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Una News: मनरेगा कामगारों को ढाई माह से नहीं हुआ भुगतान
Tue, 18 Feb 2025 12:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 18 Feb 2025 12:03 AM IST
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बंगाणा (ऊना)। जिला में मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत हजारों मजदूरों को पिछले ढाई महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। इससे मजदूरों की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है। मजदूरों को प्रतिदिन 300 रुपये की दिहाड़ी मिलती है, जिसमें 236 रुपये केंद्र सरकार और 64 रुपये राज्य सरकार प्रदान करती है। मगर दिसंबर, जनवरी के साथ फरवरी के 15 दिनों की मजदूरी अभी तक मजदूरों के खातों में नहीं पहुंची है।
सूत्रों के अनुसार, मनरेगा मजदूरों की देय राशि की औपचारिक प्रक्रिया खंड विकास कार्यालयों द्वारा पूरी कर ली गई है। हालांकि, राशि जारी करने के लिए बैंकों से जुड़ी औपचारिकताओं में समय लग रहा है। मनरेगा मजदूरों ने समय पर अपनी हाजिरी दर्ज करवाई और बैंक खातों में भुगतान की एंट्री भी हो चुकी है। बावजूद इसके ढाई महीने बीतने के बाद भी उन्हें मेहनत की कमाई नहीं मिल पाई है। ग्रामीण इलाकों में मजदूरी पर निर्भर श्रमिकों के लिए यह समस्या गंभीर बनती जा रही है।
मजदूर यूनियन सीटू के जिला सचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि जिले में 5000 से अधिक मनरेगा मजदूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरी भुगतान में देरी के कारण यह साफ है कि योजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक अड़चनें आ रही हैं। अगर शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मजदूरों का सब्र टूट सकता है और वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले को प्राथमिकता से हल करने की अपील की और मजदूरों को उनका हक देने की मांग की।
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उधर, खंड विकास अधिकारी केएल वर्मा और बंगाणा के बीडीओ सुशील शर्मा का कहना है कि एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) जनरेट कर दिया गया है। जैसे ही केंद्र सरकार से राशि जारी होगी, भुगतान मजदूरों के खातों में खुद ही ट्रांसफर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं, और यह संभव है कि बैंक से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लग रहा हो।
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सूत्रों के अनुसार, मनरेगा मजदूरों की देय राशि की औपचारिक प्रक्रिया खंड विकास कार्यालयों द्वारा पूरी कर ली गई है। हालांकि, राशि जारी करने के लिए बैंकों से जुड़ी औपचारिकताओं में समय लग रहा है। मनरेगा मजदूरों ने समय पर अपनी हाजिरी दर्ज करवाई और बैंक खातों में भुगतान की एंट्री भी हो चुकी है। बावजूद इसके ढाई महीने बीतने के बाद भी उन्हें मेहनत की कमाई नहीं मिल पाई है। ग्रामीण इलाकों में मजदूरी पर निर्भर श्रमिकों के लिए यह समस्या गंभीर बनती जा रही है।
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मजदूर यूनियन सीटू के जिला सचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि जिले में 5000 से अधिक मनरेगा मजदूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरी भुगतान में देरी के कारण यह साफ है कि योजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक अड़चनें आ रही हैं। अगर शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मजदूरों का सब्र टूट सकता है और वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले को प्राथमिकता से हल करने की अपील की और मजदूरों को उनका हक देने की मांग की।
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उधर, खंड विकास अधिकारी केएल वर्मा और बंगाणा के बीडीओ सुशील शर्मा का कहना है कि एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) जनरेट कर दिया गया है। जैसे ही केंद्र सरकार से राशि जारी होगी, भुगतान मजदूरों के खातों में खुद ही ट्रांसफर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं, और यह संभव है कि बैंक से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लग रहा हो।