{"_id":"67fbce253180a2128e015d2c","slug":"selling-potato-crop-after-spending-lakhs-is-a-challenge-una-news-c-93-1-ssml1048-151202-2025-04-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: लाखों खर्च के बाद आलू की फसल बेचना चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: लाखों खर्च के बाद आलू की फसल बेचना चुनौती
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेतों और मंडी में नहीं मिल रहे फसल के खरीदार
किसानों ने कहा, फसल की लागत भी नहीं आई वापस
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने वाली आलू की फसल इस बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसानों को न खेतों में खरीदार मिल रहे और न मंडियों में। अगर कोई फसल खरीदने पहुंच रहा है तो दाम इतने कम दिए जा रहे कि किसान बिक्री से बेहतर विकल्प फसल को सड़क पर फेंकना मान रहे। लाखों रुपये की लागत से चार माह तक कड़ी मेहनत से तैयार की इस फसल से किसानों की लागत भी नहीं लौट रही।जानकारी के मुताबिक आलू की फसल को मंडियों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक कीमत मिल रही है। इसके लिए भी किसानों को एक से दो दिन मंडी में जूझना पड़ रहा। वहीं, जो व्यापारी फसल को खेत में खरीदने पहुंच रहे, वह 400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल तक कीमत चुका रहे। किसानों का तर्क है कि इतनी कम कीमत और घाटे पर फसल बेचने से बेहतर है इसे सड़कों पर फेंक दें। किसानों में विनोद कुमार, देसराज, रविंद्र कुमार, प्रेम चंद, सुरेंद्र कुमार, अश्विनी ने कहा कि इस बार उन्हें उम्मीद थी कि फसल के दाम अच्छे रहेंगे। नवंबर में बेची दो माह वाली आलू की फसल को अच्छी कीमत मिली थी। वर्तमान में आलू की मंडियों में अच्छी खासी उपलब्धता है। बड़े कोल्ड स्टोरों से आपूर्ति पहुंच रही है। ऐसे में आलू की अधिक मांग नहीं है। इसका सीधा असर कीमत पर पड़ा है।
बॉक्स
गेहूं की फसल साबित हुई बेहतर विकल्प
उधर, जिन किसानों ने सिंचित इलाकों में आलू के स्थान पर गेहूं की फसल लगाई, वे राहत की सांस ले रहे हैं। किसानों को 2500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दाम मिल रहे हैं, जो आलू से 2000 रुपये प्रति क्विंटल अधिक हैं। ऐसे में किसानों के बीच चर्चा है कि इस बार गेहूं उगा लेते तो बेहतर होता। दरअसल इस वर्ष गेहूं की फसल गैर सिंचित इलाकों में प्रभावित हुई है। मंडियों में फसल की मांग अधिक है।
-- -
कृषि उपनिदेशक डॉ कुलभूषण धीमान ने बताया कि चार माह वाली आलू की फसल की पैदावार 12 से 15 क्विंटल प्रति कनाल रहती है। ऐसे में अगर कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल रहे, तब भी किसानों को लाभ होता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फसल की कीमत बढ़ेगी। जिससे किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों ने कहा, फसल की लागत भी नहीं आई वापस
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने वाली आलू की फसल इस बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसानों को न खेतों में खरीदार मिल रहे और न मंडियों में। अगर कोई फसल खरीदने पहुंच रहा है तो दाम इतने कम दिए जा रहे कि किसान बिक्री से बेहतर विकल्प फसल को सड़क पर फेंकना मान रहे। लाखों रुपये की लागत से चार माह तक कड़ी मेहनत से तैयार की इस फसल से किसानों की लागत भी नहीं लौट रही।जानकारी के मुताबिक आलू की फसल को मंडियों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक कीमत मिल रही है। इसके लिए भी किसानों को एक से दो दिन मंडी में जूझना पड़ रहा। वहीं, जो व्यापारी फसल को खेत में खरीदने पहुंच रहे, वह 400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल तक कीमत चुका रहे। किसानों का तर्क है कि इतनी कम कीमत और घाटे पर फसल बेचने से बेहतर है इसे सड़कों पर फेंक दें। किसानों में विनोद कुमार, देसराज, रविंद्र कुमार, प्रेम चंद, सुरेंद्र कुमार, अश्विनी ने कहा कि इस बार उन्हें उम्मीद थी कि फसल के दाम अच्छे रहेंगे। नवंबर में बेची दो माह वाली आलू की फसल को अच्छी कीमत मिली थी। वर्तमान में आलू की मंडियों में अच्छी खासी उपलब्धता है। बड़े कोल्ड स्टोरों से आपूर्ति पहुंच रही है। ऐसे में आलू की अधिक मांग नहीं है। इसका सीधा असर कीमत पर पड़ा है।
बॉक्स
गेहूं की फसल साबित हुई बेहतर विकल्प
उधर, जिन किसानों ने सिंचित इलाकों में आलू के स्थान पर गेहूं की फसल लगाई, वे राहत की सांस ले रहे हैं। किसानों को 2500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दाम मिल रहे हैं, जो आलू से 2000 रुपये प्रति क्विंटल अधिक हैं। ऐसे में किसानों के बीच चर्चा है कि इस बार गेहूं उगा लेते तो बेहतर होता। दरअसल इस वर्ष गेहूं की फसल गैर सिंचित इलाकों में प्रभावित हुई है। मंडियों में फसल की मांग अधिक है।
विज्ञापन
कृषि उपनिदेशक डॉ कुलभूषण धीमान ने बताया कि चार माह वाली आलू की फसल की पैदावार 12 से 15 क्विंटल प्रति कनाल रहती है। ऐसे में अगर कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल रहे, तब भी किसानों को लाभ होता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फसल की कीमत बढ़ेगी। जिससे किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
विज्ञापन