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Una News: अमलैहड़ आश्रम में मनाया संक्रांति पर्व, श्रद्धालुओं ने अखंड धूने में नवाया शीश
Mon, 16 Dec 2024 05:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 16 Dec 2024 05:35 PM IST
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आचार्य हेमानंद महाराज ने की कार्यक्रम में शिरकत
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। डेरा बाबा अच्युतानंद आश्रम अमलैहड़ में संक्रांति का पर्व मनाया गया। इस मौके पर सुबह से ही श्रद्धालुओं ने लाइनों में कतारबद्ध खड़े होकर अखंड धूने पर शीश नवाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आचार्य हेमानंद का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य हेमानंद ने प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि ईश्वर के साक्षात्कार के लिए गुरु का सानिध्य आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा हो तो संसार की सभी व्याधियां दूर हो जाती हैं। ईश्वर की विशेष कृपा बरसने लगती है क्योंकि गुरु को सदैव इस बात का अहसास होता है कि उसका शिष्य किस प्रकार से भक्ति को ग्रहण कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में सबकुछ है। सुख और दुख दोनों के जिम्मेदार हम स्वयं हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अच्छा कर्म होगा तो परिणाम अच्छा आएगा, बुरा कर्म होगा तो परिणाम भी बुरा आएगा। आचार्य हेमानंद ने अन्नपूर्णा से जुड़ी एक पौराणिक कथा सुनाते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अन्न और जल की कमी हो गई थी। तब लोगों ने ब्रह्मा और विष्णु से प्रार्थना की। इसके बाद ब्रह्मा और विष्णु ने शिव को योग निद्रा से जगाया और उन्हें समस्या के बारे में बताया।
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इस समस्या के समाधान के लिए शिव ने पृथ्वी का निरीक्षण किया। इसके बाद माता पार्वती ने अन्नपूर्णा का रूप लिया और पृथ्वी पर प्रकट हुईं। इसके बाद शिव ने भिक्षुक का रूप धारण किया और अन्नपूर्णा देवी से भीक्षा मांगी। भिक्षुक ने भीक्षा में अन्न मांगा और उसे भूखे लोगों के बीच में बांट दिया। इस तरह से पृथ्वी पर अन्न और जल का संकट खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से ही हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को अन्नपूर्णा मनाई जाती है। इस मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। डेरा बाबा अच्युतानंद आश्रम अमलैहड़ में संक्रांति का पर्व मनाया गया। इस मौके पर सुबह से ही श्रद्धालुओं ने लाइनों में कतारबद्ध खड़े होकर अखंड धूने पर शीश नवाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आचार्य हेमानंद का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य हेमानंद ने प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि ईश्वर के साक्षात्कार के लिए गुरु का सानिध्य आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा हो तो संसार की सभी व्याधियां दूर हो जाती हैं। ईश्वर की विशेष कृपा बरसने लगती है क्योंकि गुरु को सदैव इस बात का अहसास होता है कि उसका शिष्य किस प्रकार से भक्ति को ग्रहण कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में सबकुछ है। सुख और दुख दोनों के जिम्मेदार हम स्वयं हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर अच्छा कर्म होगा तो परिणाम अच्छा आएगा, बुरा कर्म होगा तो परिणाम भी बुरा आएगा। आचार्य हेमानंद ने अन्नपूर्णा से जुड़ी एक पौराणिक कथा सुनाते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अन्न और जल की कमी हो गई थी। तब लोगों ने ब्रह्मा और विष्णु से प्रार्थना की। इसके बाद ब्रह्मा और विष्णु ने शिव को योग निद्रा से जगाया और उन्हें समस्या के बारे में बताया।
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इस समस्या के समाधान के लिए शिव ने पृथ्वी का निरीक्षण किया। इसके बाद माता पार्वती ने अन्नपूर्णा का रूप लिया और पृथ्वी पर प्रकट हुईं। इसके बाद शिव ने भिक्षुक का रूप धारण किया और अन्नपूर्णा देवी से भीक्षा मांगी। भिक्षुक ने भीक्षा में अन्न मांगा और उसे भूखे लोगों के बीच में बांट दिया। इस तरह से पृथ्वी पर अन्न और जल का संकट खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से ही हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को अन्नपूर्णा मनाई जाती है। इस मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।