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आयुर्वेदिक अस्पताल में शिरोधारा यंत्र से होगा पंचकर्मा
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ऊना। आयुर्वेद अस्पताल में पंचकर्मा करने के लिए अब आधुनिक शिरोधारा यंत्र का प्रयोग किया जाएगा। वर्तमान समय में पुराने शिरोधारा यंत्र का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें तापमान के पैमाने को बार बार बदलना पड़ता है। जिससे समय में अधिक लगता है। आधुनिक शिरोधारा यंत्र स्थापित होने से पंचकर्मा के दौरान तापमान को बार बार बदलने की समस्या खत्म हो जाएगी।
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में अब लोगों का आधुनिक शिरोधारा यंत्र के माध्यम से पंचकर्मा किया जाएगा। आयुष विभाग ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सुविधा के शुरू पंचकर्मा करने में पहले की अपेक्षा कम समय लगेगा और कर्मचारियों को भी पंचकर्मा के दौरान प्रयोग होने वाले रसायन को बार-बार अलग अलग तापमान में गर्म या ठंडा करने की समस्या से निजात मिलेगी। आयुर्वेदिक अस्पताल में करीब एक लाख की लागत से नया शिरोधारा यंत्र स्थापित किया जाना है। पंचकर्म विधि से कफ, रक्तचाप, मधुमेह, नजला, जुकाम, एलर्जी का इलाज होता है। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि नया शिरोधारा यंत्र स्थापित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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यह है पंचकर्मा के लाभ
रोगी के शरीर में रक्त को संतुलित कर संचालित करता रहता है। मशीन में डालकर पांच विधियां स्नेहम, स्वेदन, वमन, विरेचन और बस्ती से शरीर को रोग मुक्त किया जाता है। इस विधि से रोगी के शरीर में नई स्फूर्ति, रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है।
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जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में अब लोगों का आधुनिक शिरोधारा यंत्र के माध्यम से पंचकर्मा किया जाएगा। आयुष विभाग ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सुविधा के शुरू पंचकर्मा करने में पहले की अपेक्षा कम समय लगेगा और कर्मचारियों को भी पंचकर्मा के दौरान प्रयोग होने वाले रसायन को बार-बार अलग अलग तापमान में गर्म या ठंडा करने की समस्या से निजात मिलेगी। आयुर्वेदिक अस्पताल में करीब एक लाख की लागत से नया शिरोधारा यंत्र स्थापित किया जाना है। पंचकर्म विधि से कफ, रक्तचाप, मधुमेह, नजला, जुकाम, एलर्जी का इलाज होता है। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि नया शिरोधारा यंत्र स्थापित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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यह है पंचकर्मा के लाभ
रोगी के शरीर में रक्त को संतुलित कर संचालित करता रहता है। मशीन में डालकर पांच विधियां स्नेहम, स्वेदन, वमन, विरेचन और बस्ती से शरीर को रोग मुक्त किया जाता है। इस विधि से रोगी के शरीर में नई स्फूर्ति, रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है।
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