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शव यात्रा निकालने पर अनुसूचित जाति संगठनों में रोष
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ऊना में रोष रैली निकालते हुए विभिन्न अनुसूचित जति संगठनों के पद्याधिकारी
- फोटो : Una
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ऊना। विभिन्न अनुसूचित जाति संगठनों ने राजधानी शिमला में सवर्ण संगठनों की ओर से संविधान में निहित अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम एक्ट और आरक्षण की शवयात्रा निकालने का कड़ा विरोध किया है। बुधवार को एमसी पार्क ऊना से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रोष रैली निकाली।
बाद में डीसी राघव शर्मा के माध्यम से राष्ट्रपति, पीएम, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा।
गुस्साए अनुसूचित जाति संगठनों में श्री गुरु रविदास महासभा जिला ऊना, महर्षि वाल्मीकि युवा एकता महासभा, श्री गुरु रविदास साधु संप्रदाय हिमाचल प्रदेश, राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार एवं राष्ट्रीय दलित न्याय आंदोलन और भीम आर्मी जिला ऊना सहित आधा दर्जन से ज्यादा आंबेडकर युवा संगठनों ने शव यात्रा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है।
संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों में अधिवक्ता नरेश कुमार सैंसोवाल, संत रविंद्र दास, अमित दोधी और रवि बस्सी ने बताया कि शिमला में सवर्ण जाति के लोगों ने बिना कुछ सोचे-समझे प्रदेश में भाईचारे को समाप्त करने की नींव रखी है। अनुसूचित जाति/ जनजाति अधिनियम एक्ट और आरक्षण की शव यात्रा शुरू की है, जो सांविधानिक अधिकारों के हनन की कोशिश है। यह अधिकार अनुसूचित जाति को कानूनन मिले हैं।
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अगर किसी के साथ हुए अन्याय के लिए कानून है तो किसी भी धारा या अधिनियम के झूठे उपयोग पर भी कानून है, वह उनका सहारा ले सकता है। अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम और आरक्षण आरक्षण की शव यात्रा से अनुसूचित जाति समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जिन सवर्ण संगठनों और लोगों ने संविधान में निहित अधिकारियों की शव यात्रा निकालने का घटिया काम किया है, उनके खिलाफ देशद्रोह और समाज के भाईचारे में अराजकता फैलाने की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाएं। तत्काल प्रभाव से शव यात्रा पर रोक लगाकर इसे निकालने वालों को गिरफ्तार किया जाए।
अगर ऐसा नहीं होता है तो अनुसूचित जाति समाज पूरे प्रदेश और भारत में रोष प्रदर्शन करेगी। कहा कि रोष स्वरूप मुख्यमंत्री के 19 नवंबर को ऊना आगमन पर उन्हें काले झंडे दिखाकर रोष जताया जाएगा। अन्यथा इससे पहले पहले सरकार और प्रशासन शव यात्रा को बंद कराए।
रोष प्रदर्शन में एनडीएमजे के राज्य महासचिव राज कुमार, संत कमलजीत सिंह, संतराम सिंह, संत जगन्नाथ, बलदेव सरोआ, हरिचंद संधू, कमलेश, सन्नी, रमन, वरिंद्र, गोलू बैंस, राजीव, रजत, गैरी, विशाल, संजय, मनु, निंजा, करण, शिव कुमार आदि मौजूद रहे।
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बाद में डीसी राघव शर्मा के माध्यम से राष्ट्रपति, पीएम, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा।
गुस्साए अनुसूचित जाति संगठनों में श्री गुरु रविदास महासभा जिला ऊना, महर्षि वाल्मीकि युवा एकता महासभा, श्री गुरु रविदास साधु संप्रदाय हिमाचल प्रदेश, राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार एवं राष्ट्रीय दलित न्याय आंदोलन और भीम आर्मी जिला ऊना सहित आधा दर्जन से ज्यादा आंबेडकर युवा संगठनों ने शव यात्रा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है।
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संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों में अधिवक्ता नरेश कुमार सैंसोवाल, संत रविंद्र दास, अमित दोधी और रवि बस्सी ने बताया कि शिमला में सवर्ण जाति के लोगों ने बिना कुछ सोचे-समझे प्रदेश में भाईचारे को समाप्त करने की नींव रखी है। अनुसूचित जाति/ जनजाति अधिनियम एक्ट और आरक्षण की शव यात्रा शुरू की है, जो सांविधानिक अधिकारों के हनन की कोशिश है। यह अधिकार अनुसूचित जाति को कानूनन मिले हैं।
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अगर किसी के साथ हुए अन्याय के लिए कानून है तो किसी भी धारा या अधिनियम के झूठे उपयोग पर भी कानून है, वह उनका सहारा ले सकता है। अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम और आरक्षण आरक्षण की शव यात्रा से अनुसूचित जाति समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जिन सवर्ण संगठनों और लोगों ने संविधान में निहित अधिकारियों की शव यात्रा निकालने का घटिया काम किया है, उनके खिलाफ देशद्रोह और समाज के भाईचारे में अराजकता फैलाने की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाएं। तत्काल प्रभाव से शव यात्रा पर रोक लगाकर इसे निकालने वालों को गिरफ्तार किया जाए।
अगर ऐसा नहीं होता है तो अनुसूचित जाति समाज पूरे प्रदेश और भारत में रोष प्रदर्शन करेगी। कहा कि रोष स्वरूप मुख्यमंत्री के 19 नवंबर को ऊना आगमन पर उन्हें काले झंडे दिखाकर रोष जताया जाएगा। अन्यथा इससे पहले पहले सरकार और प्रशासन शव यात्रा को बंद कराए।
रोष प्रदर्शन में एनडीएमजे के राज्य महासचिव राज कुमार, संत कमलजीत सिंह, संतराम सिंह, संत जगन्नाथ, बलदेव सरोआ, हरिचंद संधू, कमलेश, सन्नी, रमन, वरिंद्र, गोलू बैंस, राजीव, रजत, गैरी, विशाल, संजय, मनु, निंजा, करण, शिव कुमार आदि मौजूद रहे।