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Una News: बारिश न होने से घटी आलू की पैदावार, किसान हताश

Fri, 22 Nov 2024 05:46 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2024 05:46 PM IST
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Potato yield decreased due to lack of rain, farmers frustrated
आलू अभियान
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फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान कर रहे इंतजार
किसानों ने कहा, मौसम की यही स्थिति रही तो फसल की बिजाई में होगी देरी
देरी से बिजाई करने पर गेहूं की फसल नहीं लगा पाएंगे

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले में इस बार आलू की फसल को अच्छे दाम मिल रहे हैं लेकिन कम पैदावार ने किसानों से अधिक लाभ कमाने का सुनहरा अवसर छीन लिया। इस बार आलू की प्रति कनाल औसत पैदावार पांच क्विंटल के आसपास है। जबकि, आमतौर पर एक कनाल जमीन पर आठ से दस क्विंटल आलू की पैदावार होती है।
जानकारी के अनुसार आलू की कम पैदावार के लिए किसान सर्दी का देरी से आना मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि आलू की फसल सर्द मौसम में तेजी से तैयार होती है। पहले जहां सितंबर के आगमन में सुबह और शाम को हल्की सर्दी होती थी। इस बार अक्तूबर माह के अंतिम दिनों तक दिन में तीखी धूप का सिलसिला बरकरार रहा। इस बीच कोई बारिश भी नहीं हुई। इससे आलू की फसल को सिंचाई के जोर पर तैयार करना पड़ा। बारिश न होने और सर्दी का आगमन देरी से होने पर आलू की पैदावार गिर गई। इस बार प्रति क्विंटल आलू की कीमत 2500 रुपये के इर्द-गिर्द घूम रही है। किसानों की मानें तो फसल के लिए यह अच्छी कीमत है। कम पैदावार ने लाभ के अंतर को कम कर दिया है। अगर पहले जितनी पैदावार होती तो अच्छा लाभ कमा पाते।
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किसान राकेश कुमार ने बताया कि कई किसानों ने आलू निकालने के निर्धारित समय से 10 दिन बाद फसल मंडियों में पहुंचाई है। वर्तमान समय आलू की वृद्धि के लिए अच्छा है। जबकि दाम स्थिर हैं। कुछ दिन के इंतजार से फसल की पैदावार अच्छी हो सकती है लेकिन गेहूं फसल की बिजाई भी करनी है। इसे ध्यान में रखकर दो चार दिन में खेतों से आलू निकालने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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किसान रोहित कुमार ने कहा कि बड़े किसानों को फसल की पटाई देरी से करने में कोई हानि नहीं होती। उन्हें दोबारा दिसंबर में आलू की बिजाई करनी होती है। लेकिन, छोटे किसान गेहूं की बिजाई करते हैं। जो नवंबर माह के भीतर करनी होती है। इसलिए आलू को मध्य नवंबर तक खेतों से निकालना होता है। कहा कि कुछ दिन में पंजाब और उत्तर प्रदेश का आलू भी मंडियों से पहुंचने लगेगा। इससे दाम भी गिर सकते हैं। वर्तमान समय आलू को मंडियों में पहुंचना के लिए उचित है।

मौसम विशेषज्ञ विनोद शर्मा ने बताया कि ढाई माह से अच्छी बारिश नहीं हुई है। इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ता है। आने वाले कुछ दिन और बारिश नहीं होगी। इसके लिए आमजन को तैयार रहना होगा।

आलू की फसल सर्दी में अच्छी वृद्धि करती है। इस वजह से किसान इसे सर्दी में ही तैयार करते हैं। दो माह वाली फसल सितंबर से नवंबर के मध्य और चार माह वाली दिसंबर या जनवरी से अप्रैल माह के मध्य तैयार होती है। हालांकि, मौसम में होने वाले बदलाव का सीधा असर फसलों पर होता है। शायद यही कारण है कि इस बार आलू की पैदावार कम हुई है।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।
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