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जिला में नहीं हो पाई नए शिशु रोग विशेषज्ञों की तैनाती

Sun, 22 Aug 2021 10:14 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 10:14 PM IST
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New pediatricians were not deployed in the district Una
ऊना। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन
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जिले में शिशु रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पा रही है।
जिला में स्वास्थ्य विभाग के पास तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनके सहारे जिला भर के बच्चों का स्वास्थ्य सुविधाएं देने का जिम्मा है। ऐसे में अगर तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित होते हैं तो उनके स्वास्थ्य का देखरेख किस प्रकार की जाएगी, यह एक बड़ा सवाल है।
इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सरकार से नए शिशु रोग विशेषज्ञों को तैनात करने के लिए लंबे अरसे से मांग की है। इसके बावजूद सरकार इस मामले पर गंभीर नजर नहीं आ रही है। कोरोना संक्रमण से अब तक 245 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की दूसरी लहर के बीच जिले में कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजनयुक्त बेड और सैंपलिंग को बढ़ावा देने में लगातार कार्य किया। इसके बावजूद जिले में कोरोना के कहर ने कई जिंदगियां छीन ली।
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हालात यह है कि पूरे ऊना जिला में केवल तीन बाल रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से दो क्षेत्रीय अस्पताल ऊना और एक गगरेट अस्पताल में सेवारत है। दूसरी तरफ कोरोना संक्रमित बच्चों को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल में 30 बेड का विशेष वार्ड स्थापित किया गया है। तीसरी लहर की आशंका को लेकर स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर काम तो कर रहा है, लेकिन मात्र तीन शिशु रोग विशेषज्ञ से आने वाली चुनौतियों को निपटना आसान नहीं होगा। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऊना डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि सरकार से नए विशेषज्ञों की तैनाती के लिए मांग की गई है।
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हरोली, बंगाणा, चिंतपूर्णी, अंब क्षेत्र में नहीं कोई सुविधा
जिले में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए एक क्षेत्रीय अस्पताल, 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पांच सिविल अस्पताल और करीब 135 उप स्वास्थ्य केंद्र काम कर रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों के इलाज के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना और गगरेट अस्पताल का रुख करना पड़ता है। हरोली, बंगाणा, चिंतपूर्णी और अंब क्षेत्र में शिशु रोग विशेषज्ञ होना जरूरी है।
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