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दो वर्ष बाद इस बार सजेगा शिवबाड़ी मेला
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गगरेट (ऊना)। दो वर्ष बाद इस बार गगरेट की शिवबाड़ी में मेला सजेगा। अगले शनिवार 23 अप्रैल को द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी का मेला एक बार फिर सजने को तैयार है। द्रोण नगरी शिवबाड़ी इस मेले में आने वाले आगंतुकों का स्वागत करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही है।
कोरोना काल में पिछले दो वर्षों से सभी तीज त्योहारों सहित मेलों तक को ग्रहण लग गया था। पिछले दो वर्षों से शिवबाड़ी मेला भी कोरोना की काली छाया में कहीं छिप गया था। बैसाखी से दूसरे शनिवार को यह मेला सजता है। जिसमें दूर-दूर से आए व्यापारी अपनी रंग-बिरंगी दुकानें सजा कर मेले की शोभा बढ़ाते हैं। दो वर्षों बाद सजने वाले इस मेले का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बार कोरोना का काला साया न होने से मेला लगना लगभग तय है। पुरातन काल से इस मेले को लेकर बहुत सी पौराणिक गाथाएं जुड़ी हैं।
एक मान्यता के अनुसार इस दो दिवसीय शिवबाड़ी मेले में भगवान शिव स्वयं मंदिर परिसर में उपस्थित होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। दो दिवसीय इस मेले में पड़ोसी राज्य पंजाब सहित दूर-दूर से शिव भक्त आकर भगवान भोले की सच्चे मन से भक्ति कर आशीर्वाद प्राप्त कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं गुरु द्रोणाचार्य की पुत्री ययाति को वर्ष में एक बार यानी बैसाखी के दूसरे शनिवार शिवबाड़ी में स्वयं उपस्थित होने का वचन दिया था।
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उधर, मंदिर के पुजारी अजय शर्मा और अश्वनी के अनुसार कोरोना के चलते दो वर्ष तक मेला नहीं हो पाया, परंतु इस वर्ष मेले में शिवभक्त एकत्रित होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
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कोरोना काल में पिछले दो वर्षों से सभी तीज त्योहारों सहित मेलों तक को ग्रहण लग गया था। पिछले दो वर्षों से शिवबाड़ी मेला भी कोरोना की काली छाया में कहीं छिप गया था। बैसाखी से दूसरे शनिवार को यह मेला सजता है। जिसमें दूर-दूर से आए व्यापारी अपनी रंग-बिरंगी दुकानें सजा कर मेले की शोभा बढ़ाते हैं। दो वर्षों बाद सजने वाले इस मेले का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बार कोरोना का काला साया न होने से मेला लगना लगभग तय है। पुरातन काल से इस मेले को लेकर बहुत सी पौराणिक गाथाएं जुड़ी हैं।
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एक मान्यता के अनुसार इस दो दिवसीय शिवबाड़ी मेले में भगवान शिव स्वयं मंदिर परिसर में उपस्थित होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। दो दिवसीय इस मेले में पड़ोसी राज्य पंजाब सहित दूर-दूर से शिव भक्त आकर भगवान भोले की सच्चे मन से भक्ति कर आशीर्वाद प्राप्त कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं गुरु द्रोणाचार्य की पुत्री ययाति को वर्ष में एक बार यानी बैसाखी के दूसरे शनिवार शिवबाड़ी में स्वयं उपस्थित होने का वचन दिया था।
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उधर, मंदिर के पुजारी अजय शर्मा और अश्वनी के अनुसार कोरोना के चलते दो वर्ष तक मेला नहीं हो पाया, परंतु इस वर्ष मेले में शिवभक्त एकत्रित होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।