फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   Potato sowing begins, farmers are caught in the dilemma of expensive and cheap seeds.

Una News: आलू की बिजाई शुरू, महंगे-सस्ते बीज के चक्कर में फंसे किसान

Tue, 23 Dec 2025 12:15 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 23 Dec 2025 12:15 AM IST
विज्ञापन
Potato sowing begins, farmers are caught in the dilemma of expensive and cheap seeds.
ऊना। जिले में आलू की चार माह वाली (पक्की फसल) की बिजाई शुरू हो चुकी है। किसानों ने आलू की बिजाई के लिए पंजाब के केंद्रों से बीज खरीद की है। इसमें उन किसानों को घाटा उठाना पड़ा, जिन्होंने बीज खरीद को लेकर पहले से बुकिंग कर रखी थी। ऐसे किसानों को पंजाब के व्यापारी मनमाने दाम पर बीज बेच रहे हैं। दूसरी ओर जिन किसानों ने कुछ दिन पहले बीज खरीदा, उन्हें बुकिंग के मुकाबले सस्ते दाम पर बीज मिला। इससे कुछ किसान जहां ठगा महसूस कर रहे, तो कुछ सस्ता बीज मिलने पर राहत की सांस ले रहे हैं।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार ऊना जिला में 1000 से 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की चार माह वाली फसल तैयार होती है। इससे पहले सितंबर से नवंबर के मध्य तैयार हुई दो माह वाली फसल में घाटा होने पर आलू की फसल तैयार करने वाले किसानों की संख्या में कमी आ सकती है।
विज्ञापन

कई किसानों ने इस बार आलू की जगह गेहूं को तवज्जो दी। हालांकि अधिक जमीन वाले किसानों ने दोबारा आलू की बिजाई के लिए भी दांव खेला। बताया जा रहा कि जिन किसानों ने बीज खरीद को लेकर पहले से बुकिंग कर रखी थी, उन्हें 1300 से 1500 रुपये के हिसाब से प्रति क्विंटल बीज मिला। बाद में खरीद करने वाले किसानों को 1000 से 1200 रुपये तक प्रति क्विंटल बीच मिल रहा है। किसानों में विनोद कुमार, राजपाल सिंह, अजमेर सिंह, सुरेंद्र सैनी, अरविंद कुमार ने बताया की हाल ही में दो माह वाली फसल को बुरी तरह नकार दिया गया। अब बीज की कीमत मनमाने तरीके से वसूली जा रही, जो कि सरासर गलत है। अगर उनकी फसल को कम दाम मिल रहे है तो बीज की कीमत भी उसी अनुसार होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन




उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि आलू की पक्की फसल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय है। किसान इस फसल को अंकुर के हिसाब से बीज काटकर लगाते हैं इसलिए बीज की लागत कम रहती है। वर्तमान में किसानों के लिए जिला में बीज की उपलब्धता कम है। भविष्य में इस प्रकार की कोई परियोजना आती है तो निश्चित तौर पर किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed