{"_id":"61b8e2b4eb0035345f30ca77","slug":"rallay-in-shimla-una-news-sml3934355179","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामान्य वर्ग आयोग के खिलाफ 27 दिसंबर को ऊना में रोष रैली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामान्य वर्ग आयोग के खिलाफ 27 दिसंबर को ऊना में रोष रैली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऊना में संयुक्त अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में लिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। राज्य में सामान्य आयोग के गठन की घोषणा के बाद अब इसका विरोध में आवाज उठने लगी है। मंगलवार को जिला मुख्यालय के रेस्ट हाउस में संयुक्त अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में सामान्य आयोग के गठन के विरोध में 27 दिसंबर को रोष रैली निकालने का फैसला लिया गया। बैठक में दलित नेता रविकांत बस्सी ने कहा कि सरकार दलित समुदाय को गुमराह कर रही है। सामान्य आयोग के गठन को लेकर पहले से ही रणनीति तय थी। संविधान के तहत ही आरक्षण का प्रावधान किया गया। कुछ लोगों ने आरक्षण की शवयात्रा निकालकर संविधान का अपमान किया। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन ने इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अब दलित समुदाय के लोग संविधान के इस अपमान का बदला रोष रैली से लेकर रहेंगे। अगर इस आयोग को रद्द न किया गया तो आने वाले विधानसभा चुनावों में मौजूदा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा। राज्य के 25 फीसदी दलित एकजुट होकर भाजपा को सत्ता से बेदखल करेंगे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। राज्य में सामान्य आयोग के गठन की घोषणा के बाद अब इसका विरोध में आवाज उठने लगी है। मंगलवार को जिला मुख्यालय के रेस्ट हाउस में संयुक्त अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में सामान्य आयोग के गठन के विरोध में 27 दिसंबर को रोष रैली निकालने का फैसला लिया गया। बैठक में दलित नेता रविकांत बस्सी ने कहा कि सरकार दलित समुदाय को गुमराह कर रही है। सामान्य आयोग के गठन को लेकर पहले से ही रणनीति तय थी। संविधान के तहत ही आरक्षण का प्रावधान किया गया। कुछ लोगों ने आरक्षण की शवयात्रा निकालकर संविधान का अपमान किया। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन ने इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अब दलित समुदाय के लोग संविधान के इस अपमान का बदला रोष रैली से लेकर रहेंगे। अगर इस आयोग को रद्द न किया गया तो आने वाले विधानसभा चुनावों में मौजूदा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा। राज्य के 25 फीसदी दलित एकजुट होकर भाजपा को सत्ता से बेदखल करेंगे।