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Una News: आलू की बिजाई शुरू, सता रही बारिश की चिंता
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मैदानी इलाकों में 3,000 हेक्टेयर जमीन पर होती है खेती
दो माह में तैयार होती है फसल, मंडियों में मिलते हैं चोखे भाव
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मौसम कुछ साफ होने के बाद आलू की बिजाई शुरू हो चुकी है। किसानों ने बीते रविवार दोपहर बाद से आलू की बिजाई शुरू कर दी। खेतों में इस समय बिजाई के लिए उपयुक्त नमी है। हालांकि, किसानों को यह भी चिंता सता रही है कि कहीं बिजाई के बाद बारिश न हो जाए। दो माह में तैयार होने वाली फसल जिले के करीब 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार होगी। इसकी अधिकतर बिजाई सोमभद्रा नदी के आसपास के इलाकों में की जाती है। इसके लिए सिंचाई सुविधा का होना बेहद महत्वपूर्ण है। यह फसल 60 से 65 दिन बाद खेतों से निकालकर मंडियों में पहुंचाई जाती है। खास बात यह भी है कि ऊना में उगाया जाने वाला आलू नई फसल के रूप में सबसे पहले मंडियों में पहुंचता है। इसके बाद पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आलू की आपूर्ति आती है। सबसे पहले बाजार में उपलब्ध होने से इसके भाव अच्छे मिल जाते हैं। पंजाब और उत्तर प्रदेश से आलू की खेप आने पर दाम गिरने लगते हैं। यही कारण है कि किसान इसकी बिजाई समय से करना चाहते हैं।
बिजाई में मौसम का महत्व
किसान सरवण कुमार, जतिंद्र कुमार, रामपाल, देसराज आदि ने कहा कि आलू की बिजाई के तुरंत बाद अगर बारिश हो जाए तो बीज अच्छे से अंकुरित नहीं हो पाता। अत्यधिक बारिश भी आलू के लिए नुकसानदायक है लेकिन कई दिन से मौसम पूरी तरह साफ नहीं हो पाया। अब बादलों के बीच ही बिजाई करनी शुरू कर दी है। इस समय आलू के बीज के दाम 2,300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे हैं। किसान इस बीज को जालंधर सहित अन्य जिलों से खरीदकर लाते हैं। बिजाई से पहले आलू की छंटाई की जाती है जिससे सड़न वाले बीज को अलग कर दिया जाए।
Iजिले में आलू की बिजाई हो रही है। यहां के किसानों को आलू की फसल को लेकर अच्छी समझ है। यही कारण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यह फसल अच्छे से तैयार होती है। मौसम से जुड़ी चुनौतियों में फसल के बचाव को लेकर किसान कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श जरूर लें। -Iडॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।
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दो माह में तैयार होती है फसल, मंडियों में मिलते हैं चोखे भाव
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मौसम कुछ साफ होने के बाद आलू की बिजाई शुरू हो चुकी है। किसानों ने बीते रविवार दोपहर बाद से आलू की बिजाई शुरू कर दी। खेतों में इस समय बिजाई के लिए उपयुक्त नमी है। हालांकि, किसानों को यह भी चिंता सता रही है कि कहीं बिजाई के बाद बारिश न हो जाए। दो माह में तैयार होने वाली फसल जिले के करीब 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार होगी। इसकी अधिकतर बिजाई सोमभद्रा नदी के आसपास के इलाकों में की जाती है। इसके लिए सिंचाई सुविधा का होना बेहद महत्वपूर्ण है। यह फसल 60 से 65 दिन बाद खेतों से निकालकर मंडियों में पहुंचाई जाती है। खास बात यह भी है कि ऊना में उगाया जाने वाला आलू नई फसल के रूप में सबसे पहले मंडियों में पहुंचता है। इसके बाद पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आलू की आपूर्ति आती है। सबसे पहले बाजार में उपलब्ध होने से इसके भाव अच्छे मिल जाते हैं। पंजाब और उत्तर प्रदेश से आलू की खेप आने पर दाम गिरने लगते हैं। यही कारण है कि किसान इसकी बिजाई समय से करना चाहते हैं।
बिजाई में मौसम का महत्व
किसान सरवण कुमार, जतिंद्र कुमार, रामपाल, देसराज आदि ने कहा कि आलू की बिजाई के तुरंत बाद अगर बारिश हो जाए तो बीज अच्छे से अंकुरित नहीं हो पाता। अत्यधिक बारिश भी आलू के लिए नुकसानदायक है लेकिन कई दिन से मौसम पूरी तरह साफ नहीं हो पाया। अब बादलों के बीच ही बिजाई करनी शुरू कर दी है। इस समय आलू के बीज के दाम 2,300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे हैं। किसान इस बीज को जालंधर सहित अन्य जिलों से खरीदकर लाते हैं। बिजाई से पहले आलू की छंटाई की जाती है जिससे सड़न वाले बीज को अलग कर दिया जाए।
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Iजिले में आलू की बिजाई हो रही है। यहां के किसानों को आलू की फसल को लेकर अच्छी समझ है। यही कारण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यह फसल अच्छे से तैयार होती है। मौसम से जुड़ी चुनौतियों में फसल के बचाव को लेकर किसान कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श जरूर लें। -Iडॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।
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