{"_id":"69c1286b3fdba360e6010a0e","slug":"now-you-will-have-to-provide-complete-patient-details-when-buying-cough-syrup-from-a-chemist-shop-una-news-c-93-1-ssml1047-185707-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: केमिस्ट शॉप से कफ सिरप लेने पर अब देना होगा मरीज का पूरा ब्योरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: केमिस्ट शॉप से कफ सिरप लेने पर अब देना होगा मरीज का पूरा ब्योरा
Tue, 24 Mar 2026 06:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 24 Mar 2026 06:17 AM IST
विज्ञापन
ऊना। जिले में टीबी मुक्त पंचायत अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब कफ सिरप की बिक्री को लेकर कड़े कदम उठाए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब किसी भी केमिस्ट शॉप से कफ सिरप खरीदने वाले व्यक्ति को अपना पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। बिना मरीज की जानकारी दर्ज किए दवा विक्रेता कफ सिरप नहीं बेच सकेंगे। जिला स्तर पर इसे लेकर सख्त दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
क्षय रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्य कर रहा है। बता दें कि कुछ लोग लंबे समय तक खांसी रहने के बावजूद जांच करवाने के बजाय मेडिकल स्टोर से कफ सिरप लेकर काम चलाते रहते हैं। इससे टीबी जैसी गंभीर बीमारी की पहचान समय पर नहीं हो पाती और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। निर्देशों के अनुसार, दवा विक्रेताओं को कफ सिरप खरीदने वाले व्यक्ति का नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर और खांसी की अवधि से जुड़ी जानकारी अपने रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी है तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए जागरूक करना भी दवा विक्रेता की जिम्मेदारी होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के तहत एकत्र की गई जानकारी को स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा किया जा सकता है ताकि संभावित टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इससे छिपे हुए मामलों को सामने लाने में मदद मिलेगी और बीमारी के प्रसार को रोकने में भी सहायता मिलेगी। विभाग की ओर से समय-समय पर मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया जाएगा और यदि कोई दुकानदार बिना जानकारी दर्ज किए कफ सिरप बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय स्तर पर इस निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि सरकार ने टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान तेज कर दिए हैं।
जिले भर के कैमिस्ट शॉप संचालकों को बिना ब्योरा दिए कफ सिरप न देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही संचालकों से सहयोग करने की अपील की गई है।
-डॉ. विशाल ठाकुर, जिला क्षय रोग अधिकारी ऊना
विज्ञापन
क्षय रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्य कर रहा है। बता दें कि कुछ लोग लंबे समय तक खांसी रहने के बावजूद जांच करवाने के बजाय मेडिकल स्टोर से कफ सिरप लेकर काम चलाते रहते हैं। इससे टीबी जैसी गंभीर बीमारी की पहचान समय पर नहीं हो पाती और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। निर्देशों के अनुसार, दवा विक्रेताओं को कफ सिरप खरीदने वाले व्यक्ति का नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर और खांसी की अवधि से जुड़ी जानकारी अपने रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी है तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए जागरूक करना भी दवा विक्रेता की जिम्मेदारी होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के तहत एकत्र की गई जानकारी को स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा किया जा सकता है ताकि संभावित टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इससे छिपे हुए मामलों को सामने लाने में मदद मिलेगी और बीमारी के प्रसार को रोकने में भी सहायता मिलेगी। विभाग की ओर से समय-समय पर मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया जाएगा और यदि कोई दुकानदार बिना जानकारी दर्ज किए कफ सिरप बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय स्तर पर इस निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि सरकार ने टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान तेज कर दिए हैं।
विज्ञापन
जिले भर के कैमिस्ट शॉप संचालकों को बिना ब्योरा दिए कफ सिरप न देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही संचालकों से सहयोग करने की अपील की गई है।
-डॉ. विशाल ठाकुर, जिला क्षय रोग अधिकारी ऊना