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Una News: प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई पर उठे सवाल
Mon, 02 Nov 2026 04:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 02 Nov 2026 04:04 PM IST
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नारी (ऊना)। जिले की प्राथमिक पाठशालाओं में नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक सभी विषय अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाए जा रहे हैं। वहीं, छठी कक्षा से हिंदी और अंग्रेजी में से किसी एक माध्यम को चुनने का विकल्प दिया जा रहा है। इस व्यवस्था पर प्राथमिक शिक्षकों और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में एक शिक्षक के जिम्मे कई कक्षाएं होने के बावजूद सभी विषय अंग्रेजी में पढ़ाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने प्राथमिक कक्षाओं में भी हिंदी माध्यम का विकल्प देने की मांग की है।
प्राथमिक पाठशालाओं में नर्सरी से पांचवीं तक आठ कक्षाएं संचालित होती हैं। इनमें सभी विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जा रहे हैं। प्रत्येक कक्षा में चार-चार विषय हैं। ईवीएस में विज्ञान विषय भी शामिल है, जिसे अंग्रेजी में पढ़ाया जा रहा है। शिक्षकों के अनुसार कई स्कूलों में एक ही शिक्षक आठ कक्षाओं को पढ़ा रहा है जबकि कुछ में दो शिक्षक तैनात हैं। ऐसे में बच्चों को विषयों की बुनियादी समझ विकसित करवाना मुश्किल हो रहा है।
अभिभावक राम कुमार, सुशील कुमार, सतपाल, वीरेंद्र कुमार, अश्विनी कुमार और रामा देवी का कहना है कि यदि नर्सरी से पांचवीं तक अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य है तो छठी कक्षा से हिंदी का विकल्प देना उचित नहीं है। छोटे बच्चों को हिंदी और स्थानीय भाषा में समझाना अधिक सहज होता है। कई बार शिक्षक स्थानीय भाषा का सहारा लेकर बच्चों तक विषय की वास्तविक जानकारी पहुंचाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई चौथी कक्षा से शुरू की जाए ताकि बच्चे पहले बुनियादी अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ऊना के अध्यक्ष संदेश कुमार का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाने के लिए सरकार को प्रत्येक कक्षा के लिए एक शिक्षक नियुक्त करना चाहिए। विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए ताकि बच्चों को विषय की मूल अवधारणाएं स्पष्ट हो सकें। इसके अलावा, स्कूलों में बार-बार विभिन्न सूचनाएं मांगे जाने से भी शिक्षकों का पढ़ाई के प्रति समय प्रभावित होता है।
शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक सोमलाल धीमान ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला संज्ञान में है। वर्तमान समय में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराना आवश्यक है। फिर भी इस विषय पर विचार कर उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया जाएगा।
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प्राथमिक पाठशालाओं में नर्सरी से पांचवीं तक आठ कक्षाएं संचालित होती हैं। इनमें सभी विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जा रहे हैं। प्रत्येक कक्षा में चार-चार विषय हैं। ईवीएस में विज्ञान विषय भी शामिल है, जिसे अंग्रेजी में पढ़ाया जा रहा है। शिक्षकों के अनुसार कई स्कूलों में एक ही शिक्षक आठ कक्षाओं को पढ़ा रहा है जबकि कुछ में दो शिक्षक तैनात हैं। ऐसे में बच्चों को विषयों की बुनियादी समझ विकसित करवाना मुश्किल हो रहा है।
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अभिभावक राम कुमार, सुशील कुमार, सतपाल, वीरेंद्र कुमार, अश्विनी कुमार और रामा देवी का कहना है कि यदि नर्सरी से पांचवीं तक अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य है तो छठी कक्षा से हिंदी का विकल्प देना उचित नहीं है। छोटे बच्चों को हिंदी और स्थानीय भाषा में समझाना अधिक सहज होता है। कई बार शिक्षक स्थानीय भाषा का सहारा लेकर बच्चों तक विषय की वास्तविक जानकारी पहुंचाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई चौथी कक्षा से शुरू की जाए ताकि बच्चे पहले बुनियादी अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ऊना के अध्यक्ष संदेश कुमार का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाने के लिए सरकार को प्रत्येक कक्षा के लिए एक शिक्षक नियुक्त करना चाहिए। विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए ताकि बच्चों को विषय की मूल अवधारणाएं स्पष्ट हो सकें। इसके अलावा, स्कूलों में बार-बार विभिन्न सूचनाएं मांगे जाने से भी शिक्षकों का पढ़ाई के प्रति समय प्रभावित होता है।
शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक सोमलाल धीमान ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला संज्ञान में है। वर्तमान समय में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराना आवश्यक है। फिर भी इस विषय पर विचार कर उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया जाएगा।