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Una News: बारिश ने 375 हेक्टेयर क्षेत्र में तबाह कर दी मक्की की फसल
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बंगाणा मक्की के खेत में भरा पानी। संवाद
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किसानों को बारिश की तबाही से हुआ 80 लाख का नुकसान
प्रभावित किसान नुकसान की रिपोर्ट राजस्व विभाग से बनाकर रखें : विभाग
बंगाणा और चिंतपूर्णी कम, मैदानी एरिया हुआ ज्यादा प्रभावित
मौसम साफ होते ही किसान खेतों में पानी की निकासी में जुटे
मक्की सहित मौसमी फसलें तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में भारी बारिश के कहर ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण लगभग 375 हेक्टेयर क्षेत्र में खेतों में पानी भर गया है, जिससे मक्की सहित अन्य मौसमी फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। कृषि विभाग ने इससे करीब 80 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। वर्तमान में जिले में लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की बुवाई की जाती है, लेकिन इस बार मानसून की भारी बारिश ने किसानों पर कहर ढा दिया है। खेतों में मक्की की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। हालांकि, ऊना जिले के बंगाणा और चिंतपूर्णी क्षेत्रों में फसल को कम नुकसान पहुंचा है, लेकिन अन्य मैदानी इलाकों में किसानों की फसलें भारी मात्रा में प्रभावित हुई हैं। कृषि विभाग के अधिकारी व फील्ड टीमें नुकसान का जायजा लेने के लिए खेतों में पहुंच गई हैं। किसान भी मौसम साफ होते ही खेतों से पानी निकालने में जुट गए हैं, लेकिन बारिश का प्रभाव इतना गंभीर रहा है कि फसल के दोबारा खड़े होने की कोई संभावना नहीं बची है। मक्की की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। कृषि विभाग
ऊना के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान के अनुसार जिले में 375 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की समेत अन्य मौसमी फसलें तबाह हो चुकी हैं, जिससे करीब 80 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है। उन्होंने प्रभावित किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने क्षेत्रों में नष्ट हुई फसलों का विवरण तैयार करें और राजस्व विभाग के अधिकारियों से प्रमाण पत्र अवश्य लें। प्रभावित क्षेत्र, फसल का प्रकार और नुकसान का पूरा ब्योरा दस्तावेजों में दर्शाएं। जैसे ही प्रशासन और सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी होंगे तो चरणबद्ध तरीके से मुआवजा वितरित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में किसी भी किसान को मुआवजे से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए जरूरी है कि किसान समय रहते राजस्व विभाग की औपचारिकताएं पूरी कर लें और प्रमाण पत्र अपने पास सुरक्षित रखें।
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प्रभावित किसान नुकसान की रिपोर्ट राजस्व विभाग से बनाकर रखें : विभाग
बंगाणा और चिंतपूर्णी कम, मैदानी एरिया हुआ ज्यादा प्रभावित
मौसम साफ होते ही किसान खेतों में पानी की निकासी में जुटे
मक्की सहित मौसमी फसलें तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में भारी बारिश के कहर ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण लगभग 375 हेक्टेयर क्षेत्र में खेतों में पानी भर गया है, जिससे मक्की सहित अन्य मौसमी फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। कृषि विभाग ने इससे करीब 80 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। वर्तमान में जिले में लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की बुवाई की जाती है, लेकिन इस बार मानसून की भारी बारिश ने किसानों पर कहर ढा दिया है। खेतों में मक्की की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। हालांकि, ऊना जिले के बंगाणा और चिंतपूर्णी क्षेत्रों में फसल को कम नुकसान पहुंचा है, लेकिन अन्य मैदानी इलाकों में किसानों की फसलें भारी मात्रा में प्रभावित हुई हैं। कृषि विभाग के अधिकारी व फील्ड टीमें नुकसान का जायजा लेने के लिए खेतों में पहुंच गई हैं। किसान भी मौसम साफ होते ही खेतों से पानी निकालने में जुट गए हैं, लेकिन बारिश का प्रभाव इतना गंभीर रहा है कि फसल के दोबारा खड़े होने की कोई संभावना नहीं बची है। मक्की की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। कृषि विभाग
ऊना के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान के अनुसार जिले में 375 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की समेत अन्य मौसमी फसलें तबाह हो चुकी हैं, जिससे करीब 80 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है। उन्होंने प्रभावित किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने क्षेत्रों में नष्ट हुई फसलों का विवरण तैयार करें और राजस्व विभाग के अधिकारियों से प्रमाण पत्र अवश्य लें। प्रभावित क्षेत्र, फसल का प्रकार और नुकसान का पूरा ब्योरा दस्तावेजों में दर्शाएं। जैसे ही प्रशासन और सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी होंगे तो चरणबद्ध तरीके से मुआवजा वितरित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में किसी भी किसान को मुआवजे से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए जरूरी है कि किसान समय रहते राजस्व विभाग की औपचारिकताएं पूरी कर लें और प्रमाण पत्र अपने पास सुरक्षित रखें।
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