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Una News: प्रमोशन के तीन माह बाद भी प्रधानाचार्यों को नहीं मिले स्टेशन
Sun, 29 Mar 2026 01:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:16 AM IST
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दौलतपुर चौक (ऊना)। शिक्षा विभाग द्वारा दिसंबर माह के अंत में पदोन्नत किए गए प्रधानाचार्यों को अभी तक स्टेशन आवंटित न होने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ (एचपीएसएलए) ऊना के अध्यक्ष शशि सैनी एवं महासचिव संजीव कुमार ने बताया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने में मात्र तीन दिन शेष रह गए। इसके बावजूद तैनाती न होने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। एडमिशन का दौर शुरू होने वाला है। दाखिला प्रक्रिया के शुरुआती दौर में अगर प्रधानाचार्य की सहभागिता नहीं होगी तो स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कैसे बढ़ेगी। संघ ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू व शिक्षा मंत्री से शीघ्र हस्तक्षेप कर प्रधानाचार्यों को तुरंत स्टेशन आवंटित करने की मांग उठाई है।
इसी के साथ संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन से तीन प्रतिशत राशि काटने करने के निर्णय के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। संघ ने इस फैसले को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए कहा कि यह न तो तर्कसंगत है और न ही व्यावहारिक। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से कर्मचारियों की कई वित्तीय देनदारियां लंबित हैं लेकिन सरकार उन्हें जारी करने के बजाय मौजूदा वेतन में ही कटौती कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। प्रवक्ता संघ के अनुसार वर्तमान महंगाई के दौर में कर्मचारियों का घरेलू बजट पहले ही असंतुलित हो चुका है, ऐसे में तीन प्रतिशत कटौती आर्थिक संकट को और गहरा कर देगी।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि मध्य वर्गीय कर्मचारियों पर ईएमआई, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य पारिवारिक खर्चों का भारी बोझ है। ऐसे में वेतन में कटौती बड़ा झटका साबित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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क्या है पूरा मामला
प्रदेश सरकार ने छह माह के लिए ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से कर्मचारी वर्ग प्रभावित होगा। प्रवक्ता संघ ने इसे कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि लंबित देनदारियों के बीच इस तरह की कटौती करना गलत है। साथ ही महंगाई भत्ते की किस्त जारी न होने और पदोन्नति के तीन माह बाद भी प्रधानाचार्यों को स्टेशन अलॉट न होने पर कड़ी नाराजगी जताई गई है।
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इसी के साथ संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन से तीन प्रतिशत राशि काटने करने के निर्णय के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। संघ ने इस फैसले को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए कहा कि यह न तो तर्कसंगत है और न ही व्यावहारिक। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से कर्मचारियों की कई वित्तीय देनदारियां लंबित हैं लेकिन सरकार उन्हें जारी करने के बजाय मौजूदा वेतन में ही कटौती कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। प्रवक्ता संघ के अनुसार वर्तमान महंगाई के दौर में कर्मचारियों का घरेलू बजट पहले ही असंतुलित हो चुका है, ऐसे में तीन प्रतिशत कटौती आर्थिक संकट को और गहरा कर देगी।
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संघ पदाधिकारियों ने कहा कि मध्य वर्गीय कर्मचारियों पर ईएमआई, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य पारिवारिक खर्चों का भारी बोझ है। ऐसे में वेतन में कटौती बड़ा झटका साबित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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क्या है पूरा मामला
प्रदेश सरकार ने छह माह के लिए ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से कर्मचारी वर्ग प्रभावित होगा। प्रवक्ता संघ ने इसे कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि लंबित देनदारियों के बीच इस तरह की कटौती करना गलत है। साथ ही महंगाई भत्ते की किस्त जारी न होने और पदोन्नति के तीन माह बाद भी प्रधानाचार्यों को स्टेशन अलॉट न होने पर कड़ी नाराजगी जताई गई है।