। इसकी रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी को भेजी जाती है। जिले में जीवन रक्षक दवाओं का नशे के रूप में प्रयोग न हो, इसलिए मेडिकल स्टोर संचालकों को नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग लेने वालों का रिकॉर्ड मेंटेन करने के दिशा-निर्देश और जांच की जा रही है। इन दवाइयों की बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोर संचालकों को मरीज की पर्ची पर मेडिकल स्टोर की स्टैंप लगानी होगी। हालांकि, यह निर्देश नए नहीं है लेकिन जिले में औचक जांच के दौरान कुछ मेडिकल स्टोरों का रिकॉर्ड मिसमैच पाया गया है। इन मेडिकल स्टोरों पर विभाग ने कार्रवाई के दौरान उनको नोटिस जारी किए गए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर अंब रजत शर्मा और ड्रग इंस्पेक्टर पंकज गौतम ने कहा कि नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग लेने वालों का रिकॉर्ड मेंटेन करने के दिशा-निर्देश दोबारा जारी किए गए हैं। मेडिकल स्टोरों पर ये दवाएं और इंजेक्शन लेने वालों का रिकॉर्ड रखने की हिदायत जारी की गई है। इन दवाइयों की बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोर संचालकों को मरीज की पर्ची पर मेडिकल स्टोर की स्टैंप भी लगानी होगी। दुकान पर रखे एच-वन रजिस्टर को भी समयबद्ध तरीके से मेंटेन रखना होगा। निरीक्षण के दौरान कई दुकानें मानकों का उल्लंघन करती हुई पाई गईं। कई में दवाओं के रिकॉर्ड में कमी पाई गई, तो कइयों में खरीद और बिक्री के स्टॉक के बीच अंतर पाया गया। जिले के आठ दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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जीवन रक्षक दवाओं का नशे के रूप में इस्तेमाल रोकने के लिए किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मेडिकल स्टोरों में जीवन रक्षक दवाओं की बिक्री पर निगरानी के मद्देनजर चलाए जा रहे अभियान के तहत अंब, गगरेट, ऊना, मैहतपुर के मेडिकल स्टोरों की जांच की गई। निरीक्षण में अनुसूची-एच में शामिल दवाओं के प्रोटोकॉल का पालन, लाइसेंस एच-वन रजिस्टर और सीसीटीवी कैमरे की स्थिति की जांच की गई। नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग बिना चिकित्सीय सलाह के नहीं बेची जाती हैं। इस प्रक्रिया के तहत दस्तावेज मिलान न होने के चलते आठ मेडिकल स्टोरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन दवाओं की बिक्री के लिए स्टोर को मरीजों की पर्चियों का रिकॉर्ड संभाल कर रखना होता है। इस रिकॉर्ड का वार्षिक निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है। इसकी रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी को भेजी जाती है। जिले में जीवन रक्षक दवाओं का नशे के रूप में प्रयोग न हो, इसलिए मेडिकल स्टोर संचालकों को नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग लेने वालों का रिकॉर्ड मेंटेन करने के दिशा-निर्देश और जांच की जा रही है। इन दवाइयों की बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोर संचालकों को मरीज की पर्ची पर मेडिकल स्टोर की स्टैंप लगानी होगी। हालांकि, यह निर्देश नए नहीं है लेकिन जिले में औचक जांच के दौरान कुछ मेडिकल स्टोरों का रिकॉर्ड मिसमैच पाया गया है। इन मेडिकल स्टोरों पर विभाग ने कार्रवाई के दौरान उनको नोटिस जारी किए गए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर अंब रजत शर्मा और ड्रग इंस्पेक्टर पंकज गौतम ने कहा कि नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक ड्रग लेने वालों का रिकॉर्ड मेंटेन करने के दिशा-निर्देश दोबारा जारी किए गए हैं। मेडिकल स्टोरों पर ये दवाएं और इंजेक्शन लेने वालों का रिकॉर्ड रखने की हिदायत जारी की गई है। इन दवाइयों की बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोर संचालकों को मरीज की पर्ची पर मेडिकल स्टोर की स्टैंप भी लगानी होगी। दुकान पर रखे एच-वन रजिस्टर को भी समयबद्ध तरीके से मेंटेन रखना होगा। निरीक्षण के दौरान कई दुकानें मानकों का उल्लंघन करती हुई पाई गईं। कई में दवाओं के रिकॉर्ड में कमी पाई गई, तो कइयों में खरीद और बिक्री के स्टॉक के बीच अंतर पाया गया। जिले के आठ दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।